Tuesday, September 2, 2008

एक छोटी बच्ची के शिक्षक पर विचार

अभी पिछले सप्ताह हमने एक छोटी बच्ची पाखी मिश्रा की एक कविता प्रकाशित की थी, आज उसी बच्ची ने शिक्षक दिवस के ऊपर एक लघु-निबंध लिख भेजा है। हम बिना संपादन के प्रकाशिक कर रहे हैं।



शिक्षक


शिक्षक वह व्यक्ति है ,जो एक बगीचे को भिन्न-भिन्न रूप रंग के फूलों से सजाता है, जो हमे कांटों पर भी मुस्कुरा कर चलने को प्रोत्साहित करता है, हमे जीने की एक वजह समझाता है। हर दुःख दर्द में हमारे घाव को भर देता है, मेरा आप सब से सिर्फ़ यही कहना है कि -शिक्षक भगवान् से भी बड़ा है, हाँ शिक्षक को भगवान् ने ही बनाया है, लेकिन शिक्षक ने लाखों छोटे-छोटे अनमोल जीवन को सही मार्ग दिखाया है, ताकि वह अपने लक्ष्य का उद्‌घाटन कर सके।
पाखी मिश्रा


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10 पाठकों का कहना है :

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

पाखी बेटा,
आपने बहुत अच्छी बात बतायी है,
धन्यवाद!

pankaj का कहना है कि -

पाखी आपने बहुत कम शब्दों में शिक्षक की महिमा को बहुत अच्छी तरह समझाया है. मुझे तो आप ही छोटी सी उम्र की एक बहुत समझदार शिक्षिका प्रतीत हो रही हैं.

D P Singh का कहना है कि -

Dear Pakhi

I am surprised that you have such an excellent thoughts in your mind and seems that you have grown up by mind and I can see your bright future like platinum, diamond. May God help you to touch your goal and be the Gem of nation

D.P.SINGH

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

Subh vichar.

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

अर्रे भाई आप पाखी हैं या पारखी..

हमको तो पाखी कम पारखी ज्यादा लग रहीं हो
इतनी अच्छी परख इतनी छोटी उम्र में

बहुत बहुत शुभकामनायें, तरक्की मिले,ऊँचाईयों पर पहुँचें..

maitrayee का कहना है कि -

प्यारी पाखी यानी चिरिया {बांगला भाषा मे },
बिल्कुल चिरिया की तरह ही तुमने साड़ी भावनाएं लिख डाली.तुमने शिक्षक को सही पहचाना,मेरी ढेर साड़ी शुभकामनाएं और आशीर्वाद तुम्हारे लिए हैं,जीती रहो जीवन मे सफल हो ...
एक अध्यापिका.

deepak का कहना है कि -

प्यारी पाख़ीअपने विचारो को आपने बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त किया है. शिक्षक के लिए इतना सम्मान आज के युग मे दुर्लभ है.एक और सुझाव है. लक्ष्य के लिए भेदन शब्द का प्रयोग होता है. उदघाटन का नहीं.

shanno का कहना है कि -

बेटा पाखी, आपने इस छोटे से लेख में ही शिक्षक के सारे गुणों को ''गागर में सागर'' की तरह भर दिया है. उम्र छोटी हुई तो क्या हुआ, सोचने की शक्ति तो बड़ी है. Well done!

बहुत बधाई!

Shamikh Faraz का कहना है कि -

आपका निबंध पढ़कर मुझे कबीर जी का दोहा याद आ गया.

गुरु गोविन्द दोउ खाडे काके लागें पायें
बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दिए बताये.

Manju Gupta का कहना है कि -

प्रिय पाखी बहुत सुंदर विचार लिखे हैं .आप के लिए मुहावरा लिख रही हूं.पूत के पाँव पालने में दिख जाते हैं .निसंदेह बिटिया का भविष्य बहुत उज्ज्वल है .मेरा आर्शीवाद सदा साथ रहे ,बधाई

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