Monday, August 18, 2008

साढ़े तीन साल की लड़की द्वारा रचित एक बाल-कविता

3.5 वर्षीय मन मिश्रा की कविता 'एक चूहा'

आज हमें एक बाल-कविता प्राप्त हुई जिसे ३ साल ६ महीने की एक लड़की मन मिश्रा ने रचा है। ५ जनवरी २००५ को जन्मी मन ने अभी कुछ महीनों पहले ही रियॉन इंटरनेशनल स्कूल, शाहजहाँपुर (यूपी) में नर्सरी कक्षा में प्रवेश लिया है। Mann Mishraकृपया पढ़ें और मन को प्रोत्साहित करें।

एक चूहा था ,
पानी में रहता था
बाहर निकल कर आया,
मम्मी से पूछा
टोय्स (खिलोने ) फैला लें,
मम्मी ने कहा ..........................नहीं।


--मन मिश्रा

प्रेषक- नीलम मिश्रा


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12 पाठकों का कहना है :

Seema Sachdev का कहना है कि -

Man beta jitani pyaari aap ho utani pyaari aapki kavita hai . Likhati rahna aur hame apni pyaari-pyaari nanhi-munni kavitaayen padhane ka suavasar bhi dena .Dhero shubh-kaamnayen......seema sachdev

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

मन के मन की बात निराली
कविता बनकर बाहर आली
या तो बिखरीं किरन सूर्य से
या फिर फूलों वाली डाली....

बडी प्यारी कविता लिख ली राजकुमारी ने..
ईश्वर से बच्ची के सुखद भविष्य के लिये कामना..

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

मन,

मुझे तुम्हारी कविता पढ़कर बहुत अच्छा लगा। बहुत ही खूबसूरत। आगे कुछ लिखना तो ज़रूर भेजना।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

चूहे की कविता तो बहुत ही सुंदर है, नन्ही कवयित्री को ढेरों शुभकामनाएं.

tanha kavi का कहना है कि -

अरे वाह मन!
एकदम नाम की तरह आप और आपका काम भी खूबसूरत है। कविता बहुत सुंदर है।

ऎसे हीं प्याली-प्याली(प्यारी-प्यारी) कविताएँ लिखते लहिए(रहिए)!!

-विश्व दीपक

sumit का कहना है कि -

बहुत अच्छा बच्चे।
प्यारी सी कविता

सुमित

mahashakti का कहना है कि -

मन जी की बहुत मनमोहनी कविता

C.R.Rajashree का कहना है कि -

Man beta aapne to abhut achi aur cundhal kavita likhi hai badhai.aap aur is tarah titli, chidiya, ful aadi par bhi kavitha likh sakti hain. Bahut khoob.
C.R.Rajashree

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

नन्ही मन को पूरे 100 मन बधाई।

दिवाकर मिश्र का कहना है कि -

मन बिटिया को कविता लिखने और उसके प्रकाशित होने की बहुत बधाई । वैसे चूहे की मम्मी ने यह गलत किया कि उसको खिलौने फैलाने नहीं दिये । चूहा पानी में रहता था । उसके खिलौने भी पानी में रहते थे और भीगे हुए थे । वह उनको फैलाकर सुखाना चाहता था । अरे भाई जब उन्हें वह सुखाता तभी तो खेलता ! मम्मी को सोचना चाहिए कि बच्चे खेलेंगे नहीं तो स्वस्थ कैसे रहेंगे । और फिर पढ़ाई कैसे करेंगे । पर चूहा भी कितना अच्छा था कि मम्मी ने मना कर दिया तो उसने जिद नहीं की ।

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

कवि संसद के नन्हे संसद मन का स्वागत.

Disha का कहना है कि -

भोले मन की भोली भावनायें
क्यों न हम सबको रिझायें
नन्हीं कलम से बिखरे शब्द
आसमान की ऊचाईयों तक जायें
बहुत सुन्दर प्रयास

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