Friday, October 17, 2008

राज दुलारे

राज दुलारे जग के प्यारे ।
हंसते और हंसाते न्यारे ॥

किलकारी से जब घर चहके,
हंसी खुशी से तब घर महके,
देख देख उनको दिल बहके,
मुसकाते जब वह रह रह के,

कोमल फूलों से हैं प्यारे ।
हंसते और हंसाते न्यारे ॥

भोली सूरत जब दिखलाते,
सबके मन में बस हैं जाते,
प्यार से जो भी पास आते,
इनके ही बन कर रह जाते,

हर बुराई से दूर प्यारे ।
हंसते और हंसाते न्यारे ॥

जब यह अपनी हठ दिखलाते,
बड़े बड़े भी झुक हैं जाते,
लड़ना भिड़ना सब कर जाते,
भूल पलों में लेकिन जाते,

सच्चा प्रेम जगाते प्यारे ।
हंसते और हंसाते न्यारे ॥

धार प्रेम की यह बरसाते,
घर घर में खुशहाली लाते,
भगवन इनके दिल बस जाते,
पावन निर्मल प्यार जगाते,

सब के मन को भाते प्यारे ।
हंसते और हंसाते न्यारे ॥

कवि कुलवंत सिंह


आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

7 पाठकों का कहना है :

sahil का कहना है कि -

कुलवंत जी,अच्छा लिखा.खासी प्रभावी.
आलोक सिंह "साहिल"

Seema Sachdev का कहना है कि -

kavi ji bahut hi pyaari lagi aapki kavita .Pyaare-pyaare nanhe-munne bachche aise hi hote hai....seema

neelam का कहना है कि -

कुलवंत जी ,
आपकी कविता बार -बार यह गुनगुनाने को मजबूर करती हैं
बच्चे मन के सच्चे
सारी जग की आँख के तारे ,
ये वो नन्हें फूल हैं जो भगवान् को लगते प्यारे ,
इनको किसी का बैर नही ,
इनके लिए कोई गैर नही ................

neelam का कहना है कि -

कुलवंत जी ,
आपकी कविता बार -बार यह गुनगुनाने को मजबूर करती हैं
बच्चे मन के सच्चे
सारी जग की आँख के तारे ,
ये वो नन्हें फूल हैं जो भगवान् को लगते प्यारे ,
इनको किसी का बैर नही ,
इनके लिए कोई गैर नही ................

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

कुलवंत जी,

आपकी बाल-कविताएँ बहुत ही सुंदर और सरल होती हैं। अच्छा लगता है पढ़कर।

Kavi Kulwant का कहना है कि -

Are wah is baar to shailesh ji ne bhi taarif kar di! kya baat hai...

रंजना [रंजू भाटिया] का कहना है कि -

बहुत अच्छी लगी यह कविता कवि जी

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)