Friday, August 29, 2008

होते वीर अमर

जब से हमने ठान लिया है,
सबने हमको मान लिया है,
भारत माँ की रक्षा को हम
सदा रहें तत्पर ।
होते वीर अमर ॥

नन्हे बालक हम दिखते हैं,
लेकिन साहस हम रखते हैं,
कोई टिके न, जब चलते हम
वीरता की डगर ।
होते वीर अमर ॥

भले देश पर मर मिट जाएँ,
सीने पर ही गोली खाएँ,
दुश्मन भले ही सामने हो
चलते रहें निडर ।
होते वीर अमर ॥

देश भक्ति है अपना नारा,
जिसने भी हमको ललकारा,
उसको धूल चटा देंगे हम
एक एक गिनकर ।
होते वीर अमर ॥

तूफानों में हम घिर जाएँ,
काल प्रलय बन आ जाए,
मिट जाए हमसे टकरा कर
खड़े रहें डटकर ।
होते वीर अमर ॥

कवि कुलवंत सिंह


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4 पाठकों का कहना है :

महामंत्री-तस्लीम का कहना है कि -

प्रेरक कविता है, बधाई।
-जाकिर अली "रजनीश"

seema gupta का कहना है कि -

देश भक्ति है अपना नारा,
जिसने भी हमको ललकारा,
उसको धूल चटा देंगे हम
एक एक गिनकर ।
होते वीर अमर ॥
"very inspiring poetry, liked it"

Regards

Seema Sachdev का कहना है कि -

bahut achchi kavita hai kavi ji ,Desh bhakti kaa bhaav jagaati . Badhaaii

dhiru singh का कहना है कि -

ek aisa geet jo "veer tum bade chlo,dheer tum bade chalo" .ke sharakhla ka naya sathi mahsoos hota hai.aapko badai.baccho par sakaratmak asar dalne main saarthak hoga.

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