Tuesday, December 18, 2007

बूझो तो जाने ,

1:)आसमान से धीरे धीरे
सदा रात को मैं आती
सुबह सुबह मोती बन के
तिनकों पर सो जाती !!

2:)सागर से पानी भर लाता
आ कर सबकी प्यास बुझाता


3:) ऊपर से गिर कर शोर मचाता
फिर भी सबके दिल को भाता










4:)पानी में भी मैं रह सकता
और जमी पर भी उछलता
वर्षा ऋतु है मुझे प्यारी
सर्दी गर्मी है मुझ पर भारी






5:)चाहो जहाँ वहाँ ले जाओ

सदा साथ में रह सकता हूँ
संपर्क किसी से टूटने ना दूँगा
ऐसा दावा भी मैं करता हूँ





6:)दूर हम रहते हैं
नही पकड़ में आते हैं
दिन में कोई देख ना पाए हमे
रात को घर से बाहर निकल आते हैं





7:)बोलो कौन गगन से उँचा
और है सागर से भी गहरा
जिस पर कभी लग नही सकता
बंदूकों का पहरा है





8:) हम माँ बेटी

तुम माँ बेटी
चलो बाग़ को जाए
तीन आम तोड़ कर
पूरा पूरा खाए
बताओ कैसे
कौन है हम
ज़रा बताओ
बुझो नही तो
हम बतलाये :)






उत्तर ...1,ओस ,2,बादल ,3,झरना,4,मेढक,5,सेल फोन ,6,तारे,7,मन.8,माँ बेटी नानी


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6 पाठकों का कहना है :

रचना सागर का कहना है कि -

रंजू जी,

बहुत अच्छी पहेलियाँ...

बचपन की याद दिलाती है

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

सभी बेहतरीन पहेलियीँ हैं। रंजना जी आपने बाल-उद्यान को जो रचनात्मक विविधता प्रदान की है उसके लिये आप बधाई की पात्र हैं।

*** राजीव रंजन प्रसाद

sahil का कहना है कि -

रंजू जी बच्चों को अपनी बात समझाने का बेहद प्यारा तरीका है पहेली, और आप बच्चों को रिझाने का कोई मौका तो छोड़ने से रहीं.
बहुत अच्छे
आलोक सिंह "साहिल"

Alpana Verma का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
Alpana Verma का कहना है कि -

रंजू जी,
आप की पहेलियाँ बाल-उद्यान को रोचक और रचनात्मक बना रही हैं .
साथ दिए चित्र पहेलियों को समझाने में सहायक हैं.
आखिरी पहेली सबसे अच्छी लगी.

बालसुब्रमण्यम का कहना है कि -

अच्छी पहेलियां हैं। कुछ और पहेलियां यहां हैं - बाल जयहिंदी

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