Monday, February 8, 2010

मेरा परिवार



खुशियों का संसार है
जीवन का आधार है।
सुख ही नहीं दुख भी बाँटे
ऐसा मेरा परिवार है।।

माँ-बाबूजी कदम-कदम पर
सही गलत समझाते हैं।
भटकें ना जीवन की राहों में
ऐसे संस्कार सिखलाते हैं।।
रिश्तों का पारावार है
ऐसा मेरा परिवार है।।

निश्चल अमिट प्यार की नदियाँ
घर आँगन में बहती हैं।
एक-दूजे पर जो मिट जायें
यहाँ ऐसी बहनें रहती हैं।।
भैय्या का भी दुलार है
ऐसा मेरा परिवार है।।

--दीपाली पंत तिवारी


Friday, February 5, 2010

कसौटी

कसौटी

एक दिन चाणक्य का एक परिचित उनके पास आया और उत्साह से कहने लगा ,"आप जानते हैं ,अभी अभी मैंने आपके मित्र के बारे में क्या सुना ?"
चाणक्य अपनी तर्क -शक्ति ,ज्ञान और व्यवहार -कुशलता के लिए विख्यात थे .उन्होंने अपने परिचित से कहा ,"आपकी बात मै सुनूँ ,इसके पहले मै चाहूँगा कि आप त्रिगुण परीक्षण से गुजरें
" यह त्रिगुण परीक्षण क्या है ?"
चाणक्य ने समझाया ,"आप मुझे मेरे मित्र के बारे में बताएं इसके पहले अच्छा यह होगा कि जो कहें ,उसे थोडा परख लें ,थोडा छान लें .इसीलिए मै इस प्रक्रिया को त्रिगुण परीक्षण कहता हूँ .इसकी पहली कसौटी है सत्य .क्या यह पक्का है कि जो आप कहने वाले हैं वो सत्य है ? "
"नहीं वह आदमी बोला ,वास्तव में मैंने इसे कहीं सुना था ।"
"ठीक है ".चाणक्य ने विश्लेष्ण किया ."आपको पता नहीं है कि यह बात सत्य है या असत्य .अब हम दूसरा परीक्षण करते हैं । दूसरी कसौटी है अच्छाई .क्या आप मुझे मेरे मित्र की कोई अच्छाई बताने वाले हैं ?"
" नहीं "बल्कि इसके उलट ........."
"तो "चाणक्य ने आगे कहा ,जो आप कहने वाले हैं वो न तो सत्य है ,न ही अच्छा .चलिए तीसरा परीक्षण कर ही डालते हैं ।"
"तीसरी कसौटी है -उपयोगिता .जो आप कहने वाले हैं ,वह क्या मेरे लिए उपयोगी है ?"
"नहींऐसा तो नहीं है
अब चाणक्य ने आखिरी बात कह दी ।
"आप मुझे जो बताने वाले हैं ,वह न सत्य ,न अच्छा और न उपयोगी है ,फिर मुझे बताना क्यों चाहते हैं ?"
शिक्षा -किसी भी सम्प्रेषण को सच ,अच्छाई और उपयोगी -इन्ही तीनों कसौटियों पर ही जांचना -परखना चाहिए

( सम्प्रेषण- बातचीत )
संकलन
नीलम मिश्रा


Wednesday, February 3, 2010

हितोपदेश 19 - मूर्ख गधा

इक धोबी के पास गधा
करता रहता काम सदा
कपड़े सारे उसके उठाता
और नदी पर छोड़ के जाता
लेता धोबी बहुत सा काम
गधे को न मिलता आराम
न मिलता खाना भर पेट
भूखे पेट ही जाता लेट
हो गया गधा बहुत कमजोर
नहीं रहा था उसमें जोर
पहुँच गया वह मरण किनारे
और अब धोबी मन में विचारे
जो इसका नहीं पेट भरेगा
तो यह भूखा ही मरेगा
आया उसको एक ख्याल
ओढ़ा दी उसे बाघ की खाल
छोड़ दिया उसको आज़ाद
खेतों में फसलों के पास
मिलता उसको पेट भर खाना
मिला हो जैसे कोई खजाना
सारा दिन वह फसलें चरता
भरता पेट और मस्ती करता
कुछ ही दिन में आ गया जोश
सँभल गए गधे के होश
इक दिन खेत का मालिक आया
देख के गधे को वो भरमाया
समझ लिया गधे को बाघ
दूर से देख गया वो भाग
दूजे दिन मालिक फिर आया
साथ मे धनुष-वाण भी लाया
पहने उसने कपड़े काले
ताकि बाघ को भ्रम में डाले
गधा समझ कर बाघ आ जाए
और वो उसको मार गिराए
बैठा छुप कर वृक्ष की डाली
समझा गधे ने है गधी काली
खुश हो देख के भाग के आया
टै-टै करके वो चिल्लाया
जैसे ही गधे की सुनी आवाज़
समझ गया मालिक सब राज
ओढ़ी गधे ने बाघ की खाल
चली किसी ने मुझ संग चाल
आसानी से उसको मारा
मर गया था अब गधा बेचारा


Tuesday, February 2, 2010

२६ जनवरी पर प्रस्तुत मनमोहक चित्र





Saturday, January 30, 2010

राष्ट्रीय प्रतीक

प्यारे बच्चो कल मैने आपको भारत के कुछ राष्ट्रीय चिन्हों की जानकारी दी थी । आज देखिए कुछ और राष्ट्रीय प्रतीक

८.राष्ट्रीय गीत

वन्दे मातरम मां का वंदन
गाए हर इक भारतीय जन
बंकिम चन्द्र चैटर्जी का गान
राष्ट्रीय गीत हिन्द का महान

९. राष्ट्रीय-वाक्य
'सत्यमेव जयते' वाक्य
कहता सत्य की सदा विजय
सत्य पथ पर बढते जाओ
जीवन में सदा सुख पाओ
१०. राष्ट्रीय नारा
'श्रमेव जयते' नारा
श्रम करना ही कर्म हमारा
श्रम से जीतें सकल जहान
जय जवान और जय किसान
११. राष्ट्रीय भाषा
राष्ट्रीय भाषा अपनी हिन्दी
भारत मां के भाल की बिन्दी
पूरे देश में बोली जाती
तभी तो सबकी मां कहलाती
१२.राष्ट्रीय पर्व
पंद्रह अगस्त बच्चो जब आए
हम आजादी दिवस मनाएं
आए जब जनवरी छब्बीस
होता तब गणतंत्र दिवस

१३. राष्ट्रीय खेळ


हाकी अपना राष्ट्रीय खेल
बढाए इक दूजे से मेल
हर बच्चे से इसका नाता
गली-गली में खेला जाता
१४.राष्ट्रीय फ़ल


राष्ट्रीय फ़ल का सुनलो नाम
बच्चो फ़लों का राजा आम
मीठा-मीठा आम रसीला
दिखने में है पीला-पीला
१५. राष्ट्रीय नदी


राष्ट्रीय नदी है गंगा पावन
निर्मल करती सबका मन
शीतल बच्चो इसका जल
धो देती तन-मन का मल
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