Tuesday, August 11, 2009

आजादी की कहानी , भारत माता की जुबानी

नमस्कार बच्चो ,
आजकल आप सब बहुत व्यस्त होंगे हमारे राष्ट्रीय त्योहार स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए । हर तरफ़ देश भक्ति का महौल दिख रहा है । बज़ार तिरंगे झण्डों से सजे दिख रहे हैं । हम सब बहुत खुश हैं क्योंकि १५ अगस्त को हम आज़ादी दिवस मनाने जा रहे हैं यह वो दिन है जिस दिन न जाने कितने वीरो की कुर्बानी के उपरान्त भारत अंग्रेजों की गुलामी से १५ अगस्त १९४७ को आज़ाद हुआ था और तब से लेकर आज तक हम इसे पूरे उत्साह से मनाते आ रहे हैं । इस आजादी के लिए भारतियों को लम्बा संघर्ष करना पडा था । आप भी सुनोगे आजादी की कहानी । तो आओ मेरे साथ और सुनो-

आजादी की कहानी , भारत माता की जुबानी

शुभाशीष बच्चो , मै तुम्हारी माता
मेरा तुम्हारा जन्म जन्म का नाता
मैं वही जिसने इस भू को सजाया
मैं वही जिसने आपको भारतीय बनाया
मैं वही जिसकी गोदि में राम कष्ण बुद्ध आए
रिषी मुनि तपस्वियों ने यग्य रचाए
मै वही जिसने पहना राजमाता का ताज
मं वहीजिसने गाया एकता का साज
मेरे आंचल की छाया में फ़ला-फ़ूला हिन्दुस्तान
जो बना विश्व में महान
मेरी पावन धरती पर गंगा यमुना का बसेरा
जहां सबसे पहले होता है सवेरा
मैने बस प्यार बरसाया , आंचल फ़ैलाया
गैरों को भी गोदि में बैठाया
मैने कभी कोई भेद-भाव न जाना
गैरों को भी अपना ही माना
विचरती रही मै बस ममता के ख्याल में
और फ़ंसती गई गुलामी के जाल में
जिन्हें अपने घर में बसाया
उन्हींने म्झे गुलाम बनाया
मैं रोती रही पुकारती रही
अपनी दासता पर विचारती रही
फ़िर आई मेरी बेटी लक्ष्मी मर्दानी
सुनी तो है आपने उसकी कहानी
जिसने दुश्मन को ललकारा
दे दिया मेरी आजादी का नारा (वन्दे मातरम )
बस फ़िर मेरे बच्चे आते गए
अपना खून बहाते गए
मेरी खातिर जान तली पर धरते रहे
झुके नहीं बस मरते रहे
मेरे ही सामने मिटते रहे मेरे लाल
फ़िर भी उनकेकितने उच्च थे ख्याल
मां को बंधक न रहने देंगे
भले ही हमारे सिर कटेंगे
फ़िर आया अहिंसा का पुजारी
सत्य पथ अपना पलट दी दुनिया सारी
ऐसा उसने चमत्कार कर दिखाया
मुझे गुलामी से आजाद कराया
मैनें फ़िर से गर्व से सिर उठाया
मेरे बच्चों ने मुझे यह ताज पहनाया
आज मैं सुरक्षित हूं
क्योंकि मेरे बच्चों द्वारा रक्षित हूं
मुझे गर्व है मैं हूं आपकी माता
अमरता तक रहेगा अपना नाता
मेरे बच्चो तुम्हीं मेरी जान हो , तुम्हीं मेरी जिंद
एक बार मिलकर बोलो जय हिन्द , जय हिन्द


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6 पाठकों का कहना है :

Manju Gupta का कहना है कि -

आजादी के ६३ वें महापर्व पर देश भक्ति और जोश से भरी आजादी का शब्द चित्र कविता में मार्मिकता से खिंचा है .'जय हिंद' .

एकलव्य का कहना है कि -

बहुत सुन्दर रचना .
'जय हिंद'

एकलव्य का कहना है कि -

'जय हिंद'

Disha का कहना है कि -

बहुत ही बढिया रचना है
जय भारत

sumit का कहना है कि -

अच्छी रचना है
१५ अगस्त आने वाला है पर आज कल पतंगे उड़ती बहुत कम दिख रही hai , पहले तो पतंगे he पतंगे दिखती थी इन दिनों

Shamikh Faraz का कहना है कि -

बहुत अच्छा लगा पढ़कर.

मुझे गर्व है मैं हूं आपकी माता
अमरता तक रहेगा अपना नाता
मेरे बच्चो तुम्हीं मेरी जान हो , तुम्हीं मेरी जिंद
एक बार मिलकर बोलो जय हिन्द , जय हिन्द

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