Saturday, February 27, 2010

सुनिए यह कदम्ब का पेड़

बच्चो,

आज हम सुभद्रा कुमारी चौहान की बहुत प्रसिद्ध कविता 'यह कदम्ब का पेड़' आपको सुनवाये आये हैं। इसे आवाज़ दिया है अर्चना चावजी ने, जो इंदौर के कोलंबिया कोंवेंट स्कूल में स्पोर्ट टीचर के पद पर 12 वर्षो से कार्य कर रही हैं।

यह कदंब का पेड़

यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे।।

ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली।
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली।।

तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता।।

वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता।
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हे बुलाता।।

बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता।
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता।।

तुम आँचल फैला कर अम्मां वहीं पेड़ के नीचे।
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे।।

तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता।
और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता।।

तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती।
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं।।

इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे।
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।।

नीचे के प्लेयर से यह कविता सुनिए-




अर्चना चावजी


Thursday, February 25, 2010

महान नायिकाएं -भीखा जी कामा


भीखा जी कामा

भीखा जी कामा एक ऐसी अद्भुत महिला थीं , जिन्होंने देश -प्रेम और समाज सेवा के लिए सारी सुख -सुविधाओं और घर गृहस्थी का त्याग कर दिया .उनके पति ब्रिटिश समर्थक थे ,अतएव वे उनसे अलग हो गयीं .वे पहली भारतीय महिला थीं ,जिन्होंने विदेश में राष्ट्रीय स्वातंत्र्य की मशाल जलाई और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर राष्ट्र ध्वज फहराया .अपनी अद्भुत संगठन शक्ति के बल पर उन्होंने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी .उनका देश -प्रेम ,त्याग

अमर रहेगा .

साभार

(भारतीय योग संस्थान)


Sunday, February 21, 2010

बचे हुए सामान से कुछ रचनात्मक चित्र

२६ जनवरी पर" बचे हुए सामान से कुछ रचनात्मक "बनाने का प्रयास करवाया गया था बच्चों से, उनमे कुछ उल्लेखनीय चित्र देर से ही सही पर आपके सामने लाये हैं उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेंगे ,बच्चों के प्रयास को थोड़ी प्रशंसा मिलनी ही चाहिए जिसके वो असली हकदार हैं

पाखी मिश्रा (प्रथम पुरस्कार )कक्षा
बाल भारती पब्लिक स्कूल


हर्षिता नाँगिया (प्रथम पुरस्कार )कक्षा
बाल भारती पब्लिक स्कूल

प्राकृति घोष( सांत्वना पुरस्कार ) कक्षा
सचदेवा पब्लिक स्कूल
किशा अरोरा -प्रथम (नर्सरी कक्षा )
वेंकटेश्वर पब्लिक स्कूल

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Saturday, February 20, 2010

आज का विचार





बिन सोचे नहीं कीजिए , कटु वचन का वार
तो को तो कुछ शब्द हैं , वाकु पर प्रहार
वाकु पर प्रहार , चुभे ज्यों कोई शूल
चुभता है हर पल , फ़िर चाहे फ़ैंको फ़ूल
ऊपर से मुस्काएं , पर मन में तो खिन्न
खटकत हैं वो शब्द , कहे जो सोचे बिन ।


Tuesday, February 16, 2010

परीक्षा के दिन

प्यारे बच्चो,

मैं आप सबसे बहुत दिनों बाद मिल रही हूँ. आज कल आप लोगों की परीक्षायें चल रही हैं. तो उम्मीद है की आप सभी लोग खूब मन लगाकर पढ़ाई भी कर रहे होंगें. पर्चे देने के बाद अगले पर्चे की तैयारी में जुट जाते होंगे. जीवन में यही समय ही तो होता है मेहनत करके अपना आने वाला भविष्य सुखमय और उज्जवल बनाने का. यदि खूब मन लगाकर परीक्षा दें तो मेहनत जरूर सफल होती है. अपने में आत्म बिश्वास रखिये तो अच्छे अंक लेकर उतीर्ण होंगे. आपकी दिनचर्या का क्या हाल है? मेरे ख्याल से आजकल इम्तहान की वजह से आप लोग सुबह जल्दी उठते होंगें. और फिर तैयार होकर पेपर देने जाते होंगें. मन में कुछ घबराहट सी भी लगती है परीक्षा के दिनों में चिंता के मारे ...मुझे भी लगा करती थी. किन्तु अपने मन को शांत रखें और लगन से पढाई करें घर पर. और बीच में थक जाने पर कुछ आराम कर लें तो दिमाग में ताजगी आ जाती है. खाने में भी अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें...मानसिक ताकत के लिए आप लोग रोज दूध, मेवा व फल भी लें. समय पर सुबह उठ कर तैयार होना, नाश्ता आदि करके निकलें आप लोग और शांत मन से पेपर दें. घबराएँ बिलकुल ना. और परीक्षा देने जाते समय अपने बड़ों का आशीर्वाद जरूर लें. मुझे पता है की आप सभी तन-मन से डटकर अब पढ़ेंगे और अच्छा परिणाम पायेंगे. मेरी तरफ से आप सबको तमाम शुभकामनायें.

-शन्नो अग्रवाल


Monday, February 15, 2010

नादान कौन ?

नादान कौन ?
रोहन ने कबूतर को उड़ाने के लिए रेत उछाली तो वह दीपेश के बालों में जा गिरी. दीपेश ने रोहन को धक्का दिया तो वह लडखडा कर गिर गया. रोहन का घुटना छिल गया. शाम को रोहन के पिता दीपेश के घर जाकर उसके पिता से लड़ पड़े. हाथापाई, हंगामा किसी ने थाने फोन कर दिया, पुलिस आई और दोनों को पकड़ ले गई. आस पड़ोस वाले गए और बीच बचाव कर दोनों को छुड़ा लाये.
दुसरे दिन छुट्टी के समय दीपेश और रोहन गोल गोल घूम रहे थे, ज्यादा घूमने से चक्कर आये तो खिलखिला कर एक दुसरे से लिपट गए। बच्चो को लेने आई, दोनों की मम्मियों ने स्कूल के दरवाजे पर खड़े हो यह दृष्य देखा. दोनों मम्मियों की नज़रे मिली और मुंह फेर लिया

विनय के जोशी


बाल किसानों के लिये रसगुल्ले की उन्नत किस्म ..








बडा सलौना नजुक प्यारा सुन्दर सा मन
भोला भाला नटखट सा होता है बचपन
एक बार मांमां जी मेरे घर पर आये
मेरी फ़ेवरेट मिठाई, रसगुल्ले लाये
मैंने सोचा रसगुल्ले जब खायें‍गे सब
सारे के सारे ही फ़िनिश हो जायें‍गे तब
सोचा बच्चू ऐसी कोई युक्ति लडाऐं
ताकि ये रसगुल्ले खत्म ना होने पायें ‍
छुपकर ले गया दो रसगुल्ले नज़र बचाकर
बगिया मे‍ बो दिये मैंने पिछवाडे जाकर
कई दिनो‍ तक रोज देखता सुबह शाम मैं‍
मन ही नहीं‍ लगता था मेरा किसी काम में‍
रोज सोचता आज उगा होगा रसगुल्ला
मगर दिनों तक धरती से ना फ़ूटा कुल्ला
माली काका को हमने जब बात बताई
हुई शिकायत घर पर और फिर खूब धुनाई
दिल के अरमां आंसुओं में बह गये सारे
अक्ल बडी या भैंस मालुम तभी हुआ रे ..
अक्ल बडी या भैंस मालुम तभी हुआ रे ..



Friday, February 12, 2010


बगुलों की पांत !

बगुलों की पांत !

एक, दो ,तीन ,चार ,

पाँच ,छ: ,सात .....

सातों पर फड़काते साथ ,

सातों उड़ते जाते साथ !

सातों बनाते एक लकीर --

आसमान में छूटा तीर |

तीर कहाँ को जाएगा ?

देखें ,कौन बतायेगा !

बगुलों की पांत !

बगुलों की पांत !

एक- दो -तीन -चार- -पाँच- छ:- सात !

हरिवंश राय बच्चन


Monday, February 8, 2010

मेरा परिवार



खुशियों का संसार है
जीवन का आधार है।
सुख ही नहीं दुख भी बाँटे
ऐसा मेरा परिवार है।।

माँ-बाबूजी कदम-कदम पर
सही गलत समझाते हैं।
भटकें ना जीवन की राहों में
ऐसे संस्कार सिखलाते हैं।।
रिश्तों का पारावार है
ऐसा मेरा परिवार है।।

निश्चल अमिट प्यार की नदियाँ
घर आँगन में बहती हैं।
एक-दूजे पर जो मिट जायें
यहाँ ऐसी बहनें रहती हैं।।
भैय्या का भी दुलार है
ऐसा मेरा परिवार है।।

--दीपाली पंत तिवारी


Friday, February 5, 2010

कसौटी

कसौटी

एक दिन चाणक्य का एक परिचित उनके पास आया और उत्साह से कहने लगा ,"आप जानते हैं ,अभी अभी मैंने आपके मित्र के बारे में क्या सुना ?"
चाणक्य अपनी तर्क -शक्ति ,ज्ञान और व्यवहार -कुशलता के लिए विख्यात थे .उन्होंने अपने परिचित से कहा ,"आपकी बात मै सुनूँ ,इसके पहले मै चाहूँगा कि आप त्रिगुण परीक्षण से गुजरें
" यह त्रिगुण परीक्षण क्या है ?"
चाणक्य ने समझाया ,"आप मुझे मेरे मित्र के बारे में बताएं इसके पहले अच्छा यह होगा कि जो कहें ,उसे थोडा परख लें ,थोडा छान लें .इसीलिए मै इस प्रक्रिया को त्रिगुण परीक्षण कहता हूँ .इसकी पहली कसौटी है सत्य .क्या यह पक्का है कि जो आप कहने वाले हैं वो सत्य है ? "
"नहीं वह आदमी बोला ,वास्तव में मैंने इसे कहीं सुना था ।"
"ठीक है ".चाणक्य ने विश्लेष्ण किया ."आपको पता नहीं है कि यह बात सत्य है या असत्य .अब हम दूसरा परीक्षण करते हैं । दूसरी कसौटी है अच्छाई .क्या आप मुझे मेरे मित्र की कोई अच्छाई बताने वाले हैं ?"
" नहीं "बल्कि इसके उलट ........."
"तो "चाणक्य ने आगे कहा ,जो आप कहने वाले हैं वो न तो सत्य है ,न ही अच्छा .चलिए तीसरा परीक्षण कर ही डालते हैं ।"
"तीसरी कसौटी है -उपयोगिता .जो आप कहने वाले हैं ,वह क्या मेरे लिए उपयोगी है ?"
"नहींऐसा तो नहीं है
अब चाणक्य ने आखिरी बात कह दी ।
"आप मुझे जो बताने वाले हैं ,वह न सत्य ,न अच्छा और न उपयोगी है ,फिर मुझे बताना क्यों चाहते हैं ?"
शिक्षा -किसी भी सम्प्रेषण को सच ,अच्छाई और उपयोगी -इन्ही तीनों कसौटियों पर ही जांचना -परखना चाहिए

( सम्प्रेषण- बातचीत )
संकलन
नीलम मिश्रा


Wednesday, February 3, 2010

हितोपदेश 19 - मूर्ख गधा

इक धोबी के पास गधा
करता रहता काम सदा
कपड़े सारे उसके उठाता
और नदी पर छोड़ के जाता
लेता धोबी बहुत सा काम
गधे को न मिलता आराम
न मिलता खाना भर पेट
भूखे पेट ही जाता लेट
हो गया गधा बहुत कमजोर
नहीं रहा था उसमें जोर
पहुँच गया वह मरण किनारे
और अब धोबी मन में विचारे
जो इसका नहीं पेट भरेगा
तो यह भूखा ही मरेगा
आया उसको एक ख्याल
ओढ़ा दी उसे बाघ की खाल
छोड़ दिया उसको आज़ाद
खेतों में फसलों के पास
मिलता उसको पेट भर खाना
मिला हो जैसे कोई खजाना
सारा दिन वह फसलें चरता
भरता पेट और मस्ती करता
कुछ ही दिन में आ गया जोश
सँभल गए गधे के होश
इक दिन खेत का मालिक आया
देख के गधे को वो भरमाया
समझ लिया गधे को बाघ
दूर से देख गया वो भाग
दूजे दिन मालिक फिर आया
साथ मे धनुष-वाण भी लाया
पहने उसने कपड़े काले
ताकि बाघ को भ्रम में डाले
गधा समझ कर बाघ आ जाए
और वो उसको मार गिराए
बैठा छुप कर वृक्ष की डाली
समझा गधे ने है गधी काली
खुश हो देख के भाग के आया
टै-टै करके वो चिल्लाया
जैसे ही गधे की सुनी आवाज़
समझ गया मालिक सब राज
ओढ़ी गधे ने बाघ की खाल
चली किसी ने मुझ संग चाल
आसानी से उसको मारा
मर गया था अब गधा बेचारा


Tuesday, February 2, 2010

२६ जनवरी पर प्रस्तुत मनमोहक चित्र