Saturday, November 10, 2007

तीन पहेलियाँ

(१)
दिखाये दूर का, पास का ,
बनता है ये कांच का ||
बिना इनके दादी-नानी,
कुछ भी न देख पाती ||
क्या है ये नाम बता ?
आंखों पर की आंख बता ||

(२)
पानी में तैरता, पर पानी से बना,
पानी में डाल दो, पानी कर दे ठंडा |
रखो खुले में तो फिर पानी बन जाये,
कोई है जो इसका नाम बताये ?

(३)
बचपन में तो आती नहीं,
बड़े हो जाओ तो जाती नहीं |
काट दो तो फिर आ जाये,
आए तो फिर कभी न जाये |

उत्तर (१) चश्मा (२) बर्फ (३) दाढ़ी


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4 पाठकों का कहना है :

कुमार आशीष का कहना है कि -

आंखों पर की आंख बता

मजेदार पहेलियां हैं..

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

पहेलियों के रूप में यह नई शुरूआत है। बधाई स्वीकारें।

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

खोडके जी,

सुन्दर बाल सुलभ पहेलियों के लिये बधाई

रचना सागर का कहना है कि -

बहुत अच्छी पहेलियाँ

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