Friday, May 1, 2009

सुनो सुनो

सब आओ
बात सुनो
होठों पर
प्रीत गुनो

यह मेरा
वह तेरा
यह पचड़ा
छोड़ जरा

भूलो दुख
बांटो सुख
दीन से न
मोड़ो मुख

तूँ छोटा
मैं खोटा
बिन पेंदी
सब लोटा

अंतर्मन
झांको तुम
सत्य प्रेम
बांटो तुम

न यह बड़ा
न वह बड़ा
इस जग में
काल बड़ा

फूल खिला
हाथ मिला
हर मुख पर
हंसी सजा

गले लगा
प्यार जगा
सबके दुख
दूर भगा

सुनो सुनो
बात सुनो
प्रीत प्रेम
सभी चुनो

कवि कुलवंत सिंह


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6 पाठकों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

suno suno
kulwant uncle ki
pyaari si kavita suno
hume to bahut hi achchi lagi ab aap bataao .

sumit का कहना है कि -

अच्छी कविता है कुलवंत जी

सभी पंक्तिया बच्चो के लिए शिक्षाप्रद है

shanno का कहना है कि -

कुलवंत जी,
मुझे भी बहुत ही अच्छी लगी आपकी कविता. धन्यबाद.

ना तू छोटा
ना मैं छोटा
बिन पेंदी
सब लोटा
क्या बात कही आपने!

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

बहुत दिनों के बाद एक अच्छा बाल-गीत मिला...साधुवाद.

manu का कहना है कि -

सुंदर गीत कुलवंत जी,,,
बच्चों के लिए,,,

Kavi Kulwant का कहना है कि -

Thank you ji.. to all my dear friends...

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