Thursday, August 28, 2008

6वीं क्लास की छात्रा द्वारा रचित कविता



पाखी मिश्रा 6वीं कक्षा की छात्रा हैं ,कविता-लिखना इनका शौक है , मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखना पसंद करती है, मगर हिन्द-युग्म से जुड़ने की इच्छा से हिन्दी में भी लिखने को प्रोत्साहित हुई हैं, बाल भारती की छात्रा है, विद्यालय की पत्रिका में भी इनके कविताएँ व आलेख छपते रहते हैं|

अन्धकार

यह आता सबके जीवन में ,
सबको बहुत बैर है इससे ,
जिसकी जिन्दगी में आया ,
समझो दुःख उसके लिए लाया ,
पर क्यों ? क्यों हम सब डरते है,
पर गज़ब है , देखकर कहती हूँ मै
अगर आज अन्धकार है तो कल ,
होगा उजाला भी,
जो हमें देगा बहुत से फल.................................!!!!!!!


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7 पाठकों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

हिन्दी हमारी मात्र भाषा है ,जो अपनी माँ का ,अपनी मातृ भाषा का सम्मान करता है ,वो दुनिया की किसी भी बुलंदी को पा सकता है ,
शुभकामनाओं के साथ

रंजन का कहना है कि -

बहुत अच्छा है..हिन्दी लिखते रहिये...

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

पाखी बिटिया को बहुत बहुत बधाई।

pankaj का कहना है कि -

congratulations, tumne bahut acchee aur inspiring poem liki hai.

good luck for your future.

annu

pankaj का कहना है कि -

zindgi me safal hone ke liye andhkar aur ujale ke fark ke saath-saath inki anivarya upasthiti ko samajhna bahut zaruri hai.

Pakhi apne 6th class me hokar bhi isko kavita ke madhyam se bahut achchhi tarah samjhaya hai.

bahut sari shubhkamnaen

pakhi का कहना है कि -

very good pakhi ,,,,,,,,its great you should write more more poems ,,very good

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

ये कौन हैं बिटिया प्यारी सी....
बैठी, खिलती फुलवारी सी....
चेहरे पर मधुर स्माइल है...
क्या गजब का ये स्टाइल है...
कहते हैं नाम पाखी मिश्रा
या मिश्री की पुडिया कोई...
या परियों की शहजादी है
या जापानी गुडिया कोई..
बच्चों के उपवन में आकर
जो भीनी सुगन्धि बखेरी है
यह सुगन्ध विधाता बनी रहे
बस तुमसे विनती मेरी है..

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