Sunday, April 19, 2009

सुनिए महादेवी वर्मा का रेखाचित्र 'सोना'

महादेवी वर्मा ने हिन्दी साहित्य को जो निधि सौंपी है, वो अनमोल है। महादेवी वर्मा ने कविता, निबंध, संस्मरण तथा रेखाचित्र आदि विधाओं में काम किया। इन्हें हिन्दी कविता के छायावादी युग का एक स्तम्भ भी कहा जाता है। ये बहुत अच्छी रेखाचित्रकार भी थीं। आधुनिक हिन्दी गद्य साहित्य में रेखाचित्र विधा का महत्वपूर्ण स्थान है। महादेवी वर्मा के ही शब्दों में- "चित्रकार अपने सामने रखी वस्तु या व्यक्ति या रंगीन चित्र जब कुछ रेखाओं के इस प्रकार आंक देता है कि उसकी मुद्रा पहचानी जा सके तब उसे हम रेखाचित्र की संज्ञा देते है। साहित्य में भी साहित्यकार कुछ शब्दों में ऐसा चित्र अंकित कर देता है जो उस व्यक्ति या वस्तु का परिचय दे सके, परन्तु दानों में अन्तर होता है।"

महादेवी वर्मा के नीलकंठ मोर, घीसा, सोना, गौरा आदि रेखाचित्र काफी प्रसिद्ध है। आज नीलम मिश्रा अपनी आवाज़ में महादेवी वर्मा का एक रेखाचित्र 'सोना' लेकर आई हैं। सुनिए और बताइए अपने अनुभव-





चित्र साभार- राधिका


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8 पाठकों का कहना है :

manu का कहना है कि -

तकनीकी समस्या के चलते जाने कब सूना जा सके,,,,
पर महादेवी जी का लिखा निलामजी की दूर से आती आवाज में होगा तो यकीनन ,,शानदार ही होगा,,,,,,,,,,
अभी तो केवल इस घास चरते हिरन का ही आनद ले पा रहा हूँ,,,

Shanno Aggarwal का कहना है कि -

नीलम जी,
सोना के बचपन से लेकर अंत तक की कहानी बहुत प्रभावशाली रही. माँ को खोने के बाद भी उसका पालन-पोषण कितने लाड़-प्यार से महादेवी जी की देखभाल में हुआ. उनके संरक्षण में अपने भोले-भाले बचपन को स्वाभिक रूप में जिया. लेकिन अंत बड़ा दुखमय लगा कि एक मूक प्राणी ने अपने संरक्षक का अभाव इतना महसूस किया कि उसकी जीने की लालसा ही नहीं रही और अंत में उसने प्राण ही त्याग दिये. बहुत ही ह्रदय-स्पर्शी कहानी. और इसे अपनी प्यारी आवाज़ में सुनाने का बहुत धन्यबाद.

divya naramada का कहना है कि -

महादेवी जी के ममतामयी मन, प्रांजल भाषा, सटीक शब्दावली, सूक्ष्म अनुभूति तथा संस्कारिक शैली मन पर अविसमरणीय प्रभाव छोड़ती है. ऐसी ही रचनाएं कालजयी होती हैं. नव रचनाकारों के लिए इन तत्वों को ग्रहण कर अपनी रचनाओं में समाहित करना उनकी स्वीकार्यता में वृद्धि करेगा. नीलम जी के शुद्ध, भावानुरूप उच्चारण ने 'सोने में सुहागा' की कहावत को चरितार्थ किया है. -साधुवाद.

Sajeev का कहना है कि -

कहानी सटीक चुनी है, नीलम जी का वाचन अच्छा है पर सुधार की गुन्जायिश है, आवाज़ पर उनकी कहानियो के मुकाबले में, तकनीकी रूप से भी संयोजन में कुछ कमियां रह गयी है.....बाल उधान पर इस नयी शुरुआत के लिए बधाई....जारी रहे, शन्नो जी भूपेन जी आप सब भी योगदान दें

सीमा सचदेव का कहना है कि -

नीलम जी ,
मैने आपको पहले भी बताया था कि मै तकनीकी खराबी के कारण आपकी आवाज नही सुन पाई कभी लेकिन महादेवी जी के रेखाचित्र
घीसा , रामा , गोरा , सोना.......पढे हुए हैं । मै जानती हूं यह कितनी मार्मिक कहानी है । आपकी आवाज मे सुन पाती तो बहुत अच्छा लगता लेकिन समरण कराने का बहुत-बहुत धन्यवाद । महादेवी जी के बाकी रेखाचित्र ही बाल-उद्यान पर आएंगे तो बहुत अच्छा लगेगा । साथ मे लगाया हुआ चित्र बहुत सुन्दर है , बिल्कुल सोना जैसा ।

Shanno Aggarwal का कहना है कि -

ओ मेरी सोना रे, सोना रे, सोना रे
दे दूँगी जान खफा मत होना रे
मैंने तुझे बड़ी देर में जाना
हुआ कसूर खफा मत होना रे.
ओ मेरी सोना रे, सोना रे, सोना रे.

याद आया न, सबको यह गाना? क्यों?

Pooja Anil का कहना है कि -

नीलम जी,

महादेवी जी का रेखाचित्र आपकी आवाज़ में सुन कर बहुत अच्छा लगा, सोना की कहानी दिल को गहरे तक छूती है.

फोटो बहुत ही सुन्दर बन पढ़ा है.

पूजा अनिल

Smart Indian का कहना है कि -

रेखाचित्र बहुत ही ह्रदय-विदारक है और वाचन बहुत अनुकूल. हाँ रिकॉर्डिंग में कुछ पंक्तियों में दोहराव हो गया है, कृपया ध्यान देवें. कुल मिलाकर बहुत अच्छा प्रयास है - आगे ऐसे प्रयास जारी रहें तो बहुत अच्छा हो.

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