Wednesday, November 7, 2007

दीपावली विशेषांक-भाग-२

‘दीपावली’ यानी कि भरपूर मस्ती, पटाखे और धूम-धडाका। पटाखों के बिना तो दीपावली अधूरी लगने लगेगी, यह बात कुछ हद तक तो ठीक है किंतु प्यारे बच्चों, पटाखे खतरनाक भी होते हैं। आपकी छोटी सी लापरवाही से आपको जला सकते हैं या कि किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

पिछली दीपावली में नीटू ने फुलझड़ी जला कर सड़क पर फेंक दी थी जिससे चुनमुन का पैर जल गया था। रिंकू ने हाथ में रख कर अनार जलाना चाहा था जो कि हाथ ही में फट गया और वह बुरी तरह जल गया। टिम-टिम के कान ही के पास एक जोर की आवाज वाला पटाखा फटा था जिससे वह अब ठीक से सुन नहीं पाता। रोशनी के घर के परदों में जो आग लगी थी वह लापरवाही से राकेट चलाने के कारण ही तो हुई थी। बच्चो, पटाखे असावधानी से चलाने के लिये नहीं होते। अकेले चलाने के लिये भी नहीं होते।

- पटाखे चलाते समय अपने पापा-मम्मी या कि भैया-दीदी को साथ जरूर लें।

- बरनौल, रूई जैसी चीजें आपके फर्स्ट-एड बाक्स में अवश्य होनी चाहिये। साथ ही पटाखे खुले मैदान में चलाये जहाँ पानी की भरी हुई बाल्टी भी साथ रखें।

- पापा के साथ पटाखे खरीदने जाते हुए अपनी पसंद के पटाखों के लिये जिद बिलकुल न करें। जिद करना अच्छी बात नहीं होती। आपके पापा अच्छी तरह जानते हैं कि आपकी उम्र के अनुरूप किस तरह के पटाखे खरीदे जायँ।

- ज्यादा आवाज वाले पटाखे छोटे बच्चों और बुजुर्गों के कानों पर बुरा प्रभाव डालते हैं। इससे बहरे हो जाने तक का खतरा है। यह सलाह है कि पटाखे चलाने से पहले अपने कानों में रूई डाल लें, यह तेज धमाकों में आपके कानों की रक्षा करेगा।

- पटाखे के धूएँ से अपनी नाक और आँख दोनों को बचायें। आपके कोमल शरीर पर इसके बुरे प्रभाव भी हो सकते हैं।
- अनार जमीन पर रख कर दूर से ही उसमें आग लगायें। हाथ में रख कर चलाने से उसके फूट जाने का खतरा है। आप इसमें जल भी सकते हैं।
- राकेट खुली जगह में ही चलायें। मोहल्ले में चलाने पर यह किसी घर में घुस सकता है और इस तरह आग लगने का बड़ा खतरा भी हो सकता है।
- शरारती बच्चे गाड़ी, स्कूटर, छोटे बच्चों के पीछे और कुत्तों की पूँछ में लड़ी बाँध कर जला देते हैं। आपकी यह छोटी सी शरारत बड़ी दुर्घटना का कारण भी बन सकती है। एसा कभी न करें।
- ऐसा पटाखा जो सुलग कर नहीं फटा हो, उसकी ओर न जायें, वह अचानक फट कर आपको दुर्धटनाग्रस्त कर सकता है।
- सबसे महत्वपूर्ण बात कि पटाखे कम चलायें। पटाखों से वायु प्रदूषित होता है। हमें जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनना चाहिये।

आपका-
राजीव रंजन प्रसाद


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4 पाठकों का कहना है :

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

राजीव जी,

बहुत बेहतरीन तरीके से आपने उन सभी बातों पर प्रकाश डाला है जो वास्तव में जरूरी है बच्चों के लिये भी और बडों के लिये भी...

दोनो विशेषांक बहुत सुदर प्रस्तुति..

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

बच्चो,

राजीव अंकल की बात मानोगे तो कभी किसी भी दीपावली के लिए पछतावा नहीं होगा।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

राजीव जी, आपने बुनियादी बातों पर जोर दिया है, जो अक्सर दीवाली में लोगों के साथ हो जाती हैं। हम इन तमाम चीजों का ध्यान रख कर ही अच्छे तरीके से दीपावली मना सकते हैं।

रचना सागर का कहना है कि -

पटाखे को जलाने के तरीके और सीख के लिये बहुत बहुत धन्यवाद

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