Tuesday, April 22, 2008

मैं ढूँढूं तुमको रघुराई


दादी ने कथा सुनाई
रामायण की बात बताई
राम राज में सब सुख पावे
दुख दारिद्र का नाम न आये
आज सब उलट हो रहा भाई
मैं ढूँढूं तुमको रघुराई

प्रभु आ जाओ एक बार धरा पे
कुछ चमत्कार दिखलाओ
भटकी जगती को राह दिखाओ
फिर से मर्यादा का स्त्रोत बहाओ
हर ओर पाप की भरमाई
मैं ढूँढूं तुमको रघुराई

हाहाकार मचा दुनिया में
भाई भाई को मार रहा
धन दौलत के लालच में
इंसान खून को बहा रहा
नहीं देती राह सुझाई
मैं ढूँढूं तुमको रघुराई

हैलो हाय गुड़ मौर्निंग ने
निज संस्कृति पर डाका डाला
परदेसी खान पान पहनावे ने
चलन देश का बदल डाला
हाय डैड, मौम देते आज सुनाई
मैं ढूँढूं तुमको रघुराई

छाया चहुँ ओर अंधेरा है
बढ़ता दुराचार का घेरा है
कहने को तो प्रगति है
पर नहीं शांति दिखती है
थक तुझसे आस लगाई
मैं ढूँढूं तुमको रघुराई

क्या दिन ऐसा भी आयेगा
जब राम राज आ जाऐगा
क्योँ रूठे दशरथ नँदन हो
हम बच्चों की क्या गलती है
क्यों आने में देर लगाई
मैं ढूँढूं तुमको रघुराई

- सुषमा गर्ग

22.4.08


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3 पाठकों का कहना है :

seema sachdeva का कहना है कि -

Namskaar Shushma ji,

Aaj pahali baar aapki kavita padhi lekin sach kahoo to majaa nahi aayaa, aapne shuruyaat achchi ki ,daadi ki katha se lekin kahaani kahee dikhaaee nahi di ,aur fir aapne poori ki poori samsyaayon ko udel diya , jo bachcho ko romaanchit aur shikshit karane ki bajaaye chinta aur duvidhaa me daal sakti hai...mai isase jyaada nahi kahoongi bas itana hi ki shuru me daadi/naani kah dena aur ant me bachche shabd ka pryog karne se koi kavita bachcho ke liye nahi ho jaati.Kshama chaahungi aisi tippani ke liye aur umeed bhi karoongi ki aap isako saarthak lengi.....seema sachdev

रचना सागर का कहना है कि -

सुष्मा जी,

बहुत ही सुंदर कविता है काश आपका यह सपना सच हो जाये...

रंजू का कहना है कि -

क्या दिन ऐसा भी आयेगा
जब राम राज आ जाऐगा
क्योँ रूठे दशरथ नँदन हो
हम बच्चों की क्या गलती है
क्यों आने में देर लगाई
मैं ढूँढूं तुमको रघुराई

बहुत सुंदर लिखा है आपने ..अच्छी लगी आपकी रचना !!

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