Thursday, December 27, 2007

बाल-दोहावली


मात पिता गुरू को करे नित्य प्रातः प्रणाम
राघव जीवन सफल हो पाये उच्च मुकाम


ठंडे जल से प्रातः ही नित्य होय स्नान
चुस्ती फुर्ती राखि दिन रुग्णो मिले निदान


विद्यालय से बे-वजह अगर लिया अवकाश
छात्र पिछ्ड़ता काम में फिरे खोदता घास


गृह-कार्य आकर करे रोज रोज का रोज
राघव शत-प्रतिशत कहे मिटे मगज का बोझ


हरी सब्जियाँ दाल और पोषक ले आहार
ह्ष्ठ पुष्ठ तन में रहे बुद्धि की भरमार


बड़ों को दे सम्मान और छोटों को दे प्यार
सबके मन को जीतता सरस मधुर व्यवहार


अगर पढ़ाई वक्त पर और समय पर खेल
राघव निश्चय जानिये कभी न होगे फेल


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5 पाठकों का कहना है :

shobha का कहना है कि -

राघव जी
बाल साहित्य लिखने में आप लाजवाब हैं । बहुत बढ़िया लिखा है । बधाई

sahil का कहना है कि -

बहुत ही प्यारी दोहावली रची है आपने राघव जी,बहुत अच्छे
आलोक सिंह "साहिल"

sunita yadav का कहना है कि -

बहुत बढ़िया ....ला जवाब
सुनीता

Alpana Verma का कहना है कि -

हर दोहे में बच्चों के लिए एक संदेश है.
सभी दोहे बच्चों को जरुर पसंद आयेंगे.
और इन में दिए संदेश को वह आत्मसात भी करेंगे.
आप तो सभी रचनाएँ बहुत अच्छी लिखते हैं राघव जी-इस में कोई दो राय नहीं.

रचना सागर का कहना है कि -

राघव जी
अच्छी कविता और बहुत अच्छी जानकारी

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