Thursday, April 17, 2008

आओ सीखें अपनी भाषा...

प्यारे बच्चो कैसे हो ?
अब तो स्कूल खुल गये हैं ना, तो खूब जमकर पढ़ाई हो रही है ना...वेरी गुड

चलिये दोस्ती करते है हिन्दी वर्ण-माला के फूलों से, कहने का मतलव हिन्दी के प्यारे प्यारे अक्षरों से..



'क' से कबूतर गुटर-गुटर गूँ
सबसे पहले मैं जागा हूँ
जागो भैया, जागो बहना
स्कूल भी तो जाना है ना



'ख' से खरगोश कितना भोला
देखो लगता ऊन का गोला
नर्म मुलायम इसके बाल
भरे कबड्डी करे कमाल



'ग' से गमला फूलो वाला
सुबह-सुबह जब पानी डाला
फूलो पर छा गयी मुस्कान
इनमें भी होती है जान



'घ' से घड़ी कहती है टिक-टिक
बड़े बनो सब पढ़-पढ़ लिख-लिख
करो समय से सारा काम
मेरी तरह चलो अविराम

'ङ' खाली पर थोड़ा रुककर
सोचो आगे कौन से अक्षर

- तो कैसी रही इतने प्यारे प्यारे अक्षरों से दोस्ती....
और भी बहुत सारे अक्षर हैं
फिर मिलेंगे कुछ अक्षरों से अगली बार
तब तक के लिये सबको ढेर सारा प्यार

-राघव


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6 पाठकों का कहना है :

seema sachdeva का कहना है कि -

aapke foolo ke guldaste me se baaki foolo ki khushaboo soonghane ke liye betaab hai ,jaldi vaapis aayega:)...seema

रंजू का कहना है कि -

बहुत बहुत सुंदर राघव जी .बच्चो को क्या बड़े भूले हुए को भी यह पाठ आसानी से याद हो जायेगा .अगली कक्षा का इंतज़ार है
:)

Kavi Kulwant का कहना है कि -

अति सुंदर.. हार्दिक बधाई...

Parul का कहना है कि -

bahut sundar prayaas..jaari rakhen

अल्पना वर्मा का कहना है कि -

प्यारे प्यारे अक्षरों से दोस्ती.... अति सुंदर

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

राघव जी बहुत बढ़िया। इसे ज़ारी रखिए। यह सबसे बढ़िया एक्सीपेरीमेंट साबित होगा।

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