Friday, November 28, 2008

नेक बनें इंसान

इक दूजे से प्यार ।
कभी न हो तकरार ।

ले हाथों में हाथ ।
कदम बढें इक साथ ।

इक आंगन के फूल ।
करें न कोई भूल ।

कभी न दो संताप ।
बढ़ता खूब प्रताप ।

पथ प्रगति हो धाम ।
करें देश का नाम ।

रखें सद्व्यवहार ।
अपना हो संसार ।

दूर रहे अभिमान ।
करें बड़ों का मान ।

सीख ज्ञान विज्ञान ।
कर्म करें महान ।

सत्य न्याय की धार ।
यही बनें हथियार ।

देश भक्ति हो राह ।
मर मिटने की चाह ।

ईश्वर दो वरदान ।
नेक बनें इंसान ।


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6 पाठकों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

kavita behad hi saral ,sahaj aur pravabhi bhi hai ,aise hi baal udyaan ko samradh karte rahiye .
nirantar aisi hi kavitaaon ki apekshaa hai aapse .hindi me type n kar paane ke liye chhama chaahti hoon

Anonymous का कहना है कि -

सरल शब्दों में सटीक बात कहना आप बहुत अच्छी तरह जानते है! अच्छी रचना बहुत-बहुत बधाई!

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

बहुत बढ़िया

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

सुन्दर.....

Kavi Kulwant का कहना है कि -

Thanks friends!

Divya Narmada का कहना है कि -

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
संजिव्सलिल.ब्लोग्स्पोय.कॉम / संजिव्सलिल.ब्लॉग.सीओ.इन
सलिल.संजीव@जीमेल.com

बना रहे हैं शीलवंत, कुलवंत सभी को
स्वर्ग बना पाएंगे हम मिल शीघ्र जमीं को.
भाईचारा हो आपस में नेह प्रेम हो
पाठ आदती कविता सबका कुशल-क्षेम हो.
साधुवाद स्वीकारें कविता मन को भाई
अच्छी कविता लिखी, सलिल की बहुत बधाई.

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