Thursday, November 8, 2007

क्या है नरक चतुर्दशी ?


हल्लो बच्चों
खूब मस्ती हो रही है ना ? मुझे पता है । आप सब घर पर मौज़ कर रहे हो । आज छोटी दिवाली है ।अपने वादे के अनुसार मैं आगई आपको उसके बारे में बताने ।
सुनो-
आज त्योहार का दूसरा दिन है । इसको हम नरक चतुर्दशी कहते हैं । आप इसे छोटी दिवाली के रूप में भी जानते हैं । इस दिन घर का कूड़ा-करकट बाहर निकाला जाता है । बच्चों जानते हैं ना कि ये केवल प्रतीक है ?त्योहार कहता है कि पहले अपने दिल का कूड़ा निकालो । अगर किसी के लिए क्रोध है, नफ़रत है तो पहले उसे निकालो फिर त्योहार का आनन्द उठाओ ।

इस दिन के बारे में एक कहानी भी प्रचलित है । कहते हैं कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का
वध किया था । आप जानते हैं ना बच्चों - राक्षस कौन होते हैं ? जो समाज में अशान्ति फैलाते हैं और सबको दुःख देते हैं । ऐसे लोगों के कारण समाज में सब दुःखी होते हैं । इसीलिए इनके बध पर सब खुश होते हैं ।

आप सब अच्छे काम करें और हर काम करने से पहले सोचें कि इससे कहीं किसी का बुरा तो नहीं हो रहा ।बस इतना याद रखोगे तो सबके प्यारे बन जाओगे ।
आज रात को माँ जब दिया जलाए तब आप भी हाथ जोड़ कर यही प्रार्थना करना कि किसी का बुरा ना करें ।
आपकी मनोकामना पूरी हो और आप सबके प्यारे बनें - इसी के साथ विदा लेती हूँ कल फिर आती हूँ एक नई कथा के साथ । तब तक के लिए शुभाशीष ।
तुम्हारी
शोभा आन्टी


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5 पाठकों का कहना है :

सजीव सारथी का कहना है कि -

shobha ji, bahut achhi jaankaari

tanha kavi का कहना है कि -

शोभा जी,
आपकी जानकारी से बच्चों को हीं नहीं , संस्कृति से कट चुके युवाओं को भी बहुत हीं फायदा होगा।

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

इस दीवाली आपके निर्देशों का पालन करूँगा

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

शोभा जी,

सभी को हमारी परम्परा व संस्कृति से रूबरू कराने के लिये हार्दिक धन्यवाद,

शुभ-दीपावली..

रचना सागर का कहना है कि -

बहुत अच्छी जानकारी....

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