Saturday, May 2, 2009

आपकी चिर प्रतीक्षित पहेलियाँ

पहेलियों की कक्षा में आप सभी का स्वागत है ,जल्दी से जवाब दीजिये और बन जाईये पहलवान (दिमागी कुश्ती के )पहेलियाँ हमेशा की ही तरह सरल ही हैं ,बस थोड़ा सा अपने दिमाग को कसरत करवाईये और कूद जाईये ,पहेलियों के इस अखाडे में और देखे अबकी बार कौन सा महारथी सारे हल देता है ,पहेली से पहले जरा उन लोगों को याद करना चाहूंगी ,जो सबसे होनहार विद्यार्थी रह्चुके हैं ,मगर आजकल नजर नही आते ,आप लोगों से गुजारिश है कि अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते रहें ,ताकि कक्षा का स्तर बना रहे


१)वन फरे,वनगुल्ला फरे ,
फरे पच्चीसों डाल
चील -कौआ नाहिं चखे ,
मानुष मुंह में डाल

२) बाल नुचे ,कपडे फटे ,
मोती को लिया उतार
यह विपदा जो देत है ,
सजा न पाए यार


३)मखमल की थैली में ,
हाय -हाय के बीज


४)बच्चो मै हूँ ऐसा नर ,
मेरे धड में मेरा सर


५)बिन पानी रूप न ले ,
पानी से गल जाए ,
आग लगाकर फूंक दे ,
अजर -अमर हो जाय


शन्नो बेटा एक पहेली सिर्फ तुम्हारे मनमौजी प्रतिभागी के लिए है ,उससे कहो की उसे सिर्फ एक पहेली का उत्तर देना और उसके बाद शांत बैठना है ,अब वो हल्ला न मचाये इसकी जिम्मेदारी तुम्हारे नाजुक कन्धों पर ही है ,संभालो तुम

पीटो-पीटो चिल्लाओ ,
जब उलट देत हैं मुझको
सर चढी बनी रहूँ
धूप से बचाऊँ तुझको

हहहहहाहहहहहहहह्हाह

इहिहिहिहीह्हिहिहिहिहिहिहीह्हिहिहिहिही

हुहुहुहुहुहुहुहुहुह्हूहुहुहुह

कृपया हिंदी में हसिये , इसी क्रम में हसिये

लय और ताल भी बनाईये

सबसे अच्छी लय और ताल बनाने वाले को एक और हसी का इनाम मिलेगा

आप सभी का साप्ताहांत अच्छा हो ,इसी दुआ के साथ हम विदा लेते है ,फिर मिलेंगे सोमवार को तब तक ,

खुदा हाफिज





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16 पाठकों का कहना है :

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

apnee to ye aadat hai ki hm kuchh naheen kahte...

neelam का कहना है कि -

aacharya ji ,
magar apni to aadat hai ki hum chup nahi rahte .

kahiye ,bebaaki se kahiye ,aur paheliyon ke uttar dete hue kahiye .

shanno का कहना है कि -

जय सियाराम!
पहेलियों की एक और नयी पोटली आ गयी है, जो आप सबको खोलकर देखनी है और बताना है कि उसमें क्या है.
तो फिर आ जाइये आप सब लोग पहेली के अखाड़े में कुश्ती लड़ने. मेरा मतलब दिमागी कुश्ती से है. किसी तरह का कनफूजन ना हो सके आप लोगों को इसीलिए अर्थ समझा रही हूँ, कि कहीं ऐसा न हो कि आप लोग अपनी-अपनी आस्तीन चढ़ाकर कूद पड़ें अखाड़े में लड़ने को और फिर सिचुएशन संभालनी मुश्किल हो जाये. और फिर साथ में कहीं अपनी भी कुर्सी धंस जाए जमीन में. एक बात और है, वह यह कि जैसा नीलम जी ने कहा है कि आप लोग हंसिये हिंदी में तो शायद वह और भी खुश होंगीं यदि आप लोग बात करने में, हंसने में और लड़ने में भी हिंदी का प्रयोग ही करें. जो लोग चकमा देने में उस्ताद हैं वह भी कान खोलकर सुन लें यह बात. और वह बिद्यार्थी भी जो कहता है कि उसे कुछ नहीं बोलना और नीलम जी के कहने पर भी हिंदी की वजाय अंग्रेजी में हिंदी बोलकर चला गया. खैर समय आने पर वह उन महाशय से भी निपट लेगीं, क्योंकि मुझे कुछ लिमिटेड पावर्स ही मिली हैं. जो मैं कह रही हूँ वह शायद आप सब समझ रहे होंगें.

सुमीत को ढूंढ-ढूंढ कर सब हो गए हैं पस्त
स्वन्दर्शी रहते हैं सपनो की दुनिया में मस्त
घपलेबाजी को देखकर मेरी बुद्धि हो गयी नष्ट
अंग्रेजी में हिंदी बोल कुछ बालक देते हैं कष्ट
अब सुमीत जी कहाँ छुपे हो कक्षा तुम्हें पुकारे
नीलम जी के दो नयना तुम्हें ढूंढ-ढूंढ कर हारे
कहती हैं 'अरे मेरा प्यारा सुमीत कहाँ गया रे
अभी-अभी यहीं था अब तू कहाँ को गया रे'
गुरु बिन संघर्ष करें हम सब कितने हैं लाचार
चुरा ले गया कोई डंडा अब ना खाता कोई मार
अनुशासन बिन बिगड़ रही है यह कक्षा ही सारी
घेर के लाती हूँ सबको कोई जाने न पीर हमारी
अपनी-अपनी जगह पर बैठो न करो कोई बहाना
उत्तर देकर कॉपी दे दो तब ही टॉयलेट को जाना.

ओ. के. अब अपने दिमाग के पुर्जे कस लो अच्छी तरह से और पहेलियों पर ध्यान दो.
और वह टोपी वाले जनाब भी अपनी ख़ास पहेली को सुलझाने की कोशिश करें. अधिक चकर-मकर ना करे कोई भी. बस कुछ देर के लिए मैं बाहर हो कर आती हूँ.

'मैं चली, मैं चली, मैं चली.. यह ना जानूं कहाँ
लौट के वापस मुझे फिर आना ही होगा यहाँ.'

कक्षा-मोनीटर

shanno का कहना है कि -

अब हम आयि गये हैं वापस साथिओं.
लेकिन आप सबका अब तक कोई चिन्ह नहीं दीखता यहाँ पर. हमसे का सब लोग लुका-छिपी का खेल खेलना चाहते हो या फिर तुम सब नंबर एक के कामचोर हो इसलिए अब तक कक्षा में नहीं पधारे. इस कक्षा को खोलने का फिर का फायदा हुआ, बताओ? तुम सबके दिमाग पैने करने के वास्ते ही इस कक्षा का निर्माण नीलम जी के कोमल हाथों से हुआ था और उन्होंने बड़ी-बड़ी उम्मीदें लगा रक्खी थीं जो अब ढहती हुई सी दिखि रही हैं भैया. आसार कुछ अच्छे नाहीं लगि रहे हैं हमका तो. जब विद्यार्थी ही लापता होंगें तो फिर तो यहाँ ताला डाल दिया जायेगा. नीती भी अब तक फुर्र से उड़ के नहीं आ पायी हैं. क्या मामला है बड़े-छोटे कोई भी बालक आने का नाम नहीं ले रहे हैं? एक पप्पू नाम का रूठा हुआ बालक है वह भी नहीं आया जो कक्षा में आकर नाराज़ होकर फ़ौरन चला गया और नीलम जी मनाने के लिए भागीं उस बालक के पीछे. जिसे नीलम जी अच्छी तरह से जानती हैं. कुछ नक़ल-टीपू भी हैं, टोपी पहनने वाले लोग वह भी गायब हैं. नीलम जी की नहीं तो भैया हमरी ही लाज रक्खो. वर्ना फिर हम लालू भैया से कहकर शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज करवाने की सोच रहे हैं. देखो फिर वह लोग क्या करेंगे तुम बच्चों के संग. हालाँकि लालू भैया रेल मंत्री हैं पर उनकी पहुँच तो शिक्षा विभाग में भी होगी.

neelam का कहना है कि -

paheliyaan kuch kathin lag rahi hain .thodi madad karni padegi

1)badi hi kathor cheej hai ,ek visesh varg bade hi chaav se khaata hai ise .

2)ye bhi khaane waali cheej hai ,garib aur amir dono ko hi priy hai ,ameer vishisht tarike se pakwa kar khaate hain ise .

3)jise khaate hi haay haay karne lagte hain sabhi .

4)chalta hoon par dheere here

5)mitti se banti hai wo cheej

shanno का कहना है कि -

चलो बली का बकरा मैं ही बनती हूँ पहले. मैं ही कूदती हूँ अखाड़े में सब से पहले.तो लीजिये:

१. कटहल
२. भुट्टा
३. हरी मिर्च
४. कछुआ
५. दिया (मिटटी का दिया)

मैं फिर सही हूँ ना, नीलम जी? और वो आखिर का ख़ास सवाल आपके कहने पर टोपी वाले हजरत के लिए छोड़ दिया है मैंने. और लोग भी ऐसा करके रहम करें उस बन्दे पर, कृपया. पप्पू तो शायद यह पहेलियाँ देखकर चकरा गये होंगें.

स्वपनदर्शी का कहना है कि -

नीलम जी, आपका बहुत बहुत शुक्रिया आज हम आपकी मदद के बिना शायद पहेलियों के उत्तर नहीं दे पाते.... लकिन अभी भी कुछ असमंजस में है..... हमें अभी तक जो उत्तर आ गए है उन्ही का उत्तर दे देते है.....हमारे उत्तर है.....
१ .......
२ भुट्टा
३ लाल / हरी मिर्च
४ कछुआ
५ कुम्हार के बर्तन( मटका, सुराई, ईट)
जब हमे १ पहेली का उत्तर ज्ञात हो जाएगा तब हम एक बार फिर कक्षा में उपस्थित हो जायेगे.... तब तक के लिए हमारे सभी सहपाठियों से विदा लेते है... शुभ रात्रि........

स्वपनदर्शी का कहना है कि -

नीलम जी, आपका बहुत बहुत शुक्रिया आज हम आपकी मदद के बिना शायद पहेलियों के उत्तर नहीं दे पाते.... लकिन अभी भी कुछ असमंजस में है..... हमें अभी तक जो उत्तर आ गए है उन्ही का उत्तर दे देते है.....हमारे उत्तर है.....
१ .......
२ भुट्टा
३ लाल / हरी मिर्च
४ कछुआ
५ कुम्हार के बर्तन( मटका, सुराई, ईट)
जब हमे १ पहेली का उत्तर ज्ञात हो जाएगा तब हम एक बार फिर कक्षा में उपस्थित हो जायेगे.... तब तक के लिए हमारे सभी सहपाठियों से विदा लेते है... शुभ रात्रि........

shanno का कहना है कि -

नक़ल, नक़ल, नक़ल पकड़ लिया मैंने. अरे देखो किसी ने मेरी नक़ल कर ली. नाम नहीं बताउंगी वर्ना पंगा लेना पड़ेगा. मुझे डर लगता है. पहले नारियल लिखा था फिर झट से भुट्टा कर दिया. नीलम जी, न्याय करियेगा.

rachana का कहना है कि -

नीलम जी आप के हिन्ट ने सहायता की पर १ का उत्तर अभी भी नहीं आया

२भुट्टा
३ मिर्ची
४ कछुआ
५ कुम्हार द्वारा बना कोई भी बर्तन जैसे दिया ,घडा आदि
पता नहीं कितना सही है
हाँ हम हिंदी में ही हस रहें है
रचना

manu का कहना है कि -

छतरी,,,,
,,,,






,,,या कहीं टोपी तो नहीं,,,,?????

sumit का कहना है कि -

अभी तो मै सिर्फ अंतिम पहेली का जवाब दे रहा हूँ, बाकि के जवाब ब्रेक के बाद

पीटो-पीटो चिल्लाओ ,
जब उलट देत हैं मुझको
सर चढी बनी रहूँ
धूप से बचाऊँ तुझको

उत्तर- टोपी

shanno का कहना है कि -

मनु जी, यही उत्तर मैंने भी आपके लिए सोचे थे. लगता है आपके दिमाग में telepathic कनेक्शन है. लेकिन कृपया सवाल करने की वजाय उत्तर देने की कोशिश करें तभी नंबर भी उत्तम पायेंगें.

sumit का कहना है कि -

बहुत ही मुशकिल पहेलिया है इस बार

४ काँकरच
५ कपूर(मुझे पता नही ये पानी से बनता है या नही, पर आग मे जलता बहुत जल्दी है

sumit का कहना है कि -

नीलम दीदी की मदद के बाद
२ भुट्टा
३ मिर्च

मानिटर जी हमे आने मे ठोडी देरी हुई पर हम कक्षा मे आए जरूर है, तपन भैया अभी तक नही आए उनकी शिकायत नीलम दीदी से करना

shanno का कहना है कि -

सुमीत जी, बहुत ख़ुशी हुई कि आज कक्षा में आप प्रकट हुए. तपन जी, स्वन्दर्शी जी, अरे हाँ, चौहान जी का नाम भूले-भटके में कहना भूल गयी, नीति जी रचना जी आदि लोग फिर चकमा देने की सोच रहे हैं. और आजकल मनु जी बहुत ही अच्छे बच्चे बनने की कोशिश में लगे हैं, क्या? किधर से भी ही..ही..हा..हा की आवाजें नहीं आ रही हैं. या फिर लगता है कि मेरे कानो में तेल की जरूरत है. कितने लोग लगता है इधर का रास्ता ही भूल गए हैं. खैर आपकी जब मर्जी हो आकर हाजिरी लगायें पहेली की महफ़िल में. कक्षा के दरवाज़े दिन-रात खुले रहते हैं. पहेलियाँ सुलझाके सबका मन खुश हो जाता है.

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