Wednesday, June 25, 2008

चिड़िया रानी

चिड़िया रानी चिड़िया रानी
छोटी हो पर बड़ी सयानी
लघु रेशमी गात तुम्हारा
गजब का साहस तुमने धारा
डाली डाली उड़ती हो
मेरा मन ललचाती हो
अँगना में जब मेरे आती
फुदक फुदक के खेल दिखाती
हाथ कभी ना मेरे आती
यहाँ वहाँ फुर से उड़ जाती
चीं चीं करके शोर मचाती
अपनी भाषा में बतलाती
आलस को तुम दूर भगाओ
उठो सवेरा पढ़ने जाओ
दूध पियो और फल खाओ
कक्षा में तुम अव्वल आओ


सुषमा गर्ग
24.06.08


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3 पाठकों का कहना है :

Seema Sachdev का कहना है कि -

चीं चीं करके शोर मचाती
अपनी भाषा में बतलाती
आलस को तुम दूर भगाओ
उठो सवेरा पढ़ने जाओ
sushama ji bahut pyaari hai aapki nanhi si kavita .shaayad aisa hi bhaav vyakt kiya tha aapne apni ek poem "CHIDIYA KAA SANDESH " me bhi.....

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

चिड़िया जैसी ही प्यारी सन्देशप्रद कविता..

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

चिडिया रानी, चिडिया रानी
मन का भाई तेरी कहानी।

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