Saturday, August 29, 2009

बूँदा-बाँदी



बूँदा-बाँदी हुई है भारी,
छतरी भी उड़ गई हमारी,
मुन्नु भीगा, चुन्नु भीगा,
कीचड़ से भर गई क्यारी ।

स्कूल भी जाना हुआ है मुश्किल,
खेल भी कैसे खेलेंगें हम,
दोस्त सभी घुसे हैं घर में ,
बोरियत से निकले है दम ।

या तो बारिश नहीं है आती,
या फिर हमको खूब सताती,
उमस बहाये खूब पसीना,
धूप भी हम को नहीं है भाती ।

इन्द्रधनुष है बड़ा न्यारा,
आसमान में प्यारा-प्यारा,
भारी वर्षा बेशक सताये,
पर मौसम है सबको भाये ।

हरे खेत-खलिहान बने हैं ,
फसलों के अंबार खड़े हैं,
बारिश आये, खूब सुहाये,
देश को भी धनवान बनाये।

--डॉ॰ अनिल चड्डा


आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

5 पाठकों का कहना है :

Shamikh Faraz का कहना है कि -

चड्डा जी हर बार की तरह लाजवाब.

बूँदा-बाँदी हुई है भारी,
छतरी भी उड़ गई हमारी,
मुन्नु भीगा, चुन्नु भीगा,
कीचड़ से भर गई क्यारी ।

shanno का कहना है कि -

अनिल जी,
क्या बात!

बूँदा-बाँदी हुई है भारी,
छतरी भी उड़ गई हमारी,
मुन्नु भीगा, चुन्नु भीगा,
कीचड़ से भर गई क्यारी ।

लीजिये, इतना मैं भी कह दूं......

भिगो दिया कविता ने सबको
सब बातें है इसमें प्यारी-प्यारी.

Anonymous का कहना है कि -

manju gupta aati hogi badhai dene. inhe to kewal unipathak 200 rupee se matlab hai.

Manju Gupta का कहना है कि -

अनोंय्मोउस जी आप ka नाम लिखा है आभार .आप के कमेन्ट ने उनिपाठक के भाव की बरसात कर दी. आप के बाद ही कविता पर अपने विचार लिख रही हूं . चडडा जी की हमेशा की तरह बहुत सुंदर बाल रचना . बधाई .

Manju Gupta का कहना है कि -

अनोनिमस जी मेरे कमेन्ट अमूल्य,अनमोल हैं .२००रु. इसकी कीमत नहीं है .आप रचनाओं पर कमेन्ट दो .न की मेरे कमेन्ट पर .

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)