Wednesday, December 17, 2008

जीव बचाओ अभियान

नमस्कार बच्चो ,
कैसे हैं आप सब लोग ? पिछली बार मैने आपसे पूछा कि आपको सरकस मे जाकर कैसा लगा और क्यों ?
वैसे मै अपने मन की बात बताऊँ ,मुझे सरकस देख कर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा मनोरंजन
के लिए बेजुबान जानवरों को बंधक बनाया जाता है हमें केवल यह खेल तमाशा दिखता है जिसे देख कर
हम हँसते है ,खुश होते है लेकिन उसके लिए जानवरों पर कितना जुल्म होता है वो हम नहीं देख पाते
आज़ादी सबको प्रिय है हम भी हर वर्ष आज़ादी दिवस कितनी धूमधाम से मनाते हैं और पता है यह आज़ादी
हासिल करने के लिए न जाने कितने ही देश-भक्त वीरों ने अपनी कुर्बानी दी है जब हम आज़ाद रहना चाहते है
तो उन जानवरों को गुलाम क्यों बनाया जाता है जो इस धरा का उपहार हैं क्या अपने मनोरंजन के लिए जानवरों
पर जुल्म उचित है ? नही...! आपका भी यही उत्तर होगा न तो चलो हमारे साथ

"जीव बचाओ अभियान" मे

जीव बचाओ अभियान

आओ इक अभियान चलाएँ
बेजुबान जीवों को बचाएँ
मनोरंजन के हेतु केवल
क्यों दिखाएँ निर्दोषों पे बल
आज़ादी है सबको प्यारी
तरसे इसको दुनिया सारी
जो हैं धरती पर उपहार
करो उन जीवों से प्यार
आज़ादी उनकी न छीने
चैन से उनको भी दें जीने
ईश्वर की वो भी संतान
केवल न उनको पशु जान
वो भी धरती पर उपहार
जीने का उनको भी अधिकार
हम उनके अधिकार बचाएँ
आओ इक अभियान चलाएँ

आप भी आएँगे न मेरे साथ इस "जीव बचाओ अभियान" में


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3 पाठकों का कहना है :

sahil का कहना है कि -

जीव बचाओ अभियान
बहुत ही स्वस्थ और सकारात्मक पहल की है आपने सीमा जी.आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं,उनमें अगर यह भावना आ गई तो हमारा कल अपेक्षाकृत बेहतर होगा.बेहतरीन प्रस्तुति.
आलोक सिंह "साहिल"

rachana का कहना है कि -

सीमा जी क्या बात है आप ने कितनी अच्छी तरह से इतनी महत्त्व पूर्ण बात को कहा है .आज बच्चों को ही नही बड़ों को भी ये समझना चाहिए
सादर
रचना

neelam का कहना है कि -

seema ji apne achchaa fasaya hum kuch
yahi likhne waale the ,magar ...........koi bat nahi aapne humaare dil ki baat kah hi di ,shuktiya ada karte hain aapko

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