Friday, February 20, 2009

मीठी बोली


बोली में रस घोलना
सदा मधुर है बोलना
तोल मोल के बोलना
दिल के धागे खोलना
गांठ में बात बांध लो
बात न लौटे जान लो
मीठी वाणी फूल है
गुस्सा करना भूल है
सच इसका आधार है
प्रेम वचन शृंगार है
बोलो सबका हो भला
कर सके न कोई गिला
झूठ वचन इनकार हो
सच्चाई से प्यार हो
झूठ दुखों का मूल है
दिल में चुभता शूल है
कड़वा कभी न बोलना
बात को पहले तोलना
बोली है आराधना
सरस्वती की साधना
मीठी बोली सीख लो
लोगों के दिल जीत लो
कवि कुलवंत सिंह



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5 पाठकों का कहना है :

सौरभ शर्मा का कहना है कि -

बहुत सही लिखा है आपने ...

परमजीत बाली का कहना है कि -

शिक्षाप्रद रचना।बधाई।

शोभा का कहना है कि -

बोली है आराधना
सरस्वती की साधना
मीठी बोली सीख लो
लोगों के दिल जीत लो
सही बात लिखी है।

neelam का कहना है कि -

झूठ वचन इनकार हो
सच्चाई से प्यार हो
झूठ दुखों का मूल है
दिल में चुभता शूल है
कड़वा कभी न बोलना

bahut hi umda rachna hai ,bahut achchi aur sachchi seekh di hai aapne kavita ke maadhyam se

kavi kulwant का कहना है कि -

much dear friends.. for your lovely words.. since I was out of station.. so requested ranjana ji to post.. Thanks to Ranjana ji..

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