Monday, February 23, 2009

महा-शिवरात्रि पर्व-कथा-काव्य

नमस्कार प्यारे बच्चो ,
आपको यह तो पता ही होगा कि आज महा-शिवरात्रि पर्व है और इस दिन लोग व्रत करते हैं , शिवालयों मे खूब पूजा होती है ,रात्रि जागरण होते हैं और सारा वातावरण शिव भक्ति से गूँज उठता है पर क्या आपको पता है कि शिवरात्रि का त्योहार इतनी धूम-धाम और श्रद्धा से क्यों मनाया जाता है इसके साथ बहुत सी कहानियां जुडी हैं पर मुख्य रूप से इसको शिव-पार्वती के विवाह के साथ जोडा जाता है यह त्योहार फाल्गुन मास की अमावस्या से एक दिन पहले मनाया जाता है बाकी सब कहानियां भी मै आपको समय मिलते ही सुनाऊंगी , आज सुनो शिव-पार्वती के विवाह की कहानी

महा-शिवरात्रि पर्व-कथा-काव्य

महा-शिवरात्रि आया
सब जन गन का मन हर्षाया
शिव रात्रि की सुनो कहनी
कथा बडी ही जानी मानी
शिवशंकर ने ब्याह रचाया
पार्वती को फिर अपनाया
त्याग दिया था जिसे स्वयं
लिया था फिर से उसने जन्म
एक बार की है यह बात
पार्वती-शिव घूमे साथ
दोनों इक जंगल में आए
राम-लखन जहां घूमते पाए
कर रहे सीता की तलाश
देखा शिव ने राम हताश
चुपचाप ही सर झुकाया
आगे का मार्ग अपनाया
पार्वती को आया क्रोध
करने लगी वो शिव का विरोध
हैं वो तो साधारण जन
और हो तुम स्वयं भग्वन्
फिर क्यों तुमने सर झुकाया
स्वयं को छोटा क्यों बनाया
राम प्रभु हैं बोले शंकर
इसीलिए तो झुकाया सर
जो न मेरा हो विश्वास
देख लो जाकर उनके पास
आया पार्वती को विचार
लिया रूप सीता का धार
आ गई वो श्री राम के पास
देख के हो गए राम उदास
बोले माँ तुम क्यों अकेली
बुझा रही क्या कोई पहेली
कहां हैं भग्वन भोले नाथ
आए नहीं क्यों तेरे साथ
सुनकर पार्वती ने जाना
नारायण श्री राम को माना
पर शिव जी को गुस्सा आया
रूप सिया का क्यों बनाया
सीता तो है मेरी माता
अब न मेरा तुझसे नाता
ऐसे पार्वती को त्यागा
तोड दिया बंधन का धागा
पार्वती यह न सह पाई
एक बार माँ के घर में आई
यज्ञ पिता ने घर में रचाया
पर शिवजी को नही बुलाया
हुआ था शिवजी का अपमान
दे दी पार्वती ने जान
जल कर वो सती कहलाई
अगले जन्म में फिर से आई
की बडी ही शिव की पूजा
नहीं चाहिए वर कोई दूजा
शिव शंकर संग ब्याह रचाया
शिव पत्नी का दर्जा पाया
आई फिर सुखों की दात्रि
होती है उस दिन शिवरात्रि

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महा-शिवरात्रि की आप सबको बधाई एवम शुभकामनाएं- सीमा सचदेव


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10 पाठकों का कहना है :

नटवर सिंह राठौड़ का कहना है कि -

बहुत बढ़िया, आपको तथा आपके पूरे परिवार को मेरी तरफ़ से शुभ शिवरात्रि !

Udan Tashtari का कहना है कि -

महा शिव रात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र का कहना है कि -

महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामना

शोभा का कहना है कि -

सीमा जी,
शिवरात्री की काव्यमय कथा बहुत सुन्दर बनी है। अपनी सांस्कृतिक धरोहर एवं धर्म को बच्चों तक आप बहुत सुन्दर रूप में पहुँचा रही हैं। आभार।

pooja का कहना है कि -

सीमा जी,

शिवरात्रि की कहानी बहुत ही जानकारी लिए है, आपने इसे कविता के रूप में बहुत ही सरल भाषा में हमारे लिए प्रस्तुत किया है, धन्यवाद.

महाशिवरात्रि की आपको भी बहुत बहुत बधाई.
पूजा अनिल

संगीता पुरी का कहना है कि -

बहुत सुंदर रचना..महा शिव रात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं..

vinay k joshi का कहना है कि -

सीमाजी,
बहुत ही सरल भाषा में कहानी बताई |
आने वाली पीढी को सास्कृतिक, पौराणिक धरोहर सौपना बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है |
नीलम जी,
मै नित्य ही बाल उद्यान पर विचरण करता हूँ | जब भी मन उद्विग्न होता है,
कोई नई या पुरानी रचना पढ़ लेता हूँ | यहाँ की पवित्रता से मन को शांति मिलती है |
यह बाल उद्यान नहीं, बाल मंदिर है |
सादर,
विनय के जोशी

manu का कहना है कि -

जी,
एक तो ठिकाना है ही यहाँ पर के इन्सान को सुकून मिलता है.....विनय जी, लगता है के बच्चा बनकर रहना ही सही ख़ुशी दे सकता है...युग्म ने ये एक ऐसी दुनिया बसा रखी है....जहा पर आने के बाद निकलना आसान नहीं है... शिवरात्री की कथा के साथ सब को शिवरात्री की बधाई..

neelam का कहना है कि -

विनय जी ,
बहुत दिनों से आपकी बाल उद्यान पर राह देख रही थी ,आप भी इस मंदिर
में अपने सृजन के कुछ पुष्प अर्पित करें ,तो कुछ अच्छे मूल्य ,संस्कार मिलेंगे अपने इन नौनिहालों को
मनु जी आपसे भी यही दरख्वास्त है

rachana का कहना है कि -

सीमा जी
आप से ये कहानी लिखने की कला तो सीखनी है कभी अवश्य ही सीखेंगे .मै तो सदा कहती हूँ आप बहुत अच्छा लिखती है चाहे बात बड़ों की हो या बच्चों की .
रचना

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