Wednesday, October 22, 2008

दीपावली की शुभकामनाएँ


आई दिवाली आई दिवाली
ढेरों खुशियाँ लाई दिवाली
मिलकर खाएँगे मिठाई

सजेंगें घर मे वन्दनवार
मिलेंगें ढेरों उपहार
महालक्ष्मी का होगा पूजन
लड्डू खाएँगे गजनन्दन
नए-नए कपड़े हम पहनेगे
घूम-घाम कर मजे करेंगें

जगमग-जगमग दीप जलेंगें
फुलझडियाँ और पटाखे चलेंगें
होगी रौशन काली रात
तम मे भी होगा प्रकाश
महालक्ष्मी घर मे आएगी
ढेरों खुशियाँ दे जाएगी
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भोला का सपना

आया दीपों का त्योहार
सज रहा था सारा घर-बार
देख रहा था सबकुछ भोला
जाकर वो पापा से बोला
क्यों हो रहे सब इतने तैयार
सज रहा क्यों सबका घर-बार
खूब पटाखे और मिठाई
क्यों बाज़ार मे सबने सजाई
भोले भोला की भोली बात
पापा को जैसे मिली सौगात
प्यार से फिर उसको समझाया
साज-सज्जा का राज बताया
बताई राम-लखन की कहानी
कथा बडी है जानी मानी
चौदह वर्ष काटा वनवास
फिर आया था दिन यह खास
जिस दिन वो घर वापिस आए
लोगों ने घर-बार सजाए
खुशी मे इसकी दीप जलाए
तो यह दीपावली कहलाए
करते महालक्ष्मी का पूजन
ताकि हो जाए माँ प्रसन्न
हो धन -धान्य की बरसात
मिट जाए अँधियारी रात
चलाएँगे फुलझडियाँ और पटाखे
सोएँगे खूब मिठाई खा के
आएगी लक्ष्मी अपने घर
देगी हमे मन चाहा वर
खुश था भोला सुन के बात
दीपावली की आएगी रात
महालक्ष्मी को वो देखेगा
जो चाहेगा वो माँगेगा
सोचते ही भोला सो गया
सुन्दर सपनो मे खो गया
देखा उसने सपना अजीब
हो गए सारे लोग गरीब
लक्ष्मी नही कहीं भी आई
न ही देखी कोई मिठाई
रोने लगा यह देख के भोला
लक्ष्मी ने आ दरवाजा खोला
पूछा भोला ने क्यों नही आई ?
न ही हमको मिली मिठाई
बोली लक्ष्मी,कैसे आऊँ ?
क्या-क्या मै तुमको बतलाऊँ ?
करते सब मेरा अपमान
कितना करते है नुकसान
देती हूँ मै इसलिए धन
ताकि सुखमय हो सबका जीवन
पर न करे अच्छा उपयोग
फैलाएँ कितने ही रोग
छोडे सब इतने पटाखे
फैले धुआँ सब नभ मे जा के
दूषित हो जाए शुद्ध वायु
हो जाए कम जीवो की आयु
ऐसी वायु मे ले जो साँस
बिमारियाँ उसमे पनपे खास
होता है कितना ही शोर
सुनने मे भी लगता जोर
व्यर्थ मे लक्ष्मी को जलाएँ
फिर घर मे पूजा करवाएँ
मै तो बसती हूँ कण-कण मे
खुश होती शुद्ध पर्यावरण मे
पर्यावरण जो न हो शुद्ध
तो मै हो जाती हूँ क्रुद्ध
वहाँ पे मै फिर नही रह पाऊँ
कभी भी फिर वापिस न आऊँ
जो मुझे बुलाना चाहते हो घर
करो सदा लक्ष्मी का आदर
न फैलाओ कोई प्रदूषण
शुद्ध रखो अपना पर्यावरण
जो सब मिलकर वृक्ष लगाओ
तो मुझे अपने घर पर पाओ
होगी जो चहुँ ओर हरियाली
तो होगी हर दिन दिवाली

मानोगे जो मेरी बात
तो मै आऊँगी हर रात
कुछ बच्चे ऐसे भी यहाँ पर
कपडे नही है जिनके तन पर
जिनको नही मिलता है खाना
उनके साथ त्योहार मनाना
एक बात का रखना ध्यान
खतरे मे न हो किसी की जान
नही लेना कोई सस्ती मिठाई
जिसमे घटिया चीजे मिलाई
खाकर जिसको हो बीमार
करना पडेगा फिर उपचार
फिर मै आऊँगी घर पर
दूँगी तुम्हे मन चाहा वर
कह कर लक्ष्मी माँ हुई ओझल
भोला की आँखे गई खुल
जाकर उसने सबको बताया
लक्ष्मी का सन्देश सुनाया
सबकी बात समझ मे आई
मिलकर इक योजना बनाई
खूब लगाए पौधे मिलकर
फिर सबने अपने घर जाकर
कई सारे पकवान बनाए
भूखे बच्चों को खिलाए
दिए उनको कपड़े उपहार
मनाया दिवाली का त्योहार
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.................
बच्चो तुम भी रखना ध्यान
पर्यावरण न हो नुकसान
खुशी-खुशी त्योहार मनाना
अपना वातावरण बचाना

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दीपावली के पावन अवसर पर हिन्द युग्म परिवार तथा
सभी हिन्दवासियोँ को हार्दिक बधाई एवम् ढेरोँ शुभ-कामनाएँ........सीमा सचदेव


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4 पाठकों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

seema ji yahi pyaar aur utsaah banaaye rakhiye ,is baal udyaan ke prati

Kavi Kulwant का कहना है कि -

taarif karun kya uski...
zisne kavita banayee...

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

सुंदर संदेश। चूँकि बच्चों को बताना मतलब अधिक ध्यान से ताकि कुछ गलत न सीख जाय। टंकण की अशुद्धियों को नज़र-अंदाज़ न करें।

sahil का कहना है कि -

बहुत ही स्वीट कविता है,वैसे शैलेश जी के बात पर भी ध्यान दीजियेगा.
आलोक सिंह "साहिल"

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