Thursday, November 20, 2008

रोहिणी, दिल्ली में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन





१३ नवम्बर २००८ को (बाल-दिवस की संध्या पर) नीलम मिश्रा ने अपनी रिहायश के बच्चों के बीच एक चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें अनेक बच्चों ने भाग लिया। पुरस्कारों का वितरण १८ नवम्बर की संध्या को हिन्द-युग्मी निखिल आनंद गिरि, भूपेन्द्र राघव की उपस्थिति में श्री एस॰ के॰ शर्मा (अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ रोहिणी एक्सटेंशन) जी द्वारा किया गया।


प्रथम पुरस्कार कक्षा ७ (सचदेवा पब्लिक स्कूल, रोहिणी) की छात्रा मानसी को दिया गया। इन्होंने अपनी पेंटिंग के माध्य्म से पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है।


द्वितीय पुरस्कार कक्षा ६ (बाल भारती स्कूल, रोहिणी) की छात्रा हर्षिता नांगिया को सुंदर रंग-संयोजन और कल्पनाशीलता के लिए दिया गया।





तृतीत पुरस्कार को दो छात्रों को दिया गया। एक ५वीं कक्षा (एन॰ के॰ बगरोडिया पब्लिक स्कूल, रोहिणी) के छात्र यश पाण्डेय को और दूसरे सेंट मारग्रेट सीनियर सेकेण्डरी स्कूल, रोहिणी के छात्र केशव को।

हिन्द-युग्म बच्चों के सांस्कृतिक विकास करने और मातृभाषा के प्रति प्रेम को पल्लवित करने के लिए समय-समय पर इस तरह की कोशिश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करता रहा है।








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8 पाठकों का कहना है :

शोभा का कहना है कि -

नीलम जी ने बहुत अच्छा कार्य किया है। बच्चों के चित्र बहुत सुन्दर लगे। हिन्द युग्म को ऐसे सुन्दर आयोजन के लिए बधाई।

Seema Sachdev का कहना है कि -

नीलम जी और बाल-उद्यान को ऐसे आयोजन के लिए हार्दिक बधाई | चित्र बहुत सुन्दर लगे ,जिनमे मे बच्चो के अंदर छुपी प्रतिभा झलकती है......सीमा सचदेव

रंजना [रंजू भाटिया] का कहना है कि -

नीलम जी बहुत ही अच्छा कार्य किया है आपने बहुत अच्छा लगा यह जान कर इस तरह के आयोजन अच्छे लगते हैं .बधाई आपको इस के लिए

तपन शर्मा का कहना है कि -

नीलम जी मुझे नाराजगी है कि आपने १३ नवम्बर और १८ नवम्बर दोनों ही दिन सप्ताह के बीच में रखे जब मेरा ऑफिस होता है... शैलेश जी ने मुझे १८ को बताया पर मैं आ न सका...
आपने बहुत अच्छा कार्यक्रम आयोजित किया नीलम जी। बच्चों के चित्र देख कर तो मजा आ गया...बचपन याद आ गया.. हम भी पेड़, झरने और पहाड़ बनाया कारते थे.. :-)
अगली बार ऐसे कार्यक्रम शनिवार/रविवार को किया कीजिये...
प्लीज़....

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

कितने प्यारे बच्चे और कितने प्यारे चित्र
बच्चों में प्रतिभा छुपी एक से एक विचित्र
एक से एक विचित्र देखो जरा गोर से
हम भी उस दिन देखके इनको भाव-विभोर थे
अजब गजब हैं ये नन्हे से फनकार हमारे
मोहन सा सम्मोहन बच्चे कितने प्यारे

neelam का कहना है कि -

तपन जी अगली बार आप भी चित्र कला में भाग लेने के लिया सादर आमंत्रित हैं ,दिन रविवार का ही होगा |

sumit का कहना है कि -

चित्र बहुत अच्छे लगे
ऐसे आयोजन बच्चो के लिए बहुत अच्छे होते है और उनकी छुपी प्रतीभा को सामने लाते है

बहुत बहुत बधाई
सुमित भारद्वाज

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

ऐसे आयोजन के लिए बधाई....मुझे तो आज तक चित्र बनाना नहीं आया मगर चित्रकारों को ईनाम बांटना पड़े....सब नीलम जी की कृपा है....ख़ैर,
उनके प्रयास को सलाम...

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