Thursday, June 5, 2008

आऊँ दिखाऊँ तुम्हें एक भयानक सपना

एक सपना

रात को सोते हुए अचानक
देखा सपना एक भयानक
आओ मैं तुम सबको बताऊँ
सत्य से परिचय करवाऊँ
सूखी धरा प्यासे लोग
सभी को कोई न कोई रोग
चलते मुँह पर रखके रुमाल
सूखे पानी के सब ताल
नहीं था खाने को शुद्ध खाना
न पक्षियों के लिए ही दाना
ऑक्सीजन के भरे सिलेण्डर
रखे हुए थे सब कंधों पर
सारे दिखे कुली के जैसे
चलते-फिरते मरीज़ों जैसे
बडा भयानक था वो मंजर
देख के मैं तो गई थी डर
फिर एक किरण की सुनी पुकार
बोली मन में करो विचार
मानव की गलती का ही फल
जो नहीं मिलता है शुद्ध जल
काटता रहता मानव पेड़
करता प्रकृति से छेड़
तभी तो शुद्ध नहीं है वायु
कम हो गई मानव की आयु
न तो शुद्ध मिलता है खाना
न पक्षियों के लिए ही दाना
पर जो थोड़ा करो विचार
हो सकता है इनमें सुधार
इक-इक वृक्ष जो सभी लगाएँ
तो यह वातावरण बच जाए
वायु तो शुद्ध हो जाएगी
धरा पे हरियाली आएगी
खाने को होंगे मीठे फल
बादल बरसाएगा स्वच्छ जल
होंगे नहीं भयानक रोग
खुश रहेंगे सारे लोग
.....................................
आओ हम सब वृक्ष लगाएँ
अपना पर्यावरण बचाएँ
ऐसे दे हम सब सहयोग
मिटाएँ प्रदूषण का रोग

स्वप्नदृष्टा- सीमा सचदेव


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10 पाठकों का कहना है :

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बहुत बढिया सीमा जी.. पर्यावरण को बचाने की जरूरत आज पहली वरीयता होनी चाहिये.. बहुत ही सार्थक रचना..
मैने भी भी देखा था एक सपना...
याद है ना आपको ...
देखो यहाँ रिकॉर्ड है..

आओ प्रदूषण रोके हम..
http://baaludyan.hindyugm.com/2007/11/blog-post_29.html

शोभा का कहना है कि -

सीमा जी
सर्वप्रथम यूनिपाठिका बनने की हार्दिक बधाई। अपनी इस कविता में आपने सचमुच एक भयानक सत्य से परिचित करा दिया। बहुत ही सही चित्र खींचा है और साथ में समाधान भी दिया है। बहुत सुन्दर। सस्नेह

pooja anil का कहना है कि -

सीमा जी ,

बच्चों के साथ साथ आप हम बडों को भी बहुत अच्छी शिक्षा दे रही हैं . धन्यवाद .
यह सपना सचमुच डरावना है , क्योंकि वैज्ञानिकों का कहना है कि बहुत ही जल्द नॉर्थ पोल से बर्फ गुम हो जायेगी , अगर ऐसा होता है तो विश्व में बहुत ज्यादा गरमी बढ जायेगी और सभी प्राणियों और वनस्पतियों का जीवन मुश्किल हो जायेगा , ऐसे में पेड़ लगाना नितांत आवश्यक हो जाता है , जो ना सिर्फ़ पर्यावरण में शुद्ध वायु का संचार करते हैं बल्कि मानव के अभिन्न मित्र भी हैं . उम्मीद है हिंद युग्म पढ़ने वाले सभी पाठक कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगायेंगे .

^^पूजा अनिल

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

सीमा जी,

हम जागकर भी यह सपना देख रहे हैं, लेकिन लोग फिर भी सतर्क नहीं हुए हैं। पर्यावरण के प्रति जागरुकता बच्चों में संस्कार के रूप में डालना होगा। और यह प्रयास आप बहुत अच्छे तरह से कर रही हैं।

रंजू ranju का कहना है कि -

एक अच्छी कविता न केवल बच्चो के लिए बडो के लिए भी ..बधाई आपको सीमा जी..

Kavi Kulwant का कहना है कि -

सीमा के विचार असीमित हैं...

Kavi Kulwant का कहना है कि -

यूनिपाठिका के लिए हार्दिक बधाई..

sahil का कहना है कि -

aसीमा जी,बहुत ही शानदार रचना.बधाई
आलोक सिंह "साहिल"

sangeeta sethi का कहना है कि -

सीमा जी
आपका सपना बेहद भयानक है | यदि हम समय से नहीं चेते तो कहीं यह साकार न हो जाये ......ना..ना...ऐसा मैं दूर तक नहीं सोचती आओ हम सब मिलकर पर्यावरण स्वच्छ बनाएं | अच्छी कविता के लिए बधाई |

Manju Gupta का कहना है कि -

पर्यावरण ka समाधान भी aapne antim panktiyo mei diya. Sandesh sare pathako ko mil jaayaga.पर्यावरण bchane ki phal her koie karega.
यूनिपाठिका बनने aur sartk rachana ke liyea badhaie.


Manju Gupta.

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