Sunday, July 5, 2009

मक्खी और मच्छर का बसेरा

मक्खी बोली मच्छर भाई
खास खबर इक मै लाई
सुनकर तुम होगे हैरान
बचगी अब न अपनी जान
जगह-जगह पर हुई सफ़ाई
नही रहा कहीं गंदा
अब न फ़ले-फ़ूलेगा भाई
तेरा मेरा धन्धा
पानी को सब ढक कर रखते
पानी को भी बंद
घर के बाहर भी न दिखता
नाली में भी गंद
गंदा पानी कहीं न ठहरे
लग गए हैं गंदगी पर पहरे
बोलो अब कहां जाएंगे
कहां रहेंगे क्या खाएंगे
कैसे फ़ैलेगी बीमारी
न फ़ैलेगी कोई महामारी
खत्म हो गया अब तो भैया
तेरा मेरा खेल
अब कैसे हो पाएगा अपना
बीमारी से मेल
लगता मौत निकट आई है
नहीं तेरा मेरा जीवन
बोलो भाई अब क्या करेंगे
क्या कहता है तेरा मन
मक्खी की आंखें भर आईं
देने लगी दुहाई
मच्छर के सर पर भी सुनकर
नई मुसीबत आई
बोला मच्छर मक्खी बहना
सच है तेरा कहना
जाने क्यों इन सबने सीखा
साफ़-सफ़ाई में रहना
गंदगी का कर दिया सफ़ाया
कचरा घर से हटाया
हम तुम दोनों बाहर निकाले
बीमारी को भगाया
चलो कहीं अब दूर देश में
जाकर डालें डेरा
साफ़-सफ़ाई पर तो अपना
जोगी वाला फ़ेरा
चलो कहीं अब जाकर ढूंढें
फ़िर से गंदा माल
वहां पहुंच्कर फ़िर से हम-तुम
करेंगे खूब धमाल
यहां तो अब न गलने वाली
तेरी मेरी दाल
गंदगी नहीं तो नहीं चलेगी
कोई भी अपनी चाल
उड गए दोनों मक्खी मच्छर
लिए बीमारी साथ
बच्चो तुम भी हर दम रखना
सुथरे अपने हाथ
धोकर हाथ ही खाना खाना
गंदगी न फ़ैलाना
गंदा करके आस-पास
बीमारी को न बुलाना
साफ़ सफ़ाई रखोगे तो
नहीं होगे बीमार
खुश बच्चों से ही रहता है
सारा सुखी परिवार


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7 पाठकों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

बच्चो तुम भी हर दम रखना
सुथरे अपने हाथ
धोकर हाथ ही खाना खाना
गंदगी न फ़ैलाना
गंदा करके आस-पास
बीमारी को न बुलाना
साफ़ सफ़ाई रखोगे तो
नहीं होगे बीमार
खुश बच्चों से ही रहता है
सारा सुखी परिवार

ekdam sahi baat ,makhhi machchar agar smaapt ho jaayenge to hmaare desh se aadhi bimaariyaan hi khatam ho jaayengi ,aur uska bus ek chota sa asar yah hoga wo yah ki
doctors bhi makhiyaan maarenge .
ha ha ha ha

GAURAV का कहना है कि -

bahut pyari rachna hai....

manu का कहना है कि -

बच्चो तुम भी हर दम रखना
सुथरे अपने हाथ
धोकर हाथ ही खाना खाना
गंदगी न फ़ैलाना

सब के लिए जरूरी,,,,

Disha का कहना है कि -

अच्छी है जानकारी बच्चों के लिये
जरूरी सबके लिये
बढिया

rachana का कहना है कि -

बच्चो तुम भी हर दम रखना
सुथरे अपने हाथ
धोकर हाथ ही खाना खाना
गंदगी न फ़ैलाना
गंदा करके आस-पास
बीमारी को न बुलाना
सीमा जी
आप का लिखा पढना सदा सुखदाई होता है
बच्चे भी आप का धन्यवाद कहते होंगे
सादर
रचना

Shamikh Faraz का कहना है कि -

मक्खी बोली मच्छर भाई
खास खबर इक मै लाई
सुनकर तुम होगे हैरान
बचगी अब न अपनी जान
जगह-जगह पर हुई सफ़ाई
नही रहा कहीं गंदा
अब न फ़ले-फ़ूलेगा भाई
तेरा मेरा धन्धा


आसन शब्दों में एक सुन्दर कविता

Manju Gupta का कहना है कि -

आज समाज को ऐसी कविता की जरूरत है

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