Sunday, April 4, 2010

मोर


तुमने मोर कभी देखा है
पंछी बड़ा रंगीला है ,
कहीं ,कहीं कत्थई ,बदन से
बाकी नीला -नीला है ।

उसके सिर पर कलगी होती
होती पूँछ घनी ,भारी ,
गोली फैला जिससे नाचने
की करता वह तैयारी


आसमान में बादल छाते
तब वह नाचा करता है ,
पंजों में जो तेजी होती
सांप भी उससे डरता है ।

मोर नहीं उड़ पाता ज्यादा
बैठा रहता पेड़ों पर ,
बोला करता बिल्ले जैसा
जोर -जोर से म्यांऊ कर


हरिवंश राय बच्चन