मेरे इम्तिहान
प्यारे दोस्तो मै बहुत परेशान हूँ परसों से मेरे इम्तिहान है और मम्मी डैडी ने मुझे कम्पूटर से दूर रहने को कहा है मगर मै चुपके से अपनी कविता पोस्ट कर रहा हूँ मम्मी मारेगी तो नही मगर आज डाँट जरूर पड़ेगी
पढ़ो-पढ़ो रोज पढ़ो ने,
कर डाला मुझको परेशान
गाय जैसे सिंग लगा कर
सिर पर आये इम्तिहान
देखो बेचारी बॉल भी
कैसे लुड़क रही है मेरे बिन
मम्मी डैडी भी प्ले टाईम
देते है मिनिट गिन-गिन
बच्चों को भी समझे कोई
हमको कुछ तो बनना है
लेकिन सारा दिन पढ़ पढ़ कर
दिमाग खराब नही करना है
मम्मी डैडी बच्चो के
इतना ना बांधो बच्चो को
विश्वास भी करो बच्चो पर
करने दो उनको जो करना है
अगर सारा दिन पढ पढ़ कर
दिमाग रहेगा परेशान
तो बोलो बच्चे कैसे देंगे
इतना मुस्किल इम्तिहान
अक्षय चोटिया

आपको ककड़ी-खाना पसंद है ना! पढ़िए शन्नो आंटी की कविता
सर्दी का मौसम शुरू होने वाला है। इस मौसम में हम क्या भूत भी ठिठुरने लगते हैं।
क्या आपने कभी सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की सैर की है? क्या कहा?- नहीं?
कोई बात नहीं, चलिए हम लेकर चलते हैं।
क्या आप जानते हैं- लिखने से आँखें जल्दी नहीं थकती, पढ़ने से थक जाती हैं क्यों?
अपने मिसाइल मैन अब्दुल कलाम के बारे में रोचक बातें जानना चाहेंगे? बहुत आसान है। क्लिक कीजिए।
तस्वीरों में देखिए कि रोहिणी, नई दिल्ली के बच्चों ने गणतंत्र दिवस कैसे मनाया।
आपने बंदर और मगरमच्छ की कहानी सुनी होगी? क्या बोला! आपकी मम्मी ने नहीं सुनाई। कोई प्रॉब्लम नहीं। सीमा आंटी सुना रही हैं, वो भी कविता के रूप में।
एक बार क्या हुआ कि जंगल में एक बंदर ने दुकान खोली। क्या सोच रहे हैं? यही ना कि बंदर ने क्या-क्या बेचा होगा, कैसे-कैसे ग्राहक आये होंगे! हम भी यही सोच रहे हैं।
पहेलियों के साथ दिमागी कसरत करने का मन है? अरे वाह! आप तो बहुत बहुत बहादुर बच्चे निकले। ठीक है फिर बूझिए हमारी पहेलियाँ।
बच्चो,
मातृ दिवस (मदर्स डे) के अवसर हम आपके लिए लेकर आये हैं एक पिटारा, जिसमें माँ से जुड़ी कहानियाँ हैं, कविताएँ हैं, पेंटिंग हैं, और बहुत कुछ-
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12 पाठकों का कहना है :
अरे वाह अक्षय बेटा कविता तो आप बहुत अच्छी लिखते हैं, आपकी मम्मी से मेरी पूरी सिफारिश है कि आपको डांट भी न पडे, जिनका बेटा इतना प्रतिभावान है उस पर तो हर माता-पिता को गर्व होगा। हाँ आपको आपकी परीक्षाओं की शुभ-कामनायें।
- रितु
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अक्षय जी
,
आपकी कविताओं का सबसे अधिक इंतज़ार तो मुझे रहता है। "बच्चे मन के सच्चे" यही सादगी आपकी इस कविता में दिख रही है। आपकी सोच बताती है कि जीवन पथ पर आप बहुत आगे जायेंगे और इसके साथ ही साथ परीक्षा की आपको बहुत शुभकामनायें। एक राज की बात:- जब मैं छोटा था तब परीक्षा के दिनों में कवितायें लिखने के लिये मैंने भी अपनी मम्मी से बहुत मार खाई है :)
हार्दिक शुभकामनायें।
*** राजीव रंजन प्रसाद
अक्षय जी शुक्रिया चुपके-चुपके लिखने का वैसे यदि आप मम्मी को दे देते तो भी पोस्ट हो ही जाती...मगर मै आपको यही कहना चाहती हूँ और सभी बच्चों को भी कि माता-पिता हमेशा आपके भले के बारे में ही सोचते है...आपने लगता है बाल-उद्यान को बाल अदालत बना लिया है...अच्छा है यहाँ तो सभी आप का ही साथ देंगे...
वैसे अच्छा लिखा है आपने एसे ही पढ़ाई भी किजिये यही शुभ-कामना है...
सुनीता(शानू)
अरे जनाब। परीक्षा से डरीय नहीं। ऎसा सोचिए कि आप परीक्षा देने नहीं लेने जर रहें हैं। बस हो जाएगा। रही बात कविता की तो वह बहुत ही सुन्दर है।
वाह!! बहुत सुंदर अक्षय जी :)
एक ऐसी कहानी मैंने भी लिखी है
जल्दी ही आपको पढने को मिलेगी :)
खूब पढो और परीक्षा से कभी मत डरो:)
शुभकामना के साथ
रंजना
सही बात है भई, दिमाग को परेशान करने की जरूरत नहीं है। यह समय तो बधाई लेने का है। इस प्यारी सी कविता की बहुत बहुत बधाई।
अक्षय....
बहुत अच्छी कविता...
बच्चो को चिंता करना नही चाहिये...
पर बड़ो का कहना भी मानना चाहिये।
अक्षय बेटा परीक्षाओं के लिए शुभ कामनाएं
अक्षय जी,
आपकी हर पोस्ट मुझे प्रभावित करती है। शत प्रतिशत निर्दोष कविता पढ़ने को मिलती है।
अक्षय बेटा
बहुत सुन्दर लिखा है आपने... मां और पिता जी की डांट को प्रसाद की तरह समझना चाहिये क्योंकि उससे कुछ हानि नहीं होती कुछ न कुछ अच्छा ही होता है.... लिखते रहिये
अक्षय बेटा !
परीक्षाओं के लिए शुभ कामनाएं....
कविता बहुत अच्छी हैं |
बधाई।
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