Tuesday, March 31, 2009

गौतम बुद्ध

गौतम बुद्ध
"सब जग जलता देखिया "
गौतमी नाम की एक स्त्री का इकलौता बेटा मर गया था वह शोक से व्याकुल होकर रोती हुई महात्मा बुद्ध के पास पहुंची और उनके चरणों में गिरकर बोली -हे भगवान् ! किसी तरह मेरे बेटे को जिला दो -कोई ऐसा मंत्र पढ़ दो कि मेरा लाल उठ बैठे
महात्मा बुद्ध ने उसके साथ सहानुभूति दिखाते हुए कहा -गौतमी !शोक न करो ,हम तुम्हारे मृत बालक को फिर जीवित कर देंगे ,लेकिन इसके लिए तुम किसी ऐसे से सरसों के कुछ दाने मांग लाओ जहाँ कभी किसी प्राणी कि म्रत्यु न हुई हो
गौतमी को इससे कुछ शान्ति मिली वह दौड़ती हुई गाँव में पहुँची और ऐसा घर ढूँढने लगी जहाँ किसी की मृत्यु न हुई हो बहुत ढूढने पर भी उसे ऐसा एक घर भी नही मिला वह हताश होकर लौट आई और महात्मा बुद्ध से बोली -देव ,ऐसा तो एक भी घर नही ,जहाँ कोई न कोई मरा न हो
तब बुद्ध बोले -गौतमी ! अब तुम यह मानकर संतोष करो कि केवल तुम्हारे ही ऊपर ऐसी ही विपत्ति नही पड़ी है ; सारे संसार में ऐसा ही होता है और लोग ऐसे दुःख को धैर्यपूर्वक सहते हैं
गौतमी को विश्वास हो गया कि अकेली वही नही ,सारी दुनिया ही दुखी है , - 'सब जग जलता देखिया
अपनी -अपनी आग ' इससे उसकी व्यथा बहुत कुछ शांत हो गई और वह चुपचाप अपने बच्चे को उठाकर चली
गई







Monday, March 30, 2009

तपन और सुमित को बुद्धिमान बताया जाता है ,(सारे नियमो का अक्षरश; पालन करने पर )


तपन और सुमित को बुद्धिमान बताया जाता है ,(सारे नियमो का अक्षरश; पालन करने पर )
शोभा जी विशिष्ट अतिथि के तौर पर दर्शक दीर्घा से ही शन्नो जी और आचार्य जी की कुश्ती ,यानी दिमागी कुश्ती देखती रही ,और अगली बार इसमें भाग लेने का पूरा मन बना चुकी हैं
विनय जी ,dreamer ji ,चौहान जी अनुपस्थित हैं ,शन्नो जी नोट कर ले कृपया
उत्तर हैं
१)पायजामा
२)दाढी
३)मच्छर
४)कंघी
५)धोती

तो फिर शन्नो जी सबसे होनहार बालिका सिद्ध हुई हैं,

इसलिए उनकी उम्र मात्र ...........हो गयी है आप ऐसे ही मुस्तैदी से अपना काम करिए प्रोन्नति के अवसर तो सदैव रहेंगे ही आप के पास ,अब आप किस उम्र की हैं ,चाहें तो मनु जी को चुपके से उन्हें बता दीजिये ,वैसे हमारा मशवरा तो है की आप न ही बताएं तो बेहतर है ,वो हमारे बुजुर्ग कह ही गए हैं ,
बंद मुट्ठी लाख की खुल गयी तो ख़ाक की ,

किसी ने अपनी उम्र नहीं बतायी सिर्फ दो लोगों को छोड़कर ,तो प्रतियोगिता के नियम न मानने पर आप को ............................. एक मौका और दिया जाता है ,

अगली बार नियम न मानने पर आपसभी को सख्त सजा दी जायेगी

मनु जी को दो तीन रंग बिरंगी टोपियों का उपहार दिया जायेगा क्योंकि अब थोडा ध्यान से दिया गया कार्य करते हैं ,

राघव जी के क्या कहने दोस्तों ,वो एक ओझा के चक्क्कर लगा रहे हैं ,क्योंकि उनके हिसाब से जो नक़ल करेगा उसे चुडैल डराएगी ,कभी बचपन में की गयी नक़ल की सजा अब भुगत रहें हैं कोई तो उनकी मदद करो प्लीज़

नीति शिकायत करना अच्छी बात नहीं होती है ,कभी ध्यान मनु जी पर ,कभी शन्नो जी पर यही हाल रहा तो पिछड़ जाओगी मन लगाकर पढाई करो ,मेरा मतलब पहेलियाँ बूझो

आचार्य जी अब मनमौजी होते जारहें हैं ,(शन्नो जी की शिकायतों पर गौर जरूर करें)
अगले शनिवार तक के लिए खुदा हाफ़िज



Sunday, March 29, 2009

विश्व जल दिवस, कविता कहानी नारे

नमस्कार प्यारे बच्चो,
क्या आपको पता है कि हर वर्ष २२ मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है| इसको मनाने का उद्देश्य यही है कि हम पानी की संभाल करें, यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है| पानी हमारे जीवन की पहली प्राथमिकता है, इसके बिना तो जीवन संभव ही नहीं| क्या आपने कभी सोचा कि धरती पर पानी जिस तरह से लगातार गंदा हो रहा है और कम हो रहा है , अगर यही क्रम लगातार चलता रहा तो क्या हमारा जीवन सुरक्षित रहेगा| कितनी सारी आपदाओं का सामना करना पड़ेगा और सबकी जिन्दगी खतरे में पड़ जाएगी | इस लिए हम सबको अभी से इन सब बातों को ध्यान में रख कर पानी की संभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए | यह दिवस तो २२ मार्च को मनाया जाता है लेकिन मैं कुछ तकनीकी खराबियों कारण देरी से आई और वैसे भी पानी की आवश्यकता तो हमें हर पल होती है फिर केवल एक दिन ही क्यों, हमें तो हर समय जीवनदायी पानी की संभाल के लिए उपाय करते रहना चाहिए, यह दिन तो बस हमें हमारी जिम्मेदारी का अहसास कराने के लिए मनाए जाते हैं| पिछले साल मैंने 'पानी है अनमोल' नाम से इसी दिवस पर एक काव्यात्मक कहानी प्रकाशित की थी। पुराने पाठकों को तो याद ही होगा। नये पाठक बच्चे ज़रूर पढ़ें।

तो चलो हम सब संकल्प लें कि हर समय अपनी जिम्मेदारी को निभाएंगे | इस तरह हम बहुत सारे जीवों का जीवन बचाने में अपना सहयोग दे सकते हैं |
मै आपको एक कहानी सुनाती हूँ, कि पानी को गंदा करने से या गंदा पानी पीने से क्या नुक्सान होता है.....

अमृत का घोल

नदी किनारे था इक गाँव
घनी वहां वृक्षों की छाँव
मस्त-मस्त जब चले हवाएं
चारों ओर खुशबू फैलाएं
गाँव के बाहर बड़ा सा तल
भरा वहां वर्षा का जल
सब मिल उसकी करें संभाल
लगाया तल के ऊपर जाल
ताकि गंदा न हो तल
स्वच्छ रहे तालाब का जल
गर्मी की ऋतु जब भी आए
नदी में पानी कम हो जाए
तो फिर मिलकर सारे लोग
करें ताल का पानी प्रयोग
गर्मी के दिन यूँ बिताएं
इतने में वर्षा ऋतु आए
छा जाए फिर से हरियाली
भर जाए फिर से ताल खाली
पर इक था लड़का शैतान
जल मूल्य से था अनजान
इक दिन सूझी उसे शैतानी
क्यों न गंदा करे वो पानी
काटा उसने जाल को जाकर
फेंका कचरा जल में लाकर
खुले ताल पर पनपे मच्छर
बन गया बीमारी का घर
मरने लगे उसमें जल जन्तु
कोई भी यह न समझा परन्तु
क्योंकि तब जाड़े का मौसम
नदिया में पानी था हरदम
लड़के ने कर ली शैतानी
हो गया सारा गंदा पानी
कुछ दिन बाद वो शहर को आया
प्यास ने उसको खूब सताया
देखा एक गली में नल
पड़ा था पास खुला ही जल
वही जल पीकर प्यास बुझाई
पानी के साथ बीमारी आई
बुरा हो गया उसका हाल
पहुँच गया वो अस्पताल
मुश्किल से ही बची थी जान
आया फिर यह उसे ध्यान
गंदा किया है उसने ताल
पिएंगे जो बाकी वह जल
होंगे वो भी सब बीमार
होगा यह तो अत्याचार
उलटे पाँव ही गाँव को आया
आकर उसने सबको बुलाया
सबके सामने गलती मानी
की थी जो उसने नादानी
सबने उसकी सुनी कहानी
बाहर निकाला तल का पानी
फिर से उसमे भरा स्वच्छ जल
अब न गंदा करेगा तल
बच तो गई थी सबकी जान
पर बच्चो यह रहे ध्यान
न करना ऐसी नादानी
कभी न गंदा करना पानी
पानी तो अमृत का घोल
हर बूँद इसकी अनमोल
पानी से मिलती जिंदगानी
व्यर्थ गंवाओ कभी न पानी
*******************************

मैं कुछ नारे भी दे रही हूँ। इन्हें याद करके अपने दोस्तों को सुनाना

1.जल बचे तो जीव बचें
पर्यावरण भी स्वच्छ बने
२.जल ही जीवन का आधार
कभी न समझो इसे बेकार
३.जल से पलता है जीवन
जल तो है बहुमूल्य धन
४.जल से ही मिलती जिंदगानी
व्यर्थ करो न कभी भी पानी
५.स्वच्छ जल जो सब पिएंगे
तो लम्बी आयु जिएंगे
६.पानी की करो देखभाल
साफ टैंक कुँआ या ताल
७.पानी को न व्यर्थ गंवाओ
पानी बचा कर जीवन बचाओ
८.आओ मिल अभियान चलाएं
जीवन हेतु जल बचाएं
९.सदा ही ढँक कर रखो वारि
पनपेगी न कोई बीमारी
१०.जोड़ो जो वर्षा का जल
नम होगा भूमि का तल

सीमा सचदेव


Friday, March 27, 2009

8 से 80 साल तक के बच्चों के लिए मनोरंजक प्रस्तुति, जी हाँ आपकी पहेलियाँ

8 से 80 साल तक के बच्चों के लिए मनोरंजक प्रस्तुति, जी हाँ आपकी पहेलियाँ तो देर किस बात की, इस बार उत्तर को उम्र के हिसाब से आँका जायेगा ,सबसे छोटा बालक एक पहेली भी सही बताएय्गा तो उसे बुद्धिमान बता दिया जायेगा, बशर्ते वो टोपी न पहनता हो,

१)मध्य हमारा उसका सिर है
बन्ध जाना उसकी तकदीर है

२)लगता मधुमक्खी का छत्ता,
पुनि उग आये ये अलबत्ता

३)एक बहादुर छोटी काया,
बोल -बोल दुःख देने आया

४)नारी और मर्द है ढेर,
सबके मिले एक ही बेर,
जिधर -जिधर वह जब जाती,
अक्सर काला जंगल पाती

५)लम्बा चौडा रूप निराला,
उजली देह किनारा काला,
जो धोबिन करती है काम,
उसका भी वही है नाम

उत्तर रविवार की शाम तक मिल जाने चाहिए, dreamer ji ख़ास तौर पर आपके लिए ,सपने आप खूब देखिये, पर अपने नाम भी तो बताईये उम्र तो बतानी ही है ,महिलाओं को विशेष छूट है, वो १० साल घटा भी सकती हैं, शन्नो जी निगरानी का काम तो आपको दिया ही गया है, ठीक ढंग से काम करने पर हम आपकी उम्र में से २० -२५ वर्ष भी कम कर सकतें है, और आप दिखेंगी फिर से और भी अधिक खूबसूरत.


गुडी पडवा, उगादि, नवरात्र, नव-सम्वत्


नमस्कार बच्चो,
क्या आप जानते है कि आज कौन सा दिन है, आज हम भारतियों का नया साल है जिस तरह अंग्रेजी साल की शुरूआत १ जनवरी से होती है उसी तरह भारतीय कैलेण्डर की शुरूआत देसी महीना चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पहले दिन से होती है, इसको नव-सम्वत् बोला जाता है पर अलग-अलग जगहों पर इसे अलग-अलग नाम दिए जाते हैं, जैसे दक्षिण भारत मे इसे युगादि/उगादि (युग+ आदि अर्थात युग का आरम्भ) के नाम से पुकारा जाता है। माना जाता है कि इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और इस दिन से समय चक्र चलना शुरु हुआ था और तब से लेकर आज तक चल ही रहा है, क्योंकि इस दिन नया युग आरम्भ हुआ था, इसीलिए इसे युगादि और कन्नड़ में उगादि कहा जाता है। इसको फसलों के पकने पर कटाई के प्रारम्भ होने के साथ भी जोड़ा जाता है। विंध्यांचल मे इस दिन से नवरात्रों की शुरुआत होती है जो नौ दिन तक चलते है। महाराष्ट्र में इसे गुडी पडवा कहा जाता है इस दिन हर मराठी परिवार एक डण्डे के ऊपर साड़ी लपेटकर ऊपर लोटा या गिलास और नीम के पत्तों से सजा कर अपने घर के आगे रखते है जिसे गुडी का नाम दिया जाता है और उसको भगवान सादृश्य मान कर उसकी पूजा की जाती है। तरह-तरह के पकवान बनाए जाते है और स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए नीम की पत्तियों का सेवन किया जाता है। सिन्धी समाज में इसे भगवान झुलेलाल के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। इस तरह इस दिन के साथ बहुत सारी मान्यताएं जुड़ी है। यह भारत के हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप मे बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
आप सबको भी नव-सम्वत्, गुडी पडवा, उगादि, नवरात्र की बहुत-बहुत बधाई एवम् ढेरों शुभकामनाएं....सीमा सचदेव


Thursday, March 26, 2009

प्यारा हिंदुस्तान

अपना प्यारा हिंदुस्तान
सब देशों में यही महान

सब करते हैं गौरवगान
इसकी संस्कृति का सम्मान

सच को सदा दिखाई राह
इस धरती पर जन्म की चाह

गूंजे सत्य अहिंसा बोल
यह धरती पावन अनमोल

इसकी धरती पर है मान
इस पर दे दें अपनी जान

इस धरती पर हो बलिदान
वीर हुए हैं कई महान

ऋषि मुनि संतों की है भूमि
जप तप मंत्रों की है भूमि

ईश प्राप्ति दिखलाया मार्ग
मानवता को मिला उत्सर्ग

भाषा जाति धर्म अनेक
भारत है सब मिलकर एक

जग में चाहें सबकी खैर
नही किसी से रखते बैर

करते हैं भारत से प्यार
जीवन इस पर कर दें वार

कवि कुलवंत सिंह


Wednesday, March 25, 2009

हितोपदेश-१६ - किसान और मुर्गी / लालच बुरी बला है

एक समय था एक किसान
मुर्गियों मे थी उसकी जान
बड़े प्यार से उनको रखता
थोड़े ही में गुजारा करता
इक दिन उसको मिला न काम
न ही थे खाने के दाम
भूख से वो हो गया बेहाल
आया उसको एक ख्याल
क्यों न मुर्गी मार के खाए
खाकर अपनी भूख मिटाए
पकड़ ली उसने मुर्गी प्यारी
काटने की उसे की तैयारी
दया करो मुझ पर हे मालिक
तुम तो हो हम सब के पालक
जो तुम हमको यूँ मारोगे
कितने दिन तक पेट भरोगे
मानो जो तुम मेरी बात
दूँगी एक ऐसी सौगात
जिससे भूखे नहीं मरोगे
हम सब का भी पेट भरोगे
अण्डा सोने का हर दिन
दूँगी नित्य न होना खिन्न
अण्डा सोने का हर रोज़
हो गई अब किसान की मौज
अच्छे-अच्छे खाने खाता
घर वालों को भी खिलाता
हलवा पूरी मेवा खीर
कुछ दिन में ही हुआ अमीर
पर इक दिन ललचाया मन
है मुर्गी के पेट मे धन
क्यों न वह अब उसको मारे
मिल जाएंगे अण्डे सारे
एक बार में सब पाऊँगा
बडा किसान मैं बन जाऊँगा
आया जब यह मन में विचार
दिया उसने मुर्गी को मार
पर न एक भी अण्डा पाया
लालच में आ सब गंवाया
------------------
------------------
जो न वो यूँ लालच करता
रोज एक अण्डा तो मिलता
बच्चो लालच बुरी बला
नही होता कुछ इससे भला

**********************
चित्रकार- मनु बेतख्लुस जी


Tuesday, March 24, 2009

आज का ज़माना

आज का ज़माना बहुत खतरनाक है!!!!!
छोटे-बच्चों को,
बड़े-बूढों को,
हर इंसान को,
मारा जाता है,
फिरौती की नजर है

आज का ज़माना बहुत खतरनाक है!!!!!

लूट-पाट, मारपीट,
छाई पूरे वातावरण में,
उसको उठा लो "आते हुक्म,
बड़े -बड़े आदमखोरों से,

आज का ज़माना बहुत खतरनाक है!!!!!

घर से निकलने में डरती हूँ,
कैसे विश्वास अनजानों पर कर लूं,
डर है कि कहीं वह, बंद कर लें अपने,
काले बोरे में मुझे,
जहां सिर्फ अँधेरा ही अँधेरा है,

आज का ज़माना बहुत खतरनाक है!!!!!

पूछती हूँ एक छोटा सा प्रश्न,
क्या कोई है जो,
खोने न देगा मेरे (बचपन के)जश्न को,
मुझ जैसे कई बच्चों को,
यही है कश्मकश अपने मनों में,
कि मुझे एक शांति से भरपूर,
जिन्दगी जीनी है,

आज का ज़माना बहुत खतरनाक है!!!!!

पाखी मिश्रा
कुछ दिनों पूर्व एक १२ साल के बच्चे ,"मनन महाजन "की निर्मम हत्या कर दी थी उसके एक पडोसी ने जिसकी उम्र थी २० साल , मनन महाजन ,पाखी का सहपाठी था ,पूरी क्लास के बच्चे जिस भावना से गुजर रहें हैं ,शायद उसकी एक झलक पाखी के इन शब्दों में आपको महसूस हो ,teacher आज भी उसका नाम पुकारती है ,हाजिरी लेते समय


Monday, March 23, 2009

अथ श्री पहेलियाँ स्य उत्तर: नम:

अथ श्री पहेलियाँ स्य उत्तर: नम:
सीमा जी हम सब आपसे बेहद नाराज हैं ,आप कितनी भी कोशिश कीजिये हम नहीं मानने वाले ,
आपके उत्तर कहाँ है ????????अंसडइया (eyes)छाला पड़ गया ,उत्तर का पंथ निहार
१)नींद
२) पुस्तक
३) कोट
४) कागज़
५)चीनी
आचार्य जी की (श श श )सहमति से राघव जी को मिस्टर इंडिया घोषित किया जाता है


नीति और सुमित दोनों को सबसे उदंड प्रतिभागी घोषित किया गया है (हमेशा ध्यान मनु जी के उत्तर पर रखने के कारण )

सबसे नटखट बालिका के तौर पर हम अजित गुप्ता जी को रखते हैं

सबसे अच्छा मॉनिटर हमारी पहेलियों की कक्षा का सर्वसम्मति से शन्नो जी को बनाया गया है

बड़े दुःख के साथ आज आप सभी को यह राज बताना ही पड़ रहा है कि मनु जी वाकई मंदबुद्धि हैं (सिर्फ हा हा हा ,ही ही ही हु हु हु )

विनय जी वाकई अच्छे इंसपेक्टर ऑफ़ बाल उद्यान घोषित किये गए हैं


चौहान जी और स्वपंदर्शी (dreamer ji )सबसे अच्छे व् ईमानदार प्रतिभागी हैं

आचार्य जी ने इसे स्वीकार कर लिया है ,और हमे प्रेषित करने की आज्ञा दे दी है

हमने न्याय कर दिया है ,फिर भी आपकी राय सिर आँखों पर
नीलम मिश्रा




Saturday, March 21, 2009

अथ श्री पहेलियाँ: नम:)

१)ना कोई चखे ,न कोई खाय,
फिर भी वो मीठी कहलाय

२)एक गुरु ऐसा कहलाय ,
पाठ न बोले ,आप पढाय

३) अंग्रेजी का शब्द हूँ मै ,
हिंदी में भी वही है नाम
जाडे में मै बदन चढ़ ,
गर्मी में पहने बहसी राम (राघव जी )

४)शीश कटे तो कपडा नापूं ,
पैर कटे तो ,कौआ कहलाऊँ ,
पेट कटे तो बटन लगाऊं
लिखने पढने के काम मै आऊँ


५)छड़ी में छिपी है मीठी चीज ,
उस बिन फीकी होली -तीज


आप सभी लोगों से अनुरोध है कि अपनी उम्र और बुधिमत्ता के हिसाब से पहेली के उत्तर दे जो सबसे पहले सबसे सरल उत्तर देने कि कोशिश करेगा उसे मूर्ख नहीं महामूर्ख घोषित किया जायेगा ,और सभी सही उत्तर देने वाले को ,आचार्य जी अपनी उपाधि से सुसोभित करेंगे तो फिर देर कैसी बोलिए (अथ श्री पहेलियाँ: नम:)

नीलम मिश्रा


Friday, March 20, 2009

घमण्डी बाला


घमण्डी बाला


एक कहानी आज सुनाऊँ
शीश महल का राज बताऊँ

शीश महल मे रहती बाला
पर बाला का दिल था काला

थी वो बाला बडी घमण्डी
गुस्से मे दिखती थी चण्डी

शीश महल के अन्दर रहती
और लोगो को गन्दा कहती

सारी दुनिया मै देखुँगी
पर ना किसी से बात करूँगी

यहाँ से देखुँगी आकाश
बन्द कमरे मे भी प्रकाश

मेरा घर है कितना सुन्दर
मै तो रहुँगी इसके अन्दर

फैन्कती ऊपर से वह पत्थर
लोगो के घायल होते सिर

मार के पत्थर वो हँस देती
खुद को अन्दर बन्द कर लेती

बडे दुखी थे लोग बेचारे
करते क्या सारे के सारे

पर बच्चो यह करो विश्वास
फलता नही घमण्ड दिन खास

इक दिन एक परिन्दा आया
कङ्कर उसने मुँह मे दबाया

शीश महल उसने जब देखा
देख के रह गया वो भौच्चका

हुई थी उसको बहुत हैरानी
खुली चोञ्च ,कर दी नादानी

गिरा वो कङ्कर शीश महल पर
जिससे टूटा बाला का घर

देखती रह गई उसको बाला
लग गया उसके मुँह पे ताला

..................................................................
..................................................................

बच्चो तुम भी सीखो इससे
बुरा करम न हो कोई जिससे

शीशे के होते जिनके घर
नही फैन्कते दूसरो पे पत्थर

************************************

यह कहानी आप नीलम मिश्रा की आवाज़ में सुन भी सकते हैं-


लंगडा सिपाही

जापान में एक लंगडा लड़का रहता था उसका नाम ताकाहासी था उसके माता पिता उसे बहुत प्यार करते थे एक बार पड़ोस के एक राजा ने ताकाहासी के राजा पर चढाई कर दी राजा ने एलान किया - "देशवासियों ,यह संकट का समय है इसे अकेले निपटना किसी एक के बस की बात नहीं है ,छोटे -बड़े सभी की सहायता की जरूरत है "
यह सुनकर ताकाहासी सेना में भरती होने चला गया ,परन्तु लंगडा होने के कारण उसे भरती नहीं किया गया ताकाहासी उदास होकर लौट रहा था राह में एक साधु मिला साधु ने ताकाहासी से पूछा -"बेटा तुम इतने उदास क्यों हो ? ताकाहासी ने कहा - क्या करुँ ?मै देश के लिए लड़ना चाहता था ,परन्तु मुझे सेना में भरती नहीं किया गया "साधु ने कहा -"तुम सेना में भरती हुए बिना भी देश की भलाई कर सकते हो जाओ ,आज से देश की सडकों के किनारे पेड़ लगाना शुरु कर दो यह भी देश की एक महान सेवा होगी " लड़के ने ऐसा ही किया उसने एक सड़क के किनारों पर बहुत से पेड़ लगाए ये बहुत से पेड़ आज भी खड़े हैं जिस सड़क पर उसने पेड़ लगाए थे ,उसका नाम "ताकाहासी सड़क "है ताकाहासी ने लंगडा होते हुए भी देश -सेवा की और अपना नाम अमर कर दिया

संकलन
नीलम मिश्रा


चंदामामा

चंदा रहते हो किस देश ।
लगते हो तुम सदा विशेष ।

रहते हो तुम भले ही दूर ।
मुख पर रहता हर पल नूर ।

दिखते हो तुम शीतल शांत ।
सागर हो तुम्हे देख अशांत ।

बने सलोनी तुमसे रात ।
करते हैं सब तुमसे बात ।

घटते बढ़ते हो दिन रात ।
समझ न आये हमको बात ।

कभी चमकते बन कर थाल ।
गायब हो कर करो कमाल ।

शीतलता का देते दान ।
नही चाँदनी का उपमान ।

तारों को है तुमसे प्रीत ।
रात बिताते बन कर मीत ।

धवल चांदनी का आभास ।
मन में भरे हर्ष उल्लास ।

करवा चौथ भले हो ईद ।
देख तुम्हे मनते यह तीज ।

पूरा छिप जाते जिस रात ।
बन जाती वह काली रात ।

थकते नही तुम्हारे अंग ।
घूम घूम कर धरती संग ।

चंदा रहते हो किस देश ।
लगते हो तुम सदा विशेष ।

कवि कुलवंत सिंह


Thursday, March 19, 2009

COME LITTLE CHILDREN COME TO ME.....



Monday, March 16, 2009

सीमा जी, आचार्य जी, dreamer जी, नीति जी, रचना जी, शोभा जी, राघव जी व नाजिम जी

आप सभी को प्रतिभागिता में भाग न लेने पर दंड दिया जाता है ,अगली बार एक पहेली के दो -दो उत्तर कम से कम लिखने होंगे आप सभी को .........

इस बार की पहेली के जवाब हैं ,
१) आग
२)पगड़ी
३)आआआअकक्षी (छींक )
४)काली मिर्च
५)गिलहरी

सबसे पहले मनु जी ने सबसे सही उत्तर दिए जिसका आशय है की वो गहरे पानी में हैं
सुमित को निखट्टू ,और dschauhan ji भी थोडा मनमौजी माना जायेगा |
बच्चो की दुनिया में सब चलता है ,क्योंकि .........................................


Saturday, March 14, 2009

आप कितने पानी में हैं ???????????????????????????????????

आप कितने पानी में हैं ???????????????????????????????????
१)पत्थर से भी मै भिड जाऊं ,
पर पानी से पार न पाऊँ

२)पड़ी रहे धड के बिना ,
गडी मिले सिर हीन
पग काटे पग रहत है ,
अक्षर केवल तीन

३)आते ही आधा नाम बताऊं
कभी अशुभ मै समझा जाऊं

४)मटर से छोटा ,रंग है उसका काला,
जो न बुझे ,वो बन्दर का साला

५)छोटा बदन रेखाएं तीन ,
दाना खाए हाथ से बीन



सोच क्या रहे हैं ,जल्दी से लिख डालिए अपने उत्तर और पाइए नयी -नयी उपाधियों के नए -नए खिताब ,खिताब इस बार गुप्त रखे गए हैं ,प्रतियोगिता के उत्तर के साथ ही नवाजे जायेंगे आप सभी को ,सोमवार तक के लिए अलविदा |


Friday, March 13, 2009

कभी न भूलो

कभी न भूलो

उदाहरण प्रस्तुत करना उपदेश देने से अच्छा है
( एक अंग्रेजी कहावत )


प्रशंसा के भूखे यह सिद्ध करते हैं कि उनमे योग्यता का अभाव है |
(प्लूटो )


उठो ,जागो और तब तक न रुको जब तक तुम्हे लक्ष्य की प्राप्ति न हो |
(स्वामी विवेकानंद )

ज्ञान एकता लाता है ,अज्ञान विभाजन
(राम कृष्ण परमहंस )


अपनी कमियों और अक्षमता से मिली असफलता के लिए भाग्य को दोष मत दो |
(जरथूस्त्र )

संकलन
नीलम मिश्रा


अभिमानी साँड


अभिमानी साँड


पर्वत एक नदी के कूल
खिले थे रंग-बिरंगे फूल
छोटा सा इक गाँव भी पास
ज्यों कुदरत का घर हो खास
सारे वहां पे मिलकर रहते
और सबको ही अपना कहते
हर सुख-दुख के सारे साथी
क्या नर, पशु क्या पक्षी जाति
न कोई छोटा-बडा वहां पर
ज्यों उतरा हो स्वर्ग धरा पर
नहीं किसी में कोई अभिमान
यही वहां की थी पहचान
साँड एक आया इक बार
मिल गई उसको वहां बहार
लिया सबने उसे अपना मान
साँड में भर गया अभिमान
समझने लगा वो खुद को महान
बोले मै हूँ गुणों की खान
सारे उसकी बातें सुनते
पर सुनकर भी चुप ही रहते
समझा साँड ये सब कमजोर
मुझ सा नहीं है इनमें जोर
कर गया वो सब सीमा पार
करने लगा सब पर प्रहार
जो भी उसके सामने आता
उसको सींगों पर उठाता
पटक के फिर लातों से मारे
दुखी हो गए उससे सारे
मिलकर सबने किया विचार
साँड मे भरा है बस अहंकार
मान जो उसका करदें चूर
नहीं करेगा कार्य क्रूर
मिलकर गए साँड के पास
बोले तुम तो सबसे खास
पर यहां पर इक बडी मुसीबत
नदी किनारे है जो पर्वत
रास्ता रोके सबका खडा है
पत्थर बन मार्ग में अडा है
चढनी पडती है सबको चढाई
बना दिया है गाँव को खाई
पर न किसी में इतनी हिम्मत
हटा सके मार्ग से पर्वत
तुम ही एक यहां पर वीर
मिटाओ समस्या अति गम्भीर
जो तुम उस पर्वत को हटाओ
सबके राजा तुम बन जाओ
सुनकर साँड तो मन में फूला
अपनी वो औकात भी भूला
चला हटाने पर्वत राज
बनेगा सबका राजा आज
गुस्से में जा सर टकराया
बडे से पत्थर को गिराया
गिरा वो पत्थर सिर पर आकर
मुडा साँड अब मुँह की खाकर
घायल साँड हुआ बेहोश
ठण्डा पड गया सारा जोश
सब ने फिर भी की भलाई
साँड को फिर से होश दिलाई
मुश्किल से बचाई जान
साँड का टूट गया अभिमान
किया साँड ने पश्चाताप
नहीं करेगा कभी भी पाप
------------------
------------------
बच्चो तुम भी बात समझना
अपने ऊपर मान न करना
जो करते झूठा अभिमान
नहीं बनते वो कभी महान

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आदरणीय निखिल आनन्द गिरी जी और नीलम जी आपका विशेष धन्यवाद ,एक बालकथा का आईडिया सुझाने के लिए और आपका आईडिया चुराने के लिए क्षमा भी चाहती हूँ शैलेश जी अब आपको चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि हमने उस साँड को उसकी औकात याद दिला दी है......:)


होली आई

होली आई

हम बच्चों की मस्ती आई
होली आई होली आई ।
झूमें नाचें मौज करं सब
होली आई होली आई ।

रंग रंग में रंगे हैं सब
सबने एक पहचान पाई ।
भूल गए सब खुद को आज
होली आई होली आई ।

अबीर गुलाल उड़ा उड़ा कर
ढ़ोल बजाती टोली आई ।
अब अपने ही लगते आज
होली आई होली आई ।

दही बड़ा औ चाट पकोड़ी
खूब दबा कर हमने खाई ।
रसगुल्ले गुझिया मालपुए
होली आई होली आई ।

लाल हरा और नीला पीला
है रंगों की बहार आई ।
फागुन में रंगीनी छाई
होली आई होली आई ।

कवि कुलवंत सिंह


Wednesday, March 11, 2009

आओ होली मनाये

बच्चो, होली मना रहे हो न। आपकी रचना आंटी यह कविता और नीलम आंटी ने इसकी रिकॉर्डिंग हिन्द-युग्म को बहुत पहले ही भेज दी थी, लेकिन हम सभी होली की तैयारियों में आपकी तरह व्यस्त थे, इसलिए उनका संदेश आपको देर से पहुँचा रहे हैं। पढ़ो और सुनो भी॰॰॰

है होली की पूर्व संध्या
आओ ये शपथ उठायें
इस अग्नि में जलाएं
अपनी कलुषित भावनाएं
आओ होली मनाये


बने पूर्ण मनुष्य हम
सच कहें सच से न डरे हम
परहित का दीप जलाएं
आओ होली मनाएं


होलिका जली प्रह्लाद बचा
अच्छाई का बिगुल बजा
प्रेम का परचम घर घर फैलाएं
आओ होली मनाये


स्वयं के लिए जिए तो क्या जिए
दर्द औरों का न लिए तो क्या लिए
सब के मंगल की करें कामनाएं
आओ होली मनाये


हम बच्चे बड़ों से प्रार्थना करें
अपनी खुशियों में औरों का ध्यान धरें
होली की कुछ कुरीतियों को न अपनाये
आओ होली मनाएं


नीचे के प्लेयर से यही कविता नीलम आंटी की आवाज़ में सुनिए-






प्रणव गौड़ 'कुश' की होली



जी हाँ, यह पेंटिंग बना भेजी है प्रणव गौड़ 'कुश' ने, जो हर त्योहार पर हमें कोई न कोई चित्र अपनी नन्ही कूँची से बना भेजते हैं।





Monday, March 9, 2009

सबसे अच्छे प्रतिभागी हैं dreamer जी ,सबसे कमजोर ठहरे हैं डी.एस चौहान जी

आपने बताये जो हमने पूछे

1) पेड़
२ पहिया, ( सूरज )डोली
४ चक्की (चकला- बेलन )
५ लालू प्रसाद यादव ( नेता जी)
हमने सही जवाब दे दिए हैं ,क्रमबार आपकी उपाधियां आपके सामने हैं

नीति ,सुमित जी पिछड़ते जा रहे हैं ,आपसे अनुरोध है ,सारा काम छोड़ कर सिर्फ पहेलियों में ही ध्यान लगाएं

सीमा जी , लालू प्रसाद का नाम न बताने की वजह से हम आपको बुद्धू घोषित करने का दुस्स्साहस कर ही देते हैं

मनु जी ने जो कारण बताया वो किसी की समझ में नहीं आया ,पहेलियाँ बूझने के लिए दिमाग सेण्टर में न हो तो ज्यादा अच्छा होता है
विशेष -जो उत्तर कोष्ठ में हैं वो भी हमे सही लग रहें हैं
पहलवान तो कोई नही बन सका ,वजह लालू प्रसाद जी का नाम किसी के दिमाग में नही आया
होली की शुभकामनाओं के साथ



होली-कथा-काव्य - होलिका और प्रह्लाद

एक बार दानव था एक
करता रहता पाप अनेक
हिरणाक्शप था उसका नाम
स्वयं को समझे वो भगवान्
करता सब पर अत्याचार
देता निर्दोषों को मार
कहता बस मेरी हो पूजा
बिन मेरे ईश्वर न दूजा
जो भी उसका करता विरोध
ले लेता उससे प्रतिशोध
पर उसकी अपनी औलाद
नाम था जिसका भक्त प्रह्लाद
वही पिता को प्रभु न माने
एक नारायण को ही जाने
हिरणाक्शप ने बहुत समझाया
पर सुत को समझा न पाया
पर्वत की चोटी से गिराया
नागों के मध्य ठहराया
फिर भी सुत को मार न पाया
तो अपनी बहना को बुलाया
मिला था जिसको यह वरदान
अग्नि न ले सकेगी जान
जो वो अकेले ही जाएगी
आग भी नहीं जला पाएगी
पा वरदान हुई अभिमानी
बात भाई की उसने मानी
रहा न ठीक से वर भी याद
गोदि में ले लिया प्रहलाद
चली गई वो आग के अंदर
था प्रह्लाद के लिए वो मन्दिर
नारायण का लेता नाम
नहीं और कोई उसको काम
अग्नि भी उसे जला न पाई
पर होलिका की जान पे आई
भस्म हुई वह आग में जलकर
बचा प्रह्लाद नारायण जप कर
सत्य बचा और पाप जलाया
तब से होली दिवस मनाया

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होली के पावन पर्व की आप सबको बधाई एवम शुभ-कामनाएं


Sunday, March 8, 2009

होली-कथा काव्य - श्री राधा-कृष्ण की होली

आओ बच्चो तुम्हें सुनाऊं
होली का इक भेद बताऊं
एक बार छोटे से कान्हा
माँ को देने लगे उलाहना
क्यों कुदरत ने भेद है पाला
राधा गोरी और मै काला
गोरे रंग पे उसे गुमान
करती है बहुत अभिमान
मुस्काई सुन जसुमति मैया
सुत की लेने लगी बलैया
हँसी हँसी में माँ यूँ बोली
राधा भी तेरी हमजोली
भ्रम कोई न मन में पालो
जाओ राधा को रंग डालो
कान्हा को मिल गया बहाना
ग्वालों संग पहुंचे बरसाना
सखियों संग राधा को पाया
गुलाल जा चुपके से लगाया
सखियों ने भी लट्ठ चलाया
इक दूजे को रंग लगाया
खेल खेल में खेली होली
बन गए वो सारे हमजोली
तब से यह हर वर्ष मनाएं
जब फागुन की पूनम आए

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Saturday, March 7, 2009

होली-कथा काव्य - श्री कृष्ण द्वारा पूतना वध

नमस्कार प्यारे बच्चो ,
आजकल आप सब तरफ रंगों की बौछार देख रहे होंगे न |
पिचकारी और रंगों से बाजारों की शोभा देखते की बनती है |
आप भी होली की मस्ती में झूमने को बेताब हैं न , खूब तैयारी
कर रहे होंगे |हमारी आप सबको होली की ढेरों शुभ-कामनाएं | पर
एक बात आपको याद है न पिछले साल होली पर मैने आपको एक
गुडिया की कहानी सुनाई थी , वो भूल गए हों तो एक बार फिर से अवश्य पढना |

क्या आपको पता है होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है |
इसके साथ भी बहुत सी कथाएं जुडी हैं |कुछ बातें मै आपको बताऊंगी |
तो यह है होली के साथ जुडी एक कथा- श्री कृष्ण जी द्वारा पूतना का वध


होली-कथा काव्य - श्री कृष्ण द्वारा पूतना वध

रंग-रंगीली आई होली
आओ बन जाएं हमजोली
होली की बात बताऊं
लीला कृष्ण की ए सुनाऊं
नन्द यसुदा के घर गोपाल
समझ ली कंस ने इक दिन चाल
मारेगा उसको हर हाल
देवकी का न रहेगा लाल
न वो इस धरती पे रहेगा
न वो उसका वध करेगा
पूतना दानवी को बुलाया
और कान्हा का किस्सा सुनाया
किसी तरह से उसको मारो
जाओ अब गोकुल मे पधारो
सुन्दर रूप पूतना ने बनाया
जाकर जसुमति को भरमाया
दूध मे उसको जहर पिलाए
सोच के कान्हा लिया उठाए
ज्यों ही कान्हा को उठाया
नभ मे उसे कान्हा ने उडाया
पटक के यूँ पूतना को मारा
भयभीत था गोकुल सारा
पर कान्हा पूतना के ऊपर
खेल रहा चढकर छाती पर
गई पूतना राक्षसी मारी
सबने कृष्ण की नज़र उतारी
कोई समझ पाया न बात
हैं कान्हा त्रिलोकी नाथ
मिलकर फिर पूतना को जलाया
बुरे भाव को मार मुकाया
पाई राक्षसी पर जीत
सत्य ही है सबका मीत
तब से ही त्योहार मनाएं
असत्य रूप पूतना जलाएं

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हम पूछें और आप बतायें

"क्यों न एक बार फिर से पहलवान बना जाए "
१)एक टांग से खडा हुआ हूँ ,
एक जगह पर अडा हूँ ,
भारी छाता है मैने ताना ,
सब जीवों को देता हूँ खाना


२) गोल- गोल सी चीज़ें बहुतेरी
सर्वश्रेष्ठ हूँ मानो मेरी ,
इसको तुम न समझो गप
मै रूठूँ तो दुनिया ठप


३)एक गुफा दो भुजा पसारे ,
बिना शीश के पाखर डारे
नारी लिए कभी न टरे ,
चार के कंधे मिल के चले |


४)एक नारी की दो औलादें
दोनों का एक ही रंग ,
एक चले और दूजा सोवे ,
फिर भी दोनों रहती संग


५)जब मुहँ खोले अड़बड बोले ,
सबे डूलाय ,खुद भी डोले |
रबरी - मलाई खाई खूब ,
कुर्सी को वो माने महबूब


अंतिम पहेली सबसे पहले बताने वाला प्रतिभागी पहलवान ,सारी पहेलियाँ सबसे पहले बताने वाला सर्व श्रेष्ठ पहलवान ,माना जायेगा ,सारे प्रतिभागी जो इस अखाडे में कूदेंगे ,
वो भी इस दिमागी कुश्ती के पहलवान ही माने जायेंगे ,फिर देर किस बात की ,बस कूद जाइए ,और बन जाईये पहलवान


Friday, March 6, 2009

होली का त्यौहार

होली का त्यौहार ।
रंगों का उपहार ।

प्रकृति खिली है खूब ।
नरम नरम है दूब ।

भांत भांत के रूप।
भली लगे है धूप ।

गुझिया औ मिष्ठान ।
खूब बने पकवान ।

भूल गये सब बैर ।
अपने लगते गैर ।

पिचकारी की धार ।
पानी भर कर मार ।

रंगों की बौछार ।
मस्ती भरी फुहार ।

मीत बने हैं आज
खोल रहे हैं राज ।

नीला पीला लाल ।
चेहरों पे गुलाल ।

खूब छनी है भांग ।
बड़ों बड़ों का स्वांग ।

मस्ती से सब चूर ।
उछल कूद भरपूर ।

आज एक पहचान ।
रंगा रंग इनसान ।

कवि कुलवंत सिंह


महात्मा ईसा " बुरा जो देखन मै चला"

महात्मा ईसा
" बुरा जो देखन मै चला"
एक बार कुछ लोग एक स्त्री को खरी -खोटी सुनाते हुए ,पकड़कर ईसा मसीह के सामने ले आये |उन्होंने उस स्त्री की खूब बुराई करके ईसा से उसको कठोर दंड देने को
प्रार्थना की |इसके लिए सभी समाज सुधारक बड़े व्यग्र थे |
ईसा मसीह कुछ देर चुप रहे |उन्होंने एक बार स्त्री को देखा |वह लज्जा से सिर झुकाए चुप चाप कड़ी थी |फिर उन समाजसुधारकों को देखा ;उनमे से हर एक अपने को बहुत भला साबित करने के लिए बढ़चढ़ कर उस स्त्री की बुराई कर रहा था |
ईसा पर उनकी उछल-कूद का कोई प्रभाव नहीं पड़ा |वे गंभीर होकर बोले -यदि यह सचमुच ऐसी अपराधिनी है तो मेरी राय में इसको पत्थरों से मारना चाहिए |
समाज -सुधारकों ने एक स्वर में कहा -अवश्य -अवश्य यह यह दुष्ट औरत इसी के योग्य है |
ईसा फिर बोले -ठीक है ,आप लोग इसे पत्थरों से मारिये ; लेकिन पहला पत्थर वही फेंके जो स्वभाव चरित्र से बिलकुल निर्दोष हो |कोई दोषी किसी को दूसरे दोषी को दंड देने का अधिकारी नहीं है |अपने दिलों को सचाई से टटोलकर तब आगे बढिए |
ईसा के आगे सबने शुद्ध हद्रय से स्वयम अपने -अपने स्वभाव -चरित्र की छानबीन की |
उस समय हर एक को इस तरह का अनुभव हुआ :

बुरा जो देखन मै चला ,बुरा न दीखा कोय |
जो दिल खोजा आपना ,मुझ सा बुरा न कोय ||

सभी दूषक -विदूषक जैसे दिखाई पड़ने लगे | उनमे से किसी ने भी पत्थर मारने का साहस नहीं किया |


Wednesday, March 4, 2009

गुरुवे नमः

कहाँ से आते चन्दा मामा
कैसे उगते रात सितारे
फल पेडों पर कैसे लगते
पेड़ खड़े है बिना सहारे
पश्चिम सारा लाल हो गया
काली अंधियारी रात फैली
छोटा सा मन बुझ ना पाता
सब कुछ लगता एक पहेली
विद्यालय में आते जैसे
जादू सारा समझ में आता
सहज सरल उदाहरण देकर
शिक्षक सारे भेद बताता
जो सूरज आकाश ना उगता
क्या हालत नजरों की होती
दृष्टी देते मात-पिता और
गुरु देते आँखों को ज्योति

विनय के॰ जोशी

इस कविता को नीलम मिश्रा ने आवाज़ भी दी है, यहाँ सुनें-





Tuesday, March 3, 2009

नीति और सुमित को सबसे बड़ा पहलवान घोषित किया गया है |

नीति और सुमित को सबसे बड़ा पहलवान घोषित किया गया है |

आप लोगो का उत्साह और रूचि नित नए -नए प्रयोग करने का हौसला देती रहती है ,
इस बार सभी लोगों को पहलवान मान लिया गया है ,प्रयास तो सभी ने किया ही न

पहेलियों के उत्तर कुछ इस प्रकार हैं
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१)खजूर
२)आम
३)अखरोट
४)अंगूठी (सुमित जी हैंडपंप या नलका हरगिज नहीं )
५)रोटी

आप सब लोग बताएं कि आप पहेलियाँ सप्ताह में कितनी बार चाहते हैं ,आप इस पर अपने सुझाव भी भेजें ,नाजिम जी आप नाराज हो गए हैं शायद ,आचार्य जी और विनय जी से भी गुजारिश है कि हमारे बाल उद्यान को अपनी उपस्थिति का आशीर्वाद अवश्य दे |


हितोपदेश-15 - लालची बाघ

नमस्कार बच्चो , आज पढिए हितोपदेश की कहानी लालची बाघ
लालची बाघ

एक बार था एक शिकारी
दुनिया उसकी प्यारी-प्यारी
था उसका छोटा परिवार
एक गाँव मे था घर-बार
रोज ही जन्गल मे वो जाता
एक पशु को मार के लाता
आकर घर म सबको खिलाता
जीवन ऐसे ही बिताता
इक दिन मृग खाने की चाह
निकल पडा जन्गल की राह
जाते ही मिल गया हिरन
सोचा उसने अच्छा दिन
झट से उसको मार गिराया
और फिर कन्धो पे उठाया
जा रहा था वापिस घर
देख लिया इक जन्गली सुअर
हिरन को नीचे झट से गिराया
जन्गली सुअर पे बाण चलाया
गरदन पार हुआ वह बाण
खतरे मे थी सुअर की जान
मरते-मरते वह गुर्राया
शिकारी को भी मार गिराया
मृग ,शिकारी और सुअर
गिरे पडे थे धरती पर
इतने मे आया इक बाघ
बोला मेरे जग गए भाग
इनको अकेले ही खाऊँगा
किसी को भी न बतलाऊँगा
पर मै पहले किस को खाऊँ
स्वाद का कैसे पता लगाऊँ
देखेगा थोडा सब चखकर
भरेगा पेट वो तब जाकर
सुअर की गरदन मे जो बाण
मास का उस पर है निशान
पहले वह उस मास को खाए
और स्वाद का पता लगाए
खाने लगा मास का टुकडा
बाण से कट गया उसका जबडा
चीर के जबडा सिर मे धँसकर
मरा बाघ उस तीर मे फँस कर
जो न बाघ यूँ लालच करता
तो वो ऐसे ही न मरता
जो न मन मे लालच आता
तो मजे से सबको खाता
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चित्रकार - मनु बेतख्लुस जी


कोयल (आवाज़ के साथ पुनःप्रकाशित)

तान सुरीली कोयल की है ।
बोली मीठी कोयल की है ॥
अमिया पर जब कुहुक सुनाए,
सबके दिल में खुशी जगाए,
कुहुक कुहुक कर कोयल कूदे
बात निराली कोयल की है ।
धरती पर हरियाली छाये,
कोयल की बोली मन भाये,
वन अपवन में उड़ती फिरती
अदा निराली कोयल की है ।
दिखती तो है बिलकुल काली,
लेकिन लगती भोली भाली,
सबके मन को भा जाती है
बात सुहानी कोयल की है ।
अपनी मस्ती में रहती है,
परवाह नही कुछ करती है,
अपने अण्डे कौवे को दे
चालाकी यह कोयल की है ।
बुरा नही सब काला होता,
अंदर बाहर एक न होता,
जब भी बोलो मीठा बोलो
बोली जैसी कोयल की है ।

कवि कुलवंत सिंह

इस कविता को नीलम मिश्रा ने आवाज़ भी दी है, यहाँ सुनें-




Monday, March 2, 2009

आप कितने पहलवान हैं ?

आप को सिर्फ दिमागी कुश्ती करनी है ,नियम वही होंगे ,सबसे पहले उत्तर बताने वाले को बुद्धिमान ,उसके बाद औसत बुधि और उत्तर न बताने बाले को मूर्ख बताया जायेगा |
१)जड़ कहे मै अबर - खबर
,पेड़ कहे मै रानी
फूल कहे मै नवाब ,
फल लागे सुल्तानी |

२)हर ख़ास -ओ आम से ,
कुछ माह को मिलने आये
मांस में हड्डी नहीं ,
उसका नाम बताएं

३)आये पहाड़ से महंगे रोडे
फल पाए , जो सिर फोडे

४)पेट में अंगुली
सिर पे पत्थर

५)बीच में ले ताली बजी ,
निकल आग से थाल सजी

सारे उत्तर सही देने वाले को हमेशा की ही तरह सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी घोषित किया जायेगा

नीलम मिश्रा