Tuesday, April 15, 2008

दीदी की पाती सुनो कहानी

यह सब्जी तो बहुत अच्छी नही है मैं खाना नही खाऊँगी ...अलका ने अपनी खाने की प्लेट सरकाते हुए माँ से कहा

"ठीक है मत खाओ "मैं शाम को इसको दूसरे तरीके से बनाऊँगी माँ ने मुस्कराते हुए कहा

दोपहर को दोनों माँ बेटी अपने बगीचे में गई ..माँ ने आलू खोद खोद कर जमीन से निकालने शुरू किए ..अलका उसको टोकरी में रखती गई यही सब करते करते शाम हो गई शाम को दोनों घर वापस आए.. अलका दिन भर अपनी माँ के साथ आलू रखने के काम में मदद करती रही थी सो वह बहुत थक गई थी उसको भूख भी बहुत जोर से लगी थी .माँ ने जैसे ही खाना दिया वह खाने पर टूट पड़ी और माँ से कहा कि सब्जी बहुत अच्छी बनी है

सुन के माँ हंस पड़ी और बोली की सब्जी तो वही सुबह वाली है पर तुम्हे इस लिए अच्छी लग रही है क्यूंकि अब तुम ने बहुत मेहनत की हुई है और तुम बहुत थकी हुई हो जब मेहनत करने के बाद खाना खाया जाता है तो वह बहुत अच्छा लगता है सब्जी तो सब अच्छी होती है सही कहा गया है कि हर चीज की कीमत सही वक्त पर होती है !!


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7 पाठकों का कहना है :

seema sachdeva का कहना है कि -

choti si pyaari si kahaani ke maadhayam se aapne bahut achchi shiksha di ,MEHNAT KA FAL MEETHA HOTA HAI , is baar aapki paati me kuch nayaa nahi dikha,jaisa aksar hota hai.....seema

Kavi Kulwant का कहना है कि -

दीदी की पाती अच्छी लगती है.. जन्म दिन की ढ़ेरों बधाइयां...

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

ओये बाल-श्रम

बच्चों से बिनवाये आलू
देखो मम्मा कितनी...


ह्म्म्म बढिया कहानी जी बहुत बढिया..

sahil का कहना है कि -

बहुत ही प्यारी सी कहानी और उतना ही अच्छा संदेश,बहुत अच्छे
बधाई
आलोक सिंह "साहिल"

अतुल का कहना है कि -

रोचक और सीख देती कहानी. बधाई.

POOJA ANIL का कहना है कि -

दीदी की पाती से बहुत अच्छी सीख मिली , कम शब्दों में बहुत बड़ी बात लिख दी है आपने , जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई

^^पूजा अनिल

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

अच्छी सीख

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