Friday, September 19, 2008

वरदान दो

माँ मुझे वरदान दो,
गीत सुर का ज्ञान दो ।
विश्व में सम्मान दो,
माँ मुझे वरदान दो ।

मधुर हो वाणी सदा,
कटु वचन न कहें कदा ।
राष्ट्र निज अभिमान दो,
माँ मुझे वरदान दो ।

सत्य पथ अरमान हो,
पाप से अनजान हों ।
पुण्य प्रेम संज्ञान दो,
माँ मुझे वरदान दो ।

ज्योति बन पथ पर जलें,
मार्ग परहित पर चलें ।
सृजन शक्ति महान दो,
माँ मुझे वरदान दो ।

माँ पिता पग स्वर्ग हो,
उनकी सेवा धर्म हो ।
साहस शौर्य मान दो
माँ मुझे वरदान दो ।

कवि कुलवंत सिंह


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6 पाठकों का कहना है :

सतीश सक्सेना का कहना है कि -

बहुत अच्छा लिखा है कुलवंत जी !
मां शारदा की स्तुति बाल मुख से, आनंद आ गया !

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

कुलवंत जी,

बढ़िया प्रार्थना लिखी है आपने।

seema gupta का कहना है कि -

माँ पिता पग स्वर्ग हो,
उनकी सेवा धर्म हो ।
साहस शौर्य मान दो
माँ मुझे वरदान दो ।
"bhut acchee prarthna"

Regards

रंजना [रंजू भाटिया] का कहना है कि -

बहुत सुंदर कवि जी लिखा है आपने

Kavi Kulwant का कहना है कि -

Aap sabhi ko hardik dhanyavaad

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बहुत सुन्दर वन्दना...

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