Monday, December 10, 2007

आओ हम गाँधी बन जाएँ..........


आओ हम गाँधी बन जाएँ, वंदे मातरम् गाएँ
आओ हम गाँधी बन जाएँ........................


सत्य अहिंसा को अपनाकर सादा जीवन पाएँ
जाति-धर्म का भेद भुलाकर सबको गले लगाएँ
आओ हम गाँधी बन जाएँ, वंदे मातरम् गाएँ
आओ हम गाँधी बन जाएँ........................


करें प्रतिज्ञा हम सब मिलकर मानवता अपनाएँ
विश्वशांति हो ध्येय हमारा सरस शांति गीत गाएँ
देश हमारा सबसे न्यारा इस पर हम मिट जाएँ
सबको सब अधिकार मिले,आजादी का पर्व मनाएँ
आओ हम गाँधी बन जाएँ, वंदे मातरम् गाएँ
आओ हम गाँधी बन जाएँ........................


जन्मभूमि यह कर्मभूमि भारत की शान बढाएँ
मातृभूमि यह सबकी माता इसको शीश झुकाएँ
आओ हम गाँधी बन जाएँ, वंदे मातरम् गाएँ
आओ हम गाँधी बन जाएँ.......................


आओ हम गाँधी बन जाएँ, वंदे मातरम् गाएँ
आओ हम गाँधी बन जाएँ.......................


- डॉ. नंदन, बचेली (छतिसगढ)


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5 पाठकों का कहना है :

sahil का कहना है कि -

नंदन जी बच्चों के लिए लिखा आपने और मैं बच्चा नहीं हूँ,फ़िर भी मुझे यह प्यारी सी कविता जंची.बच्चों के लिए यह एक अमूल्य कविता सिद्ध होगी.
शुभकामनाओं समेत
आलोक सिंह "साहिल"

रचना सागर का कहना है कि -

नंदन जी,

गाँधी जी की इतनी अच्छी तरीके से याद दिलायी कि आखें नम हो आयी...

इतनी अच्ची कविता के लिये धन्यवाद

Alpana Verma का कहना है कि -

डॉ नंदन जी,
आप का ये एक और तोहफा बच्चों को बहुत पसंद आएगा-
गाँधी जी पर यह कविता सरल और आसानी से याद हो जाने वाली है-इसे समूह गान की तरह भी गाया जा सकता है-- ऐसी ही सुंदर कविताओं का आगे भी इंतज़ार रहेगा.

साथ दिया चित्र एक दुर्लभ चित्र लग रहा है-इस चित्र के लिए भी हिंद युग्म को धन्यवाद.

रंजू का कहना है कि -

बहुत सुंदर लिखा है आपने गांधी जी पर नंदन जी
इसको गाने के रूप में सुनना सच में अच्छा लगेगा !!

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

सुन्दर संदेश है नन्दन जी,
जिसे आपने कविता के माध्यम से दिया है. गांधी बनना तो बहुत कठिन है.. यदि हम उनके वचनों का ही पालन करले तो दुनिया स्वर्ग से कम नहीं होगी.

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