Wednesday, November 5, 2008

पॉपकोर्न की कहानी

पॉपकोर्न की कहानी.......

जब आप सब सिनेमा हाल जाते हैं तो अन्दर जाते ही एक खुशबु आपको अपनी तरफ़ खीचने लगती है वह है पॉपकोर्न की ..पॉपकोर्न खाते हुए पिक्चर देखना .इसका मजा ही कुछ और होता है ..भूनते हुए पॉपकोर्न की 'पॉप 'जैसी चटाख की आवाज़ और उसकी सोंधी सोंधी महक जैसे मजबूर कर देती है खाने को .और भूख को बढ़ा देती है
पर यह पॉपकोर्न बने कैसे क्या आप जानते हैं ? वैसे अभी तक इसके बारे में कोई पक्की जानकारी नही दे पाया है कि यह कैसे भुने गए | इतिहासकार इसकी खोज में लगे हैं इस गुत्थी को सुलझाने में अब तक | नासा से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार पोपकोर्न के सबसे पुराने फासिल्स [निशान] मेक्सिको सिटी में पाये गए हैं .जिनकी अवधि ८०.००० वर्ष पुरानी आंकी गई है | न्यू मेक्सिको और पेरू में भी पोपकोर्न के ऐसे प्रमाण मिले हैं |



पुरातत्वविदों का मानना है कि पोपकोर्न का जन्म मेक्सिको में हुआ और वहीँ से वह चीन .सुमात्रा .अमेरिका और भारत पहुँचा |क्या आप जानते हैं जब कोलंबस १४९२ में अमेरिका पहुँचा था तब यह वहां के मूल निवासियों में बहुत लोकप्रिय था और वेस्टइंडीज के लोगों ने तो उसके साथ पोपकोर्न के बदले वस्तुओं के लेनदेन का प्रस्ताव भी रखा था |

पेरू के उत्तरी तट पर कई सभ्यताएं बसी हुई थी ,उसी में एक सभ्यता थी मोहिका सभ्यता ...वहां के लोग पोपकोर्न भूनने में बहुत उस्ताद थे ..यह बात लगभग ३०० इसा पूर्व की है |इनके पास मिटटी के गोल बर्तन होते थे ,जिनके उपरी सिरे पर एक बहुत बड़ा छेद होता था ..अक्सर इस पर मोटिफ या कुत्ते बिल्लियों की आकृति बनी होती थी ॥|




जबकि अमेरिका के मूल निवासी मकई के भुट्टो में तेल लगा कर सीधे उन्हें आग में भूनते थे और इस प्रक्रिया में चटखने वाले बीजों को एक साथ एकत्र करके नमक के साथ खाया जाता था | आज इस को पुडिंग ,कैंडी .सूप सलाद आदि में भी इस्तमाल किया जाता है | इसके पीछे भी एक मजेदार बात है जब दूसरा विश्व युद्ध लड़ा जा रहा था तो गेहूं की कमी हो गई तब अमेरिका के ब्रेड बनाने वालों ने बेकरी की चीजों में गेहूं के आटे/ मैदे की मात्रा में २५% पोपकोर्न का मिश्रण डालना शुरू किया .तब से यह परम्परा आज भी जारी है | आज कई चीजों में इसका इस्तेमाल किया जाता है और चाव से इसको खाया जाता है | तो कैसी लगी बच्चो आपको यह आपके पोपकोर्न की कहानी |


रंजू भाटिया



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5 पाठकों का कहना है :

Seema Sachdev का कहना है कि -

majedaar popcorn ki majedaar kahaani
padh ke aa gayaa muh me paani
popcorn khaane ko man lalchaayaa
isi liye ghoomane kaa man banaayaa
jaakar majedaar popcorn khaayenge
aur bill ranju deedee ko bhijavaayenge ......:)
Ranjana ji aapki paati jo bhi padhega vo apni jeb halki karane par majboor ho jaayega |

Akshaya-mann का कहना है कि -

itni acchi jankari k liye shukriya,..........

rachana का कहना है कि -

मै सीमा जी से सहमत हूँ मेरा भी मन कुछ एसा ही हुआ था .ये बात मै कल ही लिखना चाहती थी .और हाँ इतने अच्छी जानकारी है की क्या कहें .इतना पोपकोर्न खाते है पर इस ओर सोचा ही न था .
सादर
रचना

sahil का कहना है कि -

oye ranjana ji,kamal hai.kahan se itni behatarin batein dhundh kar lati hain?laajwab
ALOK SINGH "SAHIL"

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

आहा ! क्या बात है.. पॉपकार्न की जानकारी भी एकदम पॉपकार्न जैसी ही स्वादिष्ट है.. मजा आ गया जानकर

आपकी पाती को पाती कहूँ या मालगाड़ी...

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