Wednesday, April 16, 2008

भोला बचपन.. आओ खेलें खेल






- सीमा कुमार


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5 पाठकों का कहना है :

seema sachdeva का कहना है कि -

Seema ji ,
aisi pyaari si gudiya ke liye ek pyaari si kavita..

नन्ही कली




मेरी छोटी सी बगिया की नन्ही कली

जिसकी खुश्बू से महकेगी हर एक गली

मेरा प्यारा सा उपवन भी खिल जाएगा

जब कली को नया रूप मिल जाएगा

जब बिखेरेगी अपनी वो सुंदरता

हर तरफ झलकेगी ऐसी कोमलता

तब बहारों को मिल जाएगी रागिनी

मेरी नन्ही कली को पा अपनी संगिनी

मेरे आँगन में खुशबू फैलाएगी वो

फूल बन के सदा महाकाएगी वो

जब नन्ही कली फूल बन जाएगी

अपनी खुशबू से विषव को भी महकाएगी

उसकी खुशबू का होगा पूरा विश्व दीवाना

सभी अपने नहीँ कोई होगा बेगाना

मेरी नन्ही कली को आ जाने तो दो

गीत भौरों को प्यार भरे गाने तो दो

उसके हँसने से ही तो हँसेंगे सभी
दर्द दिल को सताएगा न फिर कभी

bahut hi pyaari gudiya hai SHUBHAASHISH.....seema sachdev

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

सुन्दर तस्वीरें हैं। बधाई।

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

इस नन्हीं नटखट से तो हम परिचित हैं, टॅचवुड..

सीमा कुमार जी की तस्वीरों पर
सीमा सचदेवा जी जी खूबसूरत कविता

सोने पर सुहागा..

बहुत बहुत बधाई..

रंजू का कहना है कि -

वाह सीमा जी की तस्वीरों पर सीमा सव्देव जी की कविता डबल बोनस बहुत सुंदर :)

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

बच्चों की तस्वीरे खींचने में आपका कोई सानी नहीं है।

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