Tuesday, October 23, 2007

दुर्गा-पूजा की सैर

चलो आज हमलोग दुर्गा-पूजा के मेले में सैर करके आते हैं । नन्हीं तेजल भी अपने परिवार के साथ मेला घूमने गई थी ।

मेले में चारों ओर रोशनी थी, मानो धरती पर तारे उतर आए हैं । पेड़-पौधों पर भी रोशनी सजाई हुई थी ।

पूजा पंडालों को खूबसूरती से सजाया गया था और उनपर, खास कर प्रवेश द्वार पर हस्तशिल्प से अच्छी सजावट थी ।

दस बाँहों वाली दुर्गा माँ की बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ बनाई गई थीं जिसमें दुर्गा माँ को महिषासुर राक्षस का वध करते हुए दिखाया गया था ।



हिन्दू मिथक के अनुसार असुरों का राजा रंभ जल में रहने वाले एक भैंस से प्रेम कर बैठा और इन्हीं के योग से असुर महिषासुर का आगमन हुआ। संस्कृत में 'महिष' का अर्थ भैंस होता है। इसी वज़ह से महिषासुर इच्छानुसार जब चाहे भैंस और जब चाहे मनुष्य का रुप धारण कर सकता था। महिषासुर सृष्टिकर्ता ब्रम्हा का महान भक्त था और उनका वरदान था कि कोई भी देवता या दानव उसपर विजय प्राप्त नहीं कर सकता।

महिषासुर बाद में स्वर्ग लोक के देवताओं को परेशान करने लगा और पृथ्वी पर भी उत्पात मचाने लगा । उसने स्वर्ग पर भी कब्ज़ा कर लिया । सारे देवता मिलकर उसे परास्त करने के लिए युद्ध करते परंतु वे हार जाते ।

कोई उपाय न पाकर देवताओं ने उसके विनाश के लिए दुर्गा का सृजन किया जिसे 'शक्ति' और 'पार्वती' के नाम से भी जाना जाता है । देवी दुर्गा ने महिषासुर पर आक्रमण कर उससे नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया । इसी उपलक्ष्य में हिंदू भक्तगण दस दिनों का त्यौहार 'दुर्गा पूजा' मनाते हैं और दसवें दिन को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है जो अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है ।

सुबह-शाम दुर्गा जी की आरती की जाती है और ढ़ोल तथा 'ढ़ाक' बजाए जाते हैं और बजाते हुए लोग नाचते-झूमते भी हैं ।


तेजल ने भी अपने नानाजी के कंधे पर बैठकर आरती देखा :) ।

और उसके बाद बाहर मेले में झूलों और खेल का और बच्चों के साथ आनंद भी उठाया और खिलौने भी खरीदे ।

चित्र : सीमा कुमार


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8 पाठकों का कहना है :

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

सीमा जी,

यह तो पता चल रहा है कि तेजल नें दुर्गा-पूजा का भरपूर आनंद लिया :) वैसे भी त्योहार तो बच्चों के लिये ही होते हैं।

दुर्गा-पूजा से संदर्भित जानकारी भी उत्कृष्ट है। तस्वीरें बहुत अच्छी हैं।

*** राजीव रंजन प्रसाद

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

सीमा जी,

तेजल के साथ हमने भी दूर्गापूजा और सैर का आन्नद ले लिये... धन्यवाद...

रंजू का कहना है कि -

तेजल ने दुर्गा पूजा में खूब मजे किए हैं :)
बहुत अच्छे लगे चित्र .तेजल को स्नेह :)

tanha kavi का कहना है कि -

बहुत खूबसूरत चित्र हैं सीमा जी। दूर्गापूजा का फिर से आनन्द दिलाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

-विश्व दीपक 'तन्हा'

Udan Tashtari का कहना है कि -

बढ़िया रहा तेजल के साथ घूमना मेले में. :)

रचना सागर का कहना है कि -

सीमा जी,

यात्रा की नई कडी मे आपकी तसवीरो ने चार चाँद लगा दिये।
दुर्गा-पूजा से संदर्भित जानकारी भी उत्कृष्ट है।

आपको और तेजल सहित सभी परिवार को दुर्गा-पूजा की बहुत बहुत बधाई..

सजीव सारथी का कहना है कि -

तेजल को ढेर सारा प्यार और सीमा जी अपनी खुशिओं मी बाल उधान परिवार को सहभागी बनाने का धन्येवाद

Anonymous का कहना है कि -

main jamshedpur ka niwasi hoon or mujhe yahan ka durga puja bhut hi aacha laga . main west singhbhum se yahan per study karne aaya hoon , main ne yahan per 2007 or 2008 ka puja dekha to mujhe bhut aacha laga , yahan per kafi jagha per durga puja pandal banaya jata hai or kafi aachi aachi murtiyaan banaya jati hai, jahaan tak mere ray ke bath hai is saal ka mujhe golmuri ka sabse aacha ,wahaan ki murti kafi sunder thi or pandal bhi kafi aachi thi . yahaan per competition hota hai is saal na jane kahan ka pandal or murti ko first prize melega . yahaan per khas kar burma mines per mela bhi lagta hai , isi karan yahaan per bhut hi bhir hote hai phir bhi yahaan burma mines ka pandal bhi kafi aacha tha
main RAM hoon.

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