Thursday, April 29, 2010

मछली जल की रानी हैं

मछली जल की रानी हैं

प्यारे बच्चों आज हम तुम्हे दिखाएँगे कुछ प्यारी -प्यारी तस्वीरें जो हम लायें हैं ख़ास तुम्हारे लिए जम्मू के fish aquarium से तुम लोगों को बचपन की वो कविता याद है ना .............

मछली जल की रानी हैं



जीवन उनका पानी है

हाथ लगाओगे तो डर जायेंगीं

बाहर निकालोगे तो मर जायेंगीं

पानी में डालोगे तो सारा पानी (नहीं )पी जायेंगीं

(फोटो -दीपक मिश्रा के सौजन्य से )


Tuesday, April 27, 2010

हँसना मना है

एक बच्चा अपने पापा के साथ मूर्तियों कि दूकान पर गया । एक कर्मचारी उन्हें कुछ मूर्तियाँ दिखाने लगा .उसने बच्चे को मूर्ति दिखाते हुए कहा, "देखो बेटा यह भालू की मूर्ति है ,यह घोड़े की और यह गोरिल्ला की.... "

बच्चे ने एक मूर्ति की तरफ इशारा करते हुए कहा

"फिर यह मूर्ति किस जानवर की है ?"

"धीरे बोलो बेटा ,यह मूर्ती नहीं इस दूकान के मालिक हैं "

कर्मचारी ने बच्चे से कहा।

(मूर्ति -statue )


(क्या आप जानते हैं उपरोक्त चुटकुले में दिए गए सभी जानवरों कि उम्र कितनी है ,जल्दी बताइये हा , हा, हा. हा )


Sunday, April 18, 2010

बाल चित्रकार पूजा यादव की कूची का जादू

दोस्तो,

आज हम आपकी मुलाक़ात एक बेहद हुनरमंद बालिका से कराने जा रहे हैं। इस बाल चित्रकार के स्केच देखकर आप हैरान हो जायेंगे। हाथ कंगन को आरसी क्या। आप खुद देखें-


पूजा प्रेम यादव

जन्मतिथि- 17 जून 1997
कक्षा- 7
स्कूल- एसबीओए पब्लिक स्कूल, औरंगाबाद, महाराष्ट्र।
कक्षा में हमेशा शुरू के दो स्थानों में होती हैं।
रुचियाँ- चित्रांकन (ड्रॉइंग), चित्रकारी, नृत्य, किताबें पढ़ना और खेलना।
उपलब्धियाँ- राज्यस्तरीय और राष्ट्रस्तरीय एथलीट प्रतियोगिता में भाग लिया। ललित कला अकादमी की ओर से ड्रॉइंग और पेंटिंग के लिए ढेरों पुरस्कार प्राप्त किये। ज़ी, ज़ेप और इनफाइनाइट जैसे समूहों की ओर से डांसिंग के लिए अवार्ड। बूगी-वूगी में भी भाग लिया। राज्यस्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में पुरस्कृत।
























Tuesday, April 13, 2010

जादुई पतीली

 

एक गाँव में चम्पा मौसी हाथ में सदा रहती थी सड़सी दिन भर बस वह खाना पकाती बुला कर सबको खीर खिलाती ... चम्पा मौसी की बेटी छबीली नाम था उसका रामकली घर में थी एक अनोखी पतीली विरासत में थी उनको मिली ... जब-जब उनको भूख लगती मौसी उसे चूल्हे पे चढ़ाती और कहती ..... पतीली पतीली खाना पका भूख लगी है खीर पका खीर उबलने लगती घर आँगन महका जाती फ़िर मौसी कहती .... पतीली पतीली तू ठप हो जा भूख भागी तू ठप हो जा ... पतीली पकाना बंद कर देती खीर उबलनी बंद हो जाती दोनों मन से खीर खाते पतीली के बस गुण ही गाते ..... चम्पा मौसी और राम कली दोनों मन से बड़ी ही भोली रखकर अपने साथ पतीली फिर भी न थे दोनों गरबीली .. रामकली की सभी सहेली खीर खाने बड़ी उतावली वह भी सबको चाव से बुलाती रोज उन्हें खीर खिलाती मुन्नी आती गुड्डी आती सबको मीठी खीर खिलाती देखो देखो बच्चो... छोटी पतीली खीर पकाए सबकी कैसी भूख मिटाए ह्म्म्म......पर बच्चो चम्पा मौसी का था एक पड़ोसी करता था वह अक्सर बदमाशी वह था बड़ा लोभी हलवाई उसके मन में एक बात जो आयी सोचा..... चम्पा मौसी काम न करती फिर भी कैसे खीर खिलाती मौसी तो है सदा से अकेली आख़िर है ये कैसी पहेली जाकर कहा ..... चम्पा मौसी भूख लगी है खीर खिलाओ भूख लगी है खूब खीर मैं खा जाऊँ और मोटा जरा मैं हो जाऊँ मौसी थी बड़ी ही भोली चूल्हे पर रख दी पतीली और बोली... भूख लगी है खाना पका झट पट झट पट खीर पका .... पतीली ने जैसे ही खीर पकाई बात हलवाई के मन को भाई देख इसे वह चकराया पतीली चुराने अकड़ गया अगले दिन .... घूमने जब मौसी थी गई ले आया पतीली वह हलवाई पहुँच घर वह कहने लगा......... भूख लगी है खाना पका झट पट खीर पका खीर उबलकर छलकने लगी बहकर देखो फैलने लगी पूरे गाँव में फैलने लगी घर-आँगन में फैलने लगी हलवाई कहे अब बस भी करो खीर पकाना बंद करो पतीली तो बात न माने मौसी ही मन्त्र जो जाने ..... चम्पा मौसी खीर जो देखी हलवाई की चाल भी समझी हँसी जोर से हा हा हा हा हा हा हलवाई बड़ा शरमाया मौसी जी के पास जो आया कहा .. मौसी मौसी माफ़ कर दो खीर पकाना बंद करा दो फ़िर मौसी ने पतीली के कान में मन्त्र फूंका ..... पतीली पतीली तू ठप हो जा भूख भागी तू ठप हो जा खीर उबलनी बंद हो गयी बात उसकी समझ न आयी पतीली लेकर मौसी भी गयी फिर से सब को खीर खिलायी अब तो हलवाई के सपने में जब भी दिखती पतीली शर्म से उसकी आँखें हो जाती गीली गीली ....हा हा हा हा हा तो बच्चो.... मन में लोभ कभी न रखना दूसरों का धन न हड़पना जो सब की भलाई करते उनकी प्रशंसा सब ही करते .....

--सुनीता यादव
(बच्चो, सुनीता यादव ने लोककथाओं को कविता के रूप में अनूदित किया है। वो इन कविताओं को संगीतबद्ध भी कर रही हैं)।


Saturday, April 10, 2010

सबसे मुश्किल काम क्या है बीरबल?????????


एक दिन बीरबल दरबार में देर से पहुंचे ,पूछने पर उन्होंने बताया कि "जहाँपनाह आज मुझे बच्चों को संभालना पड़ा ।
इसलिए देर हो गयी .अकबर ने बिस्मय से पूछा "यह भी कोई काम हुआ क्या "
बीरबल ने कहा "जहाँपनाह बच्चों को संभालने का काम सबसे कठिन काम है .जब यह काम सर पर आ पड़ता है, तो कोई भी काम समय पर नहीं हो पाता है "
बादशाह बोले ,"बीरबल ,बच्चों को बहलाना तो सबसे आसान काम है उनके हाथ में कोई खाने की चीज या खिलौना पकड़ादो ,और हो जाता है काम "
बीरबल ने कहा हुजूर आपको इन बातों का अनुभव नहीं है इसलिए आपको यह काम आसान लग रहा है ,चलिए मै छोटा बच्चा बनता हूँ आप मुझे बहला के देखिये ,फिर आपको समझ में आएगी मेरी बात ।
बादशाह तुरंत राजी हो गए ।
बीरबल छोटे बच्चे की तरह जोर -जोर से रोने लगे -"अब्बा हमे दूध चाहिए "
बादशाह ने फ़ौरन दूध मंगवा दिया
दूध पीने के बाद बीरबल ने कहा अब हमे गन्ना चूसना है ।
बादशाह ने गन्ना मंगवाया और छोटे -छोटे टुकड़े करवा दिए .बीरबल ने उसे छुआ तक नहीं और रोते ही रहे .रोते रोते बोले हमे तो पूरा गन्ना चाहिए .बादशाह ने दूसरा गन्ना मंगवाया .मगर बच्चा बने बीरबल रोते ही रहे "यह गन्ना मुझे नहीं चाहिए मुझे तो पहले वाला गन्ना ही पूरा चाहिए ,कहते हुए बीरबल जोर -जोर से रोने लगे ।
यह सुनकर बादशाह झल्ला उठे और बोले -"बकवास मत कर ,चुपचाप चूस ले ,कटा हुआ गन्ना अब कैसे पूरा हो
सकता है ."
नहीं मुझे तो पूरा गन्ना वो वाला ही चाहिए ।
बादशाह क्रोधित होकर बोले है कोई इसे ले जाओ यहाँ से ।
बीरबल हस पड़े
बादशाह को स्वीकारना पड़ा कि बच्चों को संभालना वास्तव में सबसे मुश्किल काम है

संकलन
(नीलम मिश्रा)
(चित्र गूगल से साभार )


Sunday, April 4, 2010

मोर


तुमने मोर कभी देखा है
पंछी बड़ा रंगीला है ,
कहीं ,कहीं कत्थई ,बदन से
बाकी नीला -नीला है ।

उसके सिर पर कलगी होती
होती पूँछ घनी ,भारी ,
गोली फैला जिससे नाचने
की करता वह तैयारी


आसमान में बादल छाते
तब वह नाचा करता है ,
पंजों में जो तेजी होती
सांप भी उससे डरता है ।

मोर नहीं उड़ पाता ज्यादा
बैठा रहता पेड़ों पर ,
बोला करता बिल्ले जैसा
जोर -जोर से म्यांऊ कर


हरिवंश राय बच्चन


Saturday, April 3, 2010

किसको कैसे जीते

मित्र को -सरल व्यवहार से
शत्रुको -उपाय से
स्वामी को -कार्य से
विद्वान् को -आदर से
क्रोधी को -नम्रता से
कंजूस को -पैसे से
भगवान् को -भक्ति से
सबको -प्रेम से