Thursday, November 20, 2008

गुड़िया है कितनी भली

नमस्कार बच्चो ,
आज अंतर्राष्ट्रीय बाल-दिवस है। हर वर्ष २० नवम्बर को विश्व भर मे बाल-दिवस मनाया जाता है।
आज मै सुनाती हूँ आपको एक प्यारी सी गुडिया की प्यारी सी कविता-

गुड़िया है कितनी भली

मेरी प्यारी सी गुड़िया है कितनी भली,
जैसे बगिया में कोई खिल रही हो कली
अपने पापा की खुशियों का संसार है,
और मम्मी की ममता का भंडार है

जब पापा की गोदी में जाती है वो,
उनको प्यारी सी बातें सुनाती है वो
खुद हँसती औ सब को हँसाती है वो,
मेरे आँचल में आ के चुप जाती है वो

गुस्सा पापा दिखाते हैं जब भी कभी,
मुस्कुरा के उन्हें शांत करती तभी
जीत लेती है वो प्यार से सब का मन,
अपनी बातों में कर लेती सबको मग्न

उसके हँसने में वीणा सी झंकार है,
गूँजता उससे मेरा यह संसार है
मुस्कुरा के वो खुशबू फैलाती है जब,
मम्मी-पापा उसी पे रीझ जाते हैं तब

मेरी गुड़िया स्यानी जब हो जाएगी,
पूरी दुनिया को नई राह दिखलाएगी
मम्मी-पापा के नाम को वो चमकाएगी,
अच्छे कर्मों से दुनिया में छा जाएगी

मेरी बच्ची तू हँसना-हँसाना सदा,
नाम पापा का ऊँचा ले जाना सदा
अपने पापा का तू पूरा संसार है,
उनकी आँखों में बस तेरा ही प्यार है

तेरे हँसने से खिल जाएगी हर कली,
मेरी प्यारी सी गुड़िया है कितनी भली

अंतर्राष्ट्रीय बाल-दिवस की विश्व भर के सभी बच्चो को
हार्दिक बधाई एवम शुभ-कामनाएँ......सीमा सचदेव


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4 पाठकों का कहना है :

शोभा का कहना है कि -

सीमा जी आपको और आपकी प्यारी सी गुड़िया को भी बाल दिवस की बधाई। कविता में बहुत सारी ममता और प्यार उतार लायी हैं आप।

neeti sagar का कहना है कि -

सीमा जी आपकी रचना ने मेरे दिल को छू लिया ! वाकई इसमे माँ की ममता दिखाई दे रही है!बहुत-बहुत बधाई!

neelam का कहना है कि -

मेरी गुड़िया स्यानी जब हो जाएगी,
पूरी दुनिया को नई राह दिखलाएगी
मम्मी-पापा के नाम को वो चमकाएगी,
अच्छे कर्मों से दुनिया में छा जाएगी


आज ही अपनी गुडिया को पढ़ने के लिए कहूँगी यह कविता

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

जबर्दस्त वात्सल्य झलक रहा है कविता में..

बहुत प्यारी कविता और गुडिया
बहुत बढिया बहुत बढिया...

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