Thursday, December 27, 2007

नये बालकवि राघव शर्मा

बाल-उद्यान बाल रचनाकारों की तलाश में है, क्योंकि बाल-उद्यान इन विचारधारा में विश्वास रखता है कि 'बच्चे होते मन के सच्चे'। और मन की सच्ची बातें ही साहित्य की श्रेणी में आती हैं। आज हम ऐसे ही एक सच्चे साहित्यकार को खोज लाये हैं, इनका नाम है राघव शर्मा जो कि कक्षा छठवीं के विद्यार्थी हैं और कविताएँ लिखने का शौक रखते हैं। पहले इनके सपनों की दुनिया से रूबरू होते हैं, धीरे-धीरे इनकी सभी कविताएँ हम प्रकाशित करेंगे।

मेरे सपनों की दुनिया

मेरे सपनों की दुनिया वहीं है
जहाँ कभी कोई न रोए।
जहाँ सब जन हँसते ही रहें
जहाँ कभी कोई गुस्सा न होए।।

मेरे सपनों की दुनिया वहीं है
जहाँ कोई न काला हो न हो सफ़ेद।
जहाँ सब धर्म आज़ाद रहें
जहाँ कोई रंग में करे न भेद।।

मेरे सपनों की दुनिया वहीं है वहीं है
जहाँ सदा अच्छाई का ही हो राज।
जहाँ कभी कुछ बुरा न हो
जहाँ बनूँ मैं सबका महाराज।।


राघव शर्मा
जन्मतिथि- ८ अगस्त १९९६
कक्षा- ६
सेंट एन्थोनी स्कूल
सेक्टर ९ फ़रीदाबाद


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7 पाठकों का कहना है :

Alpana Verma का कहना है कि -

प्रिय राघव ,
तुम्हारी सीधी सच्ची कविता पढ़ कर तुम्हारी नेक सोच का पता चला.
ऐसे ही लिखते रहना और तुम बच्चों के ऐसे अच्छे विचार होंगे तो भविष्य का भारत सच मे तुम्हारे सपने की तरह सुंदर होगा.
ढेर सारी शुभकामनाएं और आशीर्वाद .

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

मेरा भी यही सपना है राघव! मैं दंग हूँ कि आप इस उम्र में इतनी बढ़िया कविताएँ लिखते हैं। बहुत-बहुत बधाई। मैं आपसे मिलना चाहूँगा।

shobha का कहना है कि -

राघव बेटा
तुम इतनी कम उम्र में इतना अच्छा कैसे लिख लेते हो? मैं तुम्हारी कविता पढ़कर बहुत प्रभावित हुई । तुम इसी प्रकार लिखते रहो और हम तुम्हारे लिए तालियाँ बजाएँगे। बहुत-बहुत प्यार तथा आशीर्वाद सहित

sahil का कहना है कि -

राघव बाबू, आपके सपनों की यह दुनिया अगर मैं चुरा लूँ तो बुरा तो नहीं मानोगे न,
बहुत ही प्यारे हैं आपके सपने,खुदा करे आपके इन सपनों को किसी की नजर न लगे
सप्रेम
आलोक सिंह "साहिल"

sunita yadav का कहना है कि -

तो महाराज आप के सपनों की दुनिया में मुझे भी ले चलोगे?...:-)

सुनिता यादव

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

तेरे सपनों की दुनियाँ में हम भी खो गये राघव
बोलो हमको जहाँ सलोना तुम दिखलाओगे कब
चलो उठायें बीडा अपने सपने सच करने का
एक एक के दिल में ऐस प्रेम नेह भरने का
जहाँ रहे ना धर्म भेद ना नफरत हो ना रोना
अच्छाई व प्यार भरा हो देश का कोना कोना
लिये लेखनी लिखते रहना यूँ ही प्यारा प्यारा
1 से 1 मिले हैं अब तो हम भी हो गये ग्यारहा

- राघव :)

रचना सागर का कहना है कि -

राघव ,
सही मे तुम्हारी बहुत अच्छी दुनिया है...

भगवान करे कि तुम्हारा स्वप्न साकार हो

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