Tuesday, December 4, 2007

अख़बार


सुबह उगते सूरज के संग
चला आता है यह अखबार

दुनिया भर की सब ख़बरो को
ख़ूब मज़े से सुनाता अख़बार

सूरज के निकलते ही दादा बाहर बैठ जाते
दादी को पढ़ के ख़बरे ख़ूब मज़े से वो सुनाते
पापा को चाय के संग भाता है अपना अख़बार
रात रात भर छप के सुबह सबको खबर सुनाता अखबार

खेल कथा कहानी किस्से और लगाये ख़बरों का अम्बार
दुनिया भर के मौसम का भी हाल सुनाता है अखबार
घर बैठे हम सब पढ़ लेते जान लेते जगत का हाल
ऐसा प्यारा ऐसा दुलारा यह सबका है अखबार !!


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11 पाठकों का कहना है :

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

रंजना जी,

अखबार पर अच्छी प्रस्तुति है। बच्चों को कंठस्त करते मज़ा भी आयेगा और जानकारी भी मिलेगी। बहुत बधाई।

*** राजीव रंजन प्रसाद

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

रंजू दी का प्यार मिला
सुबह-सुबह अखबार मिला
कैसा है मौसम का मिजाज
कौन खेल में जीता आज
खबरों का अम्बार मिला
सुबह-सुबह अखबार मिला

रंजू द ग्रेट..
अगली कविता/पाती का
बेसब्री से वेट..

-धन्यवाद

Anish का कहना है कि -

ह्म्म्म्म...
बहुत सुंदर है अखबार
अच्छी रचना है जी
अवनीश तिवारी

नीरज गोस्वामी का कहना है कि -

रंजू जी
सीधे सादे शब्दों में बहुत सुंदर रचना. बच्चों के लिए लिखना बहुत मुश्किल होता है लेकिन आप ने किस सरलता से इसे अंजाम दिया है. बधाई
नीरज

मीत का कहना है कि -

कमाल है भई. आप क्या क्या लिख लेती हैं !!!!!! बड़ा ही कठिन है ये .... मज़ा आ गया.

अजय यादव का कहना है कि -

बहुत खूब!

सजीव सारथी का कहना है कि -

इस बार दीदी की पाती का क्या हुआ चलो अखबार की महिमा भी अच्छी करी है आपने

रचना सागर का कहना है कि -

रंजना जी,

क्या बढिया अखबार है....

sahil का कहना है कि -

रंजू जी,इतनी प्यारी बाल-कविता ! निशित तौर पर यह बच्चों को पसंद आयेगी.
अलोक सिंह "साहिल"

Alpana Verma का कहना है कि -

रंजना जी,

सीधे सादे शब्द समेटे हुए यह सरल सी कविता बच्चों को भाएगी और ख़ास कर इस में जो चित्र हैं वे कविता को और भी रोचक बना रहे हैं.धन्यवाद .

मोहिन्दर कुमार का कहना है कि -

जी बढिया है.. अपुन के घर भी रोज सुबह अखबार आता है... मगर क्या करें शाम को ही पढ पाते हैं वो भी खाना खाते खाते या टी वी देखते देखते.....बीबी को नाराज कर के.....

सुन्दर रचना... बधाई

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