Friday, November 7, 2008

अमर उजाला में बाल-उद्यान की चर्चा

६ नवम्बर २००८ के अमर उजाला (हिन्दी दैनिक) में रंजना भाटिया द्वारा बाल-उद्यान पर ५ नवम्बर २००८ को प्रकाशित दीदी की पाती शृंखला की 'पॉपकॉर्न की कहानी' के कुछ अंश प्रकाशित हुए हैं। इससे पहले सीमा सचदेव की कविताएँ और रंजना भाटिया की 'दीदी की पातियाँ' राजस्थान-पत्रिका समूह की बाल-पत्रिका 'छोटू-मोटू' में भी प्रकाशित होते रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि लोग अब यह मानने लगे हैं कि सजाल पर भी अच्छा बाल-साहित्य आने लगा है।





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7 पाठकों का कहना है :

Anonymous का कहना है कि -

Ranju ji bahut-bahut BADHAAII . Shaayad kabhi BAAL-SAAHITAYKARO ko bi sammanit kiya jaayega.....:)

Anonymous का कहना है कि -

shaayad kabhi yunikavi ki bhaanti hindyugm dvaara BAAL-UDYAAN par bhi nazar daudaaii jayegi aur baal-saahitaykaaro ko bhi purskaar se navaaza jaayega

Seema Sachdev का कहना है कि -

रन्जना जी हार्दिक बधाई स्वीकारे ,आपकी जानकारी वास्तव मे लाजवाब होती है.....सीमा सचदेव

तपन शर्मा का कहना है कि -

रंजना जी बधाई स्वीकारें...
आप लोग बच्चों के लिये जो कर रहे हैं वो आगे बहुत काम आयेगा... क्योंकि इसमें कोई संदेह नहीं कि आने वाले वर्षों में इंटेरनेट का प्रयोग बढ़ने वाला है और अगर स्कूलों में "बाल-उद्यान’ पढ़ाया जाने लगे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा...

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बहुत बहुत बधाई रंजू जी..


आपके पॉपकार्न की खुशबू
हमको भी खींच लायी
चलती रहे यह कलम बालहिती
पुनश्च बहुत बहुत बधाई

sahil का कहना है कि -

WOW!yah bahut hi khushi ki bat hai,khaskar ranjana ji,aapki mehnat rang layi.badhai swikar karein.
ALOK SINGH "SAHIL"

नियंत्रक । Admin का कहना है कि -

अनाम जी,

आपका विचार बहुत बढ़िया है। हिन्द-युग्म इस पर विचार भी कर रहा है। जल्द ही आप देखेंगे कि हम बाल-साहित्य-सृजन के लिए भी सम्मान और पुरस्कार बाँटेंगे। और देखिए ना, आप हमारे बाल-रचानाओं को पढ़ते हैं, अपनी प्रतिक्रियाएँ हमें देते हैं, यह अपने-आप में यह बहुत बड़ा पुरस्कार है किसी रचनाकार के लिए।

पिछले वर्ष बाल-दिवस पर हमने रौनक पारेख को बाल-उद्यान सम्मान दिया भी था। अब जल्द ही कुछ नया करने की फ़िराक में हैं हमलोग।

आपका पुनः धन्यवाद।

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