Tuesday, September 4, 2007

दीदी की पाती ....

दीदी की पाती....



बच्चो क्या आप पाती का मतलब जानते हैं? ....क्या?? नही जानते पाती का मतलब?

पाती का मतलब होता है ...चिट्ठी पत्र ....जिसमे सुख दुख के संदेश और बहुत सी बाते लिख के हम एक जगह से दूसरी जगह अपना संदेश पहुँचा देते हैं| पहले यह काम कबूतर किया करते थे उनके गले में एक धागा बाँध के संदेश लिख के उन्हे उड़ा दिया जाता था.. और वो इतने अपने काम में कुशल होते थे की वो संदेश सही उस व्यक्ति तक पहुँचा देते थे जिसके लिए वह होता था|



फिर घोडों का इस्तेमाल किया जाने लगा.. उस पर बैठा घुडसवार संदेश ले कर व्यक्ति तक संदेश दे आते थे



फिर बने पोस्ट ऑफिस..यहाँ कई तरह के पत्र मिलते हैं..जैसे..अंतर्देशिये,पत्र पोस्ट कार्ड, इन में टिकट हुई लगी रहती है...



और आपका दिल इन में लिखने का नही है तो एक काग़ज़ पर लिखो एक सादा छोटा सा लिफाफा लो और उस में टिकट लगा के जहाँ भेजना चाहते हो वहाँ का पता लिख के पोस्ट कर दो..या पोस्ट ऑफिस से ही यह लिफाफा ५ रूपये का मिलता है, और बाहर के देशो में पत्र भेजने के लिए अलग कीमत के पत्रों का इस्तेमाल किया जाता है!





अरे मैं यह तो बताना भूल गयी की कहाँ पोस्ट करो :)



आपने अपने घर के पास कही कोने में लाल रंग के डिब्बे देखे हैं| उनके उपर का हिस्सा काला होता है.. बस वही डाक डिब्बा है इस में लाल रंग का डिब्बा बाहर एक शहर के लिए और हरे रंग का डिब्बा आपके अपने शहर के लिये हर शहर के लिये एक पिन कोड नम्बर दे दिए गए हैं हर शहर के हिसाब से ताकि पत्र जल्दी से सही जगह पहुँच सके जैसे दिल्ली का पिन कोड ११०००० है| सब पत्रो की क़ीमत अलग अलग होती है|



पोस्ट कार्ड ५० पैसे का, इनलॅंड ...२.५० पैसे का और लिफाफे पर दूरी के और वज़न के हिसाब से टिकट लगा दी जाती है!फिर अब देर कहे की :) जल्दी से एक प्यारा सा पत्र अपनी इस दीदी को भी लिख दो की यह जानकारी कैसी लगी तुम्हे?

अपनी अगली पाती में और कुछ रोचक बाते ले के आऊंगी..तब तक आप सब अपनी पढ़ाई करे और अपनी सेहत का ध्यान रखे...और आज तो हमारे "लड्डू गोपाल" यानि कृष्ण जी का जन्मदिन भी है न आप सबको उनके जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई!!!

चलो आज एक पाती उन्हें भी लिखे की वह सदा हमारे साथ रहे :)



ढेर सारी शुभकामनाओं और बहुत प्यार के साथ

आपकी दीदी रंजना ...


[दीदी की पाती में मेरी कोशिश होगी बच्चों को कुछ नई जानकारी देने की या वो कुछ बातें जो पहले हमारे साथ थी अब अतीत का हिस्सा बनती जा रही हैं जैसे इस में यह पहला "पाती" यानी चिट्ठी के विषय में है अब ई-मेल के युग में सब इस को जैसे भूलते ही जा रहे हैं :)]


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14 पाठकों का कहना है :

उन्मुक्त का कहना है कि -

अच्छा स्तंभ है।

गौरव सोलंकी का कहना है कि -

बहुर अच्छा आरंभ है रंजना जी। इस खूबसूरत और शिक्षाप्रद प्रयास के लिए हार्दिक शुभ-कामनाएँ।

Divine India का कहना है कि -

हम भी बालक बनकर ही पढ़ते रहे…।

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

वाह रंजना जी,

यह वाकई बहुत अच्छा स्तंभ हो सकता है बाल उद्यान पर। जानकारे तो आपने अच्छी प्रदान की ही है साथ ही जो चित्र लगाये हैं वे लाजवाब हैं।

*** राजीव रंजन प्रसाद

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

रंजना जी,

आपने बाल-उद्यान पर यह स्तम्भ शुरू करके बहुत अच्छा किया। इसमें आपके सीखाने का तरीका बहुत प्रभावी है। पिछले साल तक मैं भी पत्र खूब लिखा था। एक बार के लिए मैं भी उनमें कहीं खो गया।

sunita (shanoo) का कहना है कि -

वाह मजा आ गया मै भी अपनी दीदी को पाती लिखूँगी...हाँ देख लेना...क्या छुनन छुनन पाली पाली दीदी है मेली पाती का जवाब जलूल जलूल छे देना....

वाकई हम भी बच्चे बन गये अच्छा लगा आपका यह प्रयास

सुनीता(शानू)

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' का कहना है कि -

रंजना जी
बाल-उद्यान पर आपकी पाती नन्हें मुन्ने प्यारे बच्चों का आने वाले दिनों में संभवतः बहु प्रतीक्षित स्तंभ बनेगा ऐसा प्रतीत होता है.
शाहजहांपुर में कुछ दिनों तक सरस्वती शिशु मंदिर में आचार्य के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था. उससे पूवॅ कालेज से आते जाते अपने प्यारे भैया बहनों को प्रायः देखा करता था. बाल-उद्यान पर आकर वही प्रसन्नता मिली.
सभी बच्चों को ठेर सारे प्यार सहित
आप सबका
श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'

tanha kavi का कहना है कि -

बहुत सुंदर पाती लिखी है रंजना जी आपने। एक शिक्षाप्रद स्तंभ शुरू करने के लिए बधाई।

Udan Tashtari का कहना है कि -

बहुत बढ़िया स्तंभ. आपको इस सुन्दर शिक्षाप्रद वार्ता के लिये बधाई और साधुवाद.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

चिट्ठी के महत्व को बताती अच्छी और रोचक जानकारी है। आशा है आगे भी आपके द्वारा नए नए विषयों पर जानकारी मिलती रहेगी।

रचना सागर का कहना है कि -

रंजना जी
सबसे पहले धन्यवाद आपके इस ज्ञानवधॅक जानकारी के लिये।
बच्चो के लिये यह बहुत अच्छी स्तभ: है।
बधाई।

अजय यादव का कहना है कि -

रजना जी!
विलंबित बधाई स्वीकार करें.

shobha का कहना है कि -

रंजना जी
बहुत अच्छी शुरूवात की है । मैं भी सोच रही थी कि बच्चों के लिए कुछ रोचक और
ग्यान वर्धक हो । आपने मेरे दिल की बात सुन ली । बधाई स्वीकार करें ।

गिरिराज जोशी का कहना है कि -

वाह!

मज़ा आ गया। निश्चय ही बच्चे अपनी दीदी से मिलकर खिल उठेंगे। आपने बहुत ही खूबसूरत स्तम्भ शूरू किया है, इसे जारी रखिये।

और हाँ, आपके इस खूबसूरत स्तम्भ को बच्चे निश्चय ही बेहत पसंद करेंगे एवं एक दिन दीदी के नाम बच्चों की ढ़ेर सारी पात्तियाँ भी आयेंगी।

बहुत-बहुत बधाई!!!

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