Saturday, October 6, 2007

मेरे इम्तिहान

प्यारे दोस्तो मै बहुत परेशान हूँ परसों से मेरे इम्तिहान है और मम्मी डैडी ने मुझे कम्पूटर से दूर रहने को कहा है मगर मै चुपके से अपनी कविता पोस्ट कर रहा हूँ मम्मी मारेगी तो नही मगर आज डाँट जरूर पड़ेगी



पढ़ो-पढ़ो रोज पढ़ो ने,
कर डाला मुझको परेशान
गाय जैसे सिंग लगा कर
सिर पर आये इम्तिहान

देखो बेचारी बॉल भी
कैसे लुड़क रही है मेरे बिन
मम्मी डैडी भी प्ले टाईम
देते है मिनिट गिन-गिन

बच्चों को भी समझे कोई
हमको कुछ तो बनना है
लेकिन सारा दिन पढ़ पढ़ कर
दिमाग खराब नही करना है

मम्मी डैडी बच्चो के
इतना ना बांधो बच्चो को
विश्वास भी करो बच्चो पर
करने दो उनको जो करना है

अगर सारा दिन पढ पढ़ कर
दिमाग रहेगा परेशान
तो बोलो बच्चे कैसे देंगे
इतना मुस्किल इम्तिहान

अक्षय चोटिया



आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

11 पाठकों का कहना है :

रितु रंजन का कहना है कि -

अरे वाह अक्षय बेटा कविता तो आप बहुत अच्छी लिखते हैं, आपकी मम्मी से मेरी पूरी सिफारिश है कि आपको डांट भी न पडे, जिनका बेटा इतना प्रतिभावान है उस पर तो हर माता-पिता को गर्व होगा। हाँ आपको आपकी परीक्षाओं की शुभ-कामनायें।


- रितु

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

अक्षय जी
,

आपकी कविताओं का सबसे अधिक इंतज़ार तो मुझे रहता है। "बच्चे मन के सच्चे" यही सादगी आपकी इस कविता में दिख रही है। आपकी सोच बताती है कि जीवन पथ पर आप बहुत आगे जायेंगे और इसके साथ ही साथ परीक्षा की आपको बहुत शुभकामनायें। एक राज की बात:- जब मैं छोटा था तब परीक्षा के दिनों में कवितायें लिखने के लिये मैंने भी अपनी मम्मी से बहुत मार खाई है :)


हार्दिक शुभकामनायें।


*** राजीव रंजन प्रसाद

sunita (shanoo) का कहना है कि -

अक्षय जी शुक्रिया चुपके-चुपके लिखने का वैसे यदि आप मम्मी को दे देते तो भी पोस्ट हो ही जाती...मगर मै आपको यही कहना चाहती हूँ और सभी बच्चों को भी कि माता-पिता हमेशा आपके भले के बारे में ही सोचते है...आपने लगता है बाल-उद्यान को बाल अदालत बना लिया है...अच्छा है यहाँ तो सभी आप का ही साथ देंगे...

वैसे अच्छा लिखा है आपने एसे ही पढ़ाई भी किजिये यही शुभ-कामना है...

सुनीता(शानू)

सुनील डोगरा ज़ालिम का कहना है कि -

अरे जनाब। परीक्षा से डरीय नहीं। ऎसा सोचिए कि आप परीक्षा देने नहीं लेने जर रहें हैं। बस हो जाएगा। रही बात कविता की तो वह बहुत ही सुन्दर है।

रंजू का कहना है कि -

वाह!! बहुत सुंदर अक्षय जी :)
एक ऐसी कहानी मैंने भी लिखी है
जल्दी ही आपको पढने को मिलेगी :)
खूब पढो और परीक्षा से कभी मत डरो:)
शुभकामना के साथ

रंजना

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

सही बात है भई, दिमाग को परेशान करने की जरूरत नहीं है। यह समय तो बधाई लेने का है। इस प्यारी सी कविता की बहुत बहुत बधाई।

रचना सागर का कहना है कि -

अक्षय....
बहुत अच्छी कविता...
बच्चो को चिंता करना नही चाहिये...
पर बड़ो का कहना भी मानना चाहिये।

सजीव सारथी का कहना है कि -

अक्षय बेटा परीक्षाओं के लिए शुभ कामनाएं

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

अक्षय जी,

आपकी हर पोस्ट मुझे प्रभावित करती है। शत प्रतिशत निर्दोष कविता पढ़ने को मिलती है।

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

अक्षय बेटा

बहुत सुन्दर लिखा है आपने... मां और पिता जी की डांट को प्रसाद की तरह समझना चाहिये क्योंकि उससे कुछ हानि नहीं होती कुछ न कुछ अच्छा ही होता है.... लिखते रहिये

Gita pandit का कहना है कि -

अक्षय बेटा !

परीक्षाओं के लिए शुभ कामनाएं....

कविता बहुत अच्छी हैं |

बधाई।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)