Monday, July 20, 2009

जादुगर ने पकड़ा चाँद


कहती थी मुझे मेरी नानी
आज सुनो सब वही कहानी
गाँव मे रहता था जादुगर
नही था उसका अपना घर
बच्चो को वो खेल दिखाता
जो भी मिलता वो खा लेता
रात को बाहर ही सो जाता
पर नही अपना घर बनाता
एक बार जब वो सोया था
मीठे सपनो मे खोया था
चलने लगे आँधी तूफान
पडी खतरे मे सबकी जान
आसमान मे बादल छाए
चाँद भी कही नज़र नही आए
छाया अँधकार था काला
ऐसे मे चाहिए था उजाला
जादुगर बडा समझदार था
जादु मे भी होशियार था
उड कर गया वो नभ मे ऐसे
उडते नभ मे पक्षी जैसे
पहुँचा वो बादल के पार
चाँद की रोशनी दिखी अपार
पकडा उसने चाँद को जाकर
किया उजाला धरा पे लाकर
आई लोगो की जान मे जान
की इक दूजे की पहचान
रात मे भी हो गया उजाला
और जब मिट गया तम काला
फिर से चाँद को छोड के आया
आसमान मे जोड के आया
की थी उसने सबकी भलाई
मेहनत उसकी थी रँग लाई
.....................
.....................
बच्चो सुनो ध्यान से बात
समझदारी है बडी सौगात
चाँद पे तुम भी जा सकते हो
सबको राह दिखा सकते हो
कर सकते हो तुम भी उजाला
मिटा सकते हो हर तम काला
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6 पाठकों का कहना है :

Manju Gupta का कहना है कि -

बाल कविता का चाँद पर जाने का संदेश बडों और छोटों दोनों को मिलता है परिश्रम से हर कोई ऊचाईयां छु सकता है .बधाई

Disha का कहना है कि -

सुन्दर कविता है.
बच्चों व बड़ों दोनो को ही भलाई करने की सीख मिलती है.

manu का कहना है कि -

बच्चों को सुंदर सीख देती हुई
मजेदार कविता...

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

अच्छी बात यह है कि आपकी हर रचना में एक बहुत महत्वपूर्ण सीख छिपी होती है। बधाई।

Shamikh Faraz का कहना है कि -

जैसा कि शैलेश जी ने कहा कि आपकी हर कविता में एक सीख छुपी होती है ये बात इन लाइन से पता चल रही है. बहुत खूब

बच्चो सुनो ध्यान से बात
समझदारी है बडी सौगात
चाँद पे तुम भी जा सकते हो
सबको राह दिखा सकते हो
कर सकते हो तुम भी उजाला
मिटा सकते हो हर तम काला

shanno का कहना है कि -

सीमा जी,
मैं भी सभी से सहमत हूँ और आपकी काबिलियत की कायल हूँ. हर रचना सीख से भरी और काबिले-तारीफ़ होती है.

लेकिन आजकल:

नीलम जी हैं कहाँ पर, कहाँ पर है ध्यान
उन बिन सूना सा दिखे, उनका बाल उद्यान

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