Sunday, August 2, 2009

मुझसे दोस्ती करोगे

एक रिश्ता दोस्ती का/सलामत रहे दोस्ताना

ईश्वर ने हमें कई अनमोल तोहफे दिये हैं, उनमें से एक तोहफा है दोस्ती का। दोस्ती रिश्तों की भीड़ में एक ऐसा रिश्ता है जिसे चुनने की आजादी हमारे पास है। जन्म के साथ हमें कई रिश्ते मिलते है, लेकिन वो बंधन ईश्वर ने आप के साथ बाँधे हैं। उनमें चुनाव की गुंजाईश ही नहीं है, क्योंकि वो सब रिश्ते हमारे अपने हैं। अपने और परायों की बीच दोस्ती का रिश्ता एक कड़ी की तरह उभरता है तथा हमारे जीवन में रिश्तों की अहमियत को बढ़ा देता है।

दोस्ती का अनमोल रिश्ता धर्म-जाति, ऊँच-नीच, अमीरी-गरीबी की सीमाओं से परे है। यह एक ऐसा नाता है जो किसी दायरे में नहीं सिमटता, बल्कि इस एक रिश्ते में सारे रिश्ते समा जाते हैं। आजकल ज्यादातर लोग जीविका के लिये अपने परिवारों से दूर देश-विदेशों में बस गये हैं। ऐसे में हमारे जीवन में परिवार की कमी को दोस्त ही पूरा करते हैं और आपके अच्छे-बुरे वक्त में साथ खड़े नजर आते हैं।

आधुनिकता के दौड़ में जिस तरह से रिश्तों में खटास आयी है वो सभी जानते हैं। आज भाई-भाई का दुश्मन है। खून के रिश्ते सिर्फ नाम के रह गये हैं. लेकिन दोस्ती की मिसालें आज भी दी जाती हैं। यह भी कहना गलत न होगा कि दोस्ती का रिश्ता भी बुराइयों से अछूता नहीं है. इसलिये जरूरी है कि हम दोस्तों का चुनाव करते समय बहुत सावधानी बरतें। कहते हैं कि "संगत का असर" बहुत ज्यादा होता है। अगर आपको सच्चे और अच्छे दोस्त मिल गये तो आपकी जिन्दगी बन जाती है और कहीं बुरे मिले तो आपको बुराई के दलदल में फँसते देर नहीं लगती। यहाँ यह भी जानना जरूरी है कि सच्चाई-अच्छाई की परिभाषा क्या है? मेरे विचार से एक सच्चा दोस्त वही है जो आपको गलत राह पर जाने से रोके, सही-गलत का फर्क बताये, सुख-दुख में आपके साथ खड़ा रहे, आपकी गल्तियों पर पर्दा न डाले, अगर दूसरों से आपकी कमियों को छुपाए भी तो आपको यह एहसास जरुर कराये की आप में यह कमियाँ हैं और उन्हें सुधारने में मदद करे।

सच्चे मित्र की पहचान बुरे वक़्त में हो जाती है। हमारी जिन्दगी में दोस्तों का प्रभाव और महत्व दोनों ही बहुत अधिक होते हैं। कई बार जो बातें हम अपने माता-पिता व भाई-बहिन से नहीं कह पाते वो हम अपने दोस्तों से बाँट सकते हैं। उनसे सलाह ले सकते हैं। इसी तरह माता-पिता भी अपनी बातों को बच्चों तक पहुँचाने के लिये दोस्तों का सहारा लेते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि दोस्ती का रिश्ता कितना अहम है। इसलिए माता-पिता के लिये भी यह आवश्यक है कि वे अपने बच्चों को सही दोस्त चुनने में मदद करें। साथ ही ध्यान रखें कि बच्चों के दोस्त कौन हैं, क्या हैं तथा कैसे है? दोस्तों से तथा उनके परिवार वालों से सम्पर्क बनाए रखें।

चलते-चलते यही कहूँगी कि दोस्ती एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जो हमारे जीवन में बहुत मायने रखता है। अत: हमें बहुत सावधानी पूर्वक इसका चुनाव करना चाहिये। अपने सच्चे मित्रों को अपने से दूर न होने दें। ऐसा नहीं है कि दुनिया में सच्चे और अच्छे लोग नहीं हैं। पहले स्वयं सच्चे मित्र बनें फिर देखिये लोग खुद कहेंगे कि "मुझसे दोस्ती करोगे"।

दीपाली पंत तिवारी 'दिशा'


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9 पाठकों का कहना है :

M VERMA का कहना है कि -

सही है जो खुद का मित्र है उसी से कोई दोस्ती करना चाहेगा.
अच्छा आलेख.

Nirmla Kapila का कहना है कि -

दिशाजी हम तो आपसे दोस्ती करना चाहेंगे बहुत सुन्दरता से दोस्ती का अर्थ समझाया है तो अपनी दोस्ती पर बधाई और शुभकामनायें

Pakhi का कहना है कि -

Happy Friendship day.....!! !!!!

पाखी के ब्लॉग पर इस बार देखें महाकालेश्वर, उज्जैन में पाखी !!

Manju Gupta का कहना है कि -

आलेख ,शीर्षक ,कार्टून पसंद आये. आज तो फ्रेंडशिप डे है संसार में सभी लोग दोस्त बन जाए तो दुश्मनी ही नहीं रहेगी .यही दुआ कर रही हूं. आभार .

neelam का कहना है कि -

अले वाह ,आप तो हमारी दोस्त बन गयी हैं आपको पता है ,हमारी भी बेटी का नाम पाखी है ,हमने सोचा की पाखी ने कब अपना ब्लॉग बना लिया वैसे हम कह तो कब से रहे थे ,पर ये वाली पाखी तो हमारी पाखी से बहुत छोटी है ,anyway we r friends now .

neelam का कहना है कि -

दीपाली जी ,बाल उद्यान पर बहुत अच्छे दिन आपने इस परिवार में आने के लिए सोचा ,स्वागत है आपका

Disha का कहना है कि -

धन्यवाद नीलम जी

manu का कहना है कि -

bahut khoob...

pahle ke do pairagraphs to lagaa ke manine hi likhe hain...
bahut sunder tareeke se likhaa hai ..

Shamikh Faraz का कहना है कि -

आपका आलेख पढ़कर एक सूक्ति याद आई. "किसी दोस्त के लिए कुर्बानी देना उतना मुश्किल नहीं है जितना कि उस को ढूँढना जिसके लिए कुर्बानी दी जाये."
ज़िन्दगी में दोस्त होना ज़रूरी है लेकिन उससे भी ज़रूरी है अच्छा दोस्त होना.

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