Sunday, May 10, 2009

मेरी माँ


मुझे प्यारी मेरी माँ
दुनिया से है न्यारी माँ

प्यार से सुबह जगाती है
मीठा दूध पिलाती है

पहना के मुझे सुन्दर कपडे
स्कूल छोड के आती है

अच्छे अच्छे खाने बनाती
अपने हाथ से मुझे खिलाती

रोज खेलती मेरे साथ
चलती मेरा पकड के हाथ

प्यार से मुझको गले लगाए
मीठी-मीठी लोरी सुनाए

पापा को जब गुस्सा आए
तो माँ आकर मुझे बचाए

कभी -कभी माँ जब छुप जाए
तो मुझे रोना आता है

माँ का इक पल भी न दिखना
मुझको जरा न भाता है

अच्छी टीचर मेरी माँ
मेरी दोस्त मेरी माँ
प्यारी प्यारी मेरी माँ
दुनिया से है न्यारी माँ
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इस कविता को आप सबकी प्यारी मीनू आन्टी ने आवाज़ भी दी है। उसे भी सुनिए और अपनी-अपनी माँ को भी सुनाइए-


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7 पाठकों का कहना है :

विनय का कहना है कि -

ati sundar kavitaa...

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

मुझे 'माँ' दिवस पर प्रकाशित सभी कविताओं में से यह कविता सबसे कोमल और सुंदर लगी। मीनू जी ने बहुत प्यारे ढंग से आवाज़ भी दी है।

neelam का कहना है कि -

hum sahmat nahi shailesh ki baat se ,
ise kisi bachche ki aawaj me record karke aur prabhaavi banaaya jaa sakta tha ,aagya ho to phir se record karke bhijwaa de .
kabhi kabhi hum apna likha khud sunaane ka lobh nahi tyaag paate hain .

kavita achchi hai ,par recording utni prabhaavi nahi hai .

सीमा सचदेव का कहना है कि -

बहुत आश्चर्य हुआ यह देखकर कि नीलम जी ने पढने और सुनने दोनों मे ही चूक की । यह आवाज मेरी नहीं है ,यह नीचे स्पष्ट लिखा है और सुनने में भी मै जानती हूं कि मेरी आवाज पहचानने में किसी को कोई गलती कभी हो ही नहीं सकती ( जिसने सुनी हो ) ।
मीनु जी की आवाज तो मुझे हमेशा प्रभावित करती है । उनको तब से सुन रही हूं जब उन्होंने मेरी पहली कविता कविता को आवाज दी थी । एक बार मीनु जी को फ़िर धन्यवाद

Kavi Kulwant का कहना है कि -

sundar

neelam का कहना है कि -

seema ji galti sitf itni hui ki humne socha ki ise meenu ji ne likha hai ,kavita ke baare me abhi bhi meri wahi raay kaayam hai ,ki ise kisi bachche se sunwaaya jaata to kavita jeevant ho uthti .

apni apni raay alag ho sakti hai ,aap ko kahi par bhi hum kuch kah nahi sakte ,aap jo sthaan rakhti hain n kewal baaludyaan me varan humaare dilon me bhi wo to jag jaahir hai ,agar kisi ki bhaavnaaon ko koi chot pahunchi ho to hume maafi chaahte hain .

मीनाक्षी का कहना है कि -

सीमाजी, शैलेशजी के आग्रह पर आवाज़ देने की हिम्मत कर पाए...वैसे भी बच्चो के लिए तो कुछ भी करने के लिए तैयार रहते है.
@नीलमजी..आप सही कह रही है कि बच्चे की आवाज़ कविता को और जीवंत कर देता है....हमारे आसपास अगर बच्चे होते तो हम भी यही चाहते क्योकि जानते है कि उनके मन की बात उन के मुख से कुछ ओर ही प्रभाव छोडती है.

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