Friday, February 12, 2010


बगुलों की पांत !

बगुलों की पांत !

एक, दो ,तीन ,चार ,

पाँच ,छ: ,सात .....

सातों पर फड़काते साथ ,

सातों उड़ते जाते साथ !

सातों बनाते एक लकीर --

आसमान में छूटा तीर |

तीर कहाँ को जाएगा ?

देखें ,कौन बतायेगा !

बगुलों की पांत !

बगुलों की पांत !

एक- दो -तीन -चार- -पाँच- छ:- सात !

हरिवंश राय बच्चन


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6 पाठकों का कहना है :

संगीता पुरी का कहना है कि -

बहुत बढिया !!

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

सुंदर बाल गीत...बढ़िया लगी..

रावेंद्रकुमार रवि का कहना है कि -
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रावेंद्रकुमार रवि का कहना है कि -

नन्हे-मुन्नों और नवसाक्षरों के लिए
एक महत्त्वपूर्ण कविता!

--
कह रहीं बालियाँ गेहूँ की -
नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा!"
--
संपादक : सरस पायस

अक्षिता (पाखी) का कहना है कि -

बहुत सुन्दर बाल-गीत. पढ़कर मजा आ गया.

neelam का कहना है कि -

अरे वाह पाखी तुम्हे कविता अच्छी लगी और हम सबको क्या चाहिए ,वैसे यहाँ पर तम्हारे मतलब की और भी उपयोगी जानकारीहै,उसे ढूंढ कर तुम तक पहुंचाने का काम तुम्हारी मम्मी का ,क्योंकि
तुम तो अभी बहुत छोटी हो .

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