Monday, December 8, 2008

वर्णमाला- व्यंजन भाग ३

वर्णमाला- व्यंजन भाग ३
प्यारे बच्चो पूरी उम्मीद है कि आपको पहले तीन पाठ स्वर ,क-वर्ग और च-वर्ग अच्छे से याद हो गए होंगे अब सीखते है आगे के दो पाठ यानी ट-वर्ग और त-वर्ग

पाठ.4


ट टमाटर
से ठेला
चलो देखने चलेंगे मेला


डमरू और से ढोल
बोलो बच्चो मीठे बोल

ण् खाली पर पूरा अक्षर ( जैसे:- कण )
बच्चो इसको कहते ट-वर्ग

पाठ .5

त तरबूज और से थाली
तोता बैठा पेड़ की डाली


द दही और से धान
बच्चो इनको लो पहचान


से नल का पानी हर घर
बच्चो इसको कहते त-वर्ग
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6 पाठकों का कहना है :

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

इसमें भी अनुनासिक व्यंजन के परिभाषाओं में कमी दृष्टिगोचर हो रही है।

सीमा सचदेव का कहना है कि -

नमस्कार शैलेश जी ,
आपने सही कहा
की अनुनासिक व्यंजन में गेयता की
कमी है और वो मुझे भी खल रही है
मे प्रयास करुँगी इस कमी ओ दूर करने का

rachana का कहना है कि -

सीमा जी
आप के इस अक्षर ज्ञान को कई बार से पढ़ रही हूँ जानती है यहाँ डेलस में कुछ स्कूलों में हिन्दी पढ़ाई जाती है उस की किताब के लिए मुझसे लिखने को कहा गया था मैने लिखा भी गिनती और वर्ण माला के लिए भी पर अंतर इतना है की यहाँ के बच्चे हैं तो उनको अंग्रेजी (आंग्ल भाषा )के शब्दों के साथ समझाना होता है . इसी लिए आप जैसी बात नही बनती
सादर
रचना

सीमा सचदेव का कहना है कि -

रचना जी कितनी अच्छी बात है न कि विदेश मे भी हिन्दी भाषा पढाई जाती है ,
मै यहाँ दक्षिण भारत मे हूँ और यहाँ भी हमे हिन्दी इन्ग्लिश के माध्यम से ही पढानी पडती है |
कभी कभी दुख होता है कि हम अपने ही देश मे अपनी ही भाषा को विदेशी भाषा के माध्यम से
पढा रहे है लेकिन संतुष्टि भी होती है कि चलो इसी बहाने ही सही हिन्दी सीख तो रहे हैं |
धन्यवाद

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

माध्यम कोई भी रहे, लें हम हिन्दी सीख.
लय उच्चारण में कमी, तनिक न पाए दीख.

श्याम सखा 'श्याम' का कहना है कि -

देर से आने इन सुन्दर बालगीतों से इतने दिन वंचित रहने का दुख है मुझे
पुन: बधाई

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