Friday, November 21, 2008

वीर जवान

हम हैं देश के वीर जवान,
भारत माँ पर हों बलिदान ।
हो ऐसा सौभाग्य हमारा,
ईश्वर हमको दो वरदान ।।

अड़े रहें हम, डटे रहें हम,
दुश्मन हो टकराकर चूर ।
देख हमारी हिम्मत साहस,
रहे काल भी हमसे दूर ।।

देशवासियों की सेवा में,
तत्पर हों हम वीर जवान ।
हो ऐसा सौभाग्य हमारा,
ईश्वर हमको दो वरदान ॥

हम हैं नन्हे वीर सिपाही,
धुन के पक्के, दिल मजबूत ।
जो भी आये राह हमारी,
पहुंचे वह सीधा ताबूत ॥

तन मन धन सब देश निछावर
मत डोले अपना ईमान ।
हो ऐसा सौभाग्य हमारा
ईश्वर हमको दो वरदान ॥

गीत विजय के हर पल गायें,
भारत माँ पर है अभिमान ।
मर मिटे जो देश की खातिर
युग युग तक करते सम्मान ॥

मतवाले हम वीर निराले,
अर्पित हों भारत पर प्रान ।
हो ऐसा सौभाग्य हमारा
ईश्वर हमको दो वरदान ॥

कवि कुलवंत सिंह


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4 पाठकों का कहना है :

neeti sagar का कहना है कि -

वीर रस की इस कविता के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई!बहुत अच्छी रचना!

शोभा का कहना है कि -

बहुत अच्छी वीर रस की कविता।

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

कवि जी बहुत ही सुन्दर प्यारी वीर-रस से ओत प्रोत बाल-बन्दना लिखी है..
सुन्दर अति सुन्दर

प्रवाह में है पूरी रचना.. बहुत बहुत बधाई

सीमा सचदेव का कहना है कि -

आपकी श्रेष्ठ रचनाओं मे से एक है यह कविता | जो भी पढेगा उसमे स्वाभाविक रूप से देश-प्रेम
की भावना बढेगी | बहुत-बहुत बधाई.....सीमा सचदेव

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