Friday, October 10, 2008

बच्चों की दुनिया

बच्चों की है दुनिया प्यारी
लगती ज्यों फूलों की क्यारी
रंग रंग के फूल खिले हैं
महके यह बगिया फुलवारी ।

गूंज उठे जब घर किलकारी
सद के जाए माँ बलिहारी
भोली सूरत मोहित करते
वारी जाए दुनिया सारी ।

लड़ना, भिड़ना और झगड़ना
लेकिन फिर से घुल मिल रहना
पल भर में सब भूल भुला कर
मिलजुल कर फिर संग खेलना ।

पल में रूठें, पल में मानें
नहीं किसी को दुश्मन जानें
अजनबी हो कोई भले ही
खेल - खेल में अपना मानें ।

कोमल मन है, निर्मल बातें
हृदय खोल अपना दिखलाते
संग बिता कर कुछ पल देखो
प्रभु के दर्शन हम पा जाते ।

कवि कुलवंत सिंह


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6 पाठकों का कहना है :

neeshoo का कहना है कि -

bahut bdhiya bahi sahab .

seema gupta का कहना है कि -

गूंज उठे जब घर किलकारी
सद के जाए माँ बलिहारी
भोली सूरत मोहित करते
वारी जाए दुनिया सारी ।
"bhut masum or pyaree kaveeta'

regards

neelam का कहना है कि -

कोमल मन है, निर्मल बातें
हृदय खोल अपना दिखलाते
संग बिता कर कुछ पल देखो
प्रभु के दर्शन हम पा जाते ।

शोभा का कहना है कि -

पल में रूठें, पल में मानें
नहीं किसी को दुश्मन जानें
अजनबी हो कोई भले ही
खेल - खेल में अपना मानें ।

कोमल मन है, निर्मल बातें
हृदय खोल अपना दिखलाते
संग बिता कर कुछ पल देखो
प्रभु के दर्शन हम पा जाते ।
अच्छा लिखाहै

Kavi Kulwant का कहना है कि -

thanks daer friends!

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

गूंज उठे जब घर किलकारी
सद के जाए माँ बलिहारी
भोली सूरत मोहित करते
वारी जाए दुनिया सारी ।

सुन्दर......

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